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पूर्वी दिल्ली में जाम पर लगेगा ब्रेक, कंप्यूटर पर बनेगा ट्रैफिक मॉडल; सड़क-फ्लाईओवर का होगा डिजिटल ट्रायल

Updated: Mon, 31 Aug 2026 10:31 PM (GMT+05:30)

पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव, जाम और हादसों से निपटने के लिए पीडब्ल्यूडी रोड सेफ्टी ऑडिट कराएगा। इसके तहत कंप्यूटर आधारित ट्रैफिक सिमुलेशन मॉडल तैयार होगा।

कंप्यूटर पर तैयार किया जाएगा ट्रैफिक मॉडल। फोटो: एआई जनरेटेड

कंप्यूटर पर तैयार किया जाएगा ट्रैफिक मॉडल। फोटो: एआई जनरेटेड

HighLights

  1. पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर रोड सेफ्टी ऑडिट होगा

  2. ट्रैफिक सिमुलेशन मॉडल से होगा ट्रैफिक एनालिसिस

  3. 3.50 करोड़ की लागत से सलाहकार कंपनी नियुक्त होगी

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव, जाम और सड़क हादसों के खतरनाक स्थानों की पहचान के लिए रोड सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा।

इसके साथ ही कंप्यूटर आधारित ट्रैफिक सिमुलेशन मॉडल तैयार होगा, जिसमें सड़कों पर बदलाव करने से पहले उसके असर का कंप्यूटर पर ट्रायल किया जाएगा।

ट्रैफिक सिमुलेशन मॉडल पर होगा काम 

ट्रैफिक सिमुलेशन मॉडल के जरिए पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर यातायात का वास्तविक डिजिटल मॉडल तैयार किया जाएगा। इसमें यह देखा जा सकेगा कि वाहन कहां से आ रहे हैं, कहां जा रहे हैं और किन स्थानों पर जाम की स्थिति बन रही है।

नई सड़क, फ्लाईओवर या अंडरपास बनाने से यातायात पर पड़ने वाले संभावित असर का भी पहले कंप्यूटर पर आकलन किया जाएगा। यानी सड़क नेटवर्क में किसी बड़े बदलाव से पहले उसका डिजिटल ट्रायल किया जाएगा।

सर्वे और डिजिटल नक्शों से होगा विश्लेषण

परियोजना के तहत ट्रैफिक सर्वे और नक्शों के जरिए आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। सड़क, यातायात, दुर्घटना, आबादी और अन्य जानकारियों को डिजिटल नक्शे पर समझकर यह पता लगाने का प्रयास होगा कि किन सड़कों और चौराहों पर जाम की समस्या अधिक है।

इसके माध्यम से भविष्य में यातायात का दबाव किस तरह बढ़ सकता है, इसका भी अनुमान लगाया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य केवल मौजूदा जाम का अध्ययन करना नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और बेहतर बनाने के सुझाव तैयार करना भी है।

3.50 करोड़ से लगाई जाएगी सलाहकार कंपनी

इस काम के लिए करीब 3.50 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि से एक सलाहकार कंपनी नियुक्त की जाएगी। एजेंसी का चयन तकनीकी और वित्तीय बोली के आधार पर किया जाएगा।

इस योजना की शुरुआत पूर्वी दिल्ली से की जा रही है। इसके बाद इस व्यवस्था को दक्षिणी और उत्तरी दिल्ली में भी लागू करने की योजना है।

विशेषज्ञों की अनुभवी टीम होगी जरूरी

टेंडर की शर्तों के अनुसार काम करने वाली एजेंसी के पास कम से कम 20 साल के अनुभव वाले पेशेवरों और कर्मचारियों की टीम होनी चाहिए। वहीं ट्रैफिक सिमुलेशन और रोड सेफ्टी ऑडिट के विशेषज्ञों के लिए कम से कम 15 वर्ष के अनुभव की शर्त रखी गई है।

टीम में यातायात एवं परिवहन इंजीनियर, भौगोलिक सूचना प्रणाली और आंकड़ा विश्लेषक, सर्वेक्षण इंजीनियर, कंप्यूटर आधारित नक्शा तैयार करने वाला ड्राफ्ट्समैन और यातायात सर्वेक्षण पर्यवेक्षक शामिल होंगे।

सड़कों पर उतरकर जुटाएंगे वास्तविक आंकड़े

सड़कों पर वास्तविक आंकड़े जुटाने के लिए एजेंसी को कम से कम पांच सर्वे कर्मचारी भी रखने होंगे। पीडब्ल्यूडी ने प्रमुख विशेषज्ञों के एजेंसी के नियमित कर्मचारी होने की शर्त रखी है। उन्हें कम से कम पिछले छह महीने से एजेंसी के पेरोल पर होना चाहिए।

एजेंसी को वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी जमा करने होंगे। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इंटीग्रिटी पैक्ट पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा। इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले बोलीदाता को टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

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