विदेशी फंडिंग से लेकर दुष्प्रचार तक... भारत के खिलाफ कैसे काम करता है प्रोपेगैंडा नेटवर्क?
खुफिया इनपुट के अनुसार, कई विदेशी एजेंसियां और संगठन भारत को अस्थिर करने के लिए एक साझा एजेंडे पर काम कर रहे हैं। इनका मकसद देश की एकता, विकास और वैश् ...और पढ़ें

खुफिया इनपुट के अनुसार, कई विदेशी एजेंसियां और संगठन भारत को अस्थिर करने के लिए एक साझा एजेंडे पर काम कर रहे हैं। पीटीआई
HighLights
विदेशी एजेंसियां भारत की स्थिरता को निशाना बना रही हैं।
फंडिंग, दुष्प्रचार और साइबर हमले मुख्य तरीके हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकता को गंभीर खतरा है।
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। भारत को अस्थिर करने की साजिश अब सीमाओं के बाहर नहीं, बल्कि विदेशों में बैठे शक्तिशाली नेटवर्क के जरिए बुनी जा रही है। खुफिया इनपुट में ये बात सामने आई है कि कई विदेशी एजेंसियां, संगठन और उनके सहयोगी भारत के खिलाफ एक साझा एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

इनका मकसद भारत की एकता, विकास व वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाना और देश की आंतरिक स्थिरता व रणनीतिक हितों को प्रभावित करना है। इन नेटवर्क में खुफिया एजेंसियों से लेकर दुष्प्रचार फैलाने वाले संगठन, विदेशी दुतावास, फंडिंग करने वाले समूह और साइबर हमले करने वाले हैकर नेटवर्क तक शामिल हैं।
इन माध्यमों से देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
दावा है कि विदेशी फंडिंग, साइबर ऑपरेशन, दुष्प्रचार, सूचना युद्ध और सामाजिक ध्रुवीकरण के जरिए कई विदेशी खुफिया एजेंसियां, सरकारी संस्थान, प्राक्सी संगठन, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), मीडिया प्लेटफॉर्म और स्थानीय नेटवर्क मिलकर भारत के भीतर अस्थिरता पैदा करने की सुनियोजित रणनीति पर काम कर रहे हैं।

नेटवर्क में अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआइए), चीन की मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी (एमएसएस), ब्रिटेन की एमआइ-6, तुर्किये की नेशनल इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (एमआइटी) और यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस (एसबीयू) जैसी एजेंसियों का उल्लेख किया गया है।
इनके साथ अमेरिकी विदेश विभाग के ब्यूरो आफ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एवं लेबर (डीआरएल), चीन के दूतावास, विदेशी फंडिंग संस्थाओं, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों, छात्र संगठनों, मीडिया प्लेटफॉर्म और अकादमिक नेटवर्क को भी इस तंत्र का हिस्सा बताया गया है। इन माध्यमों का इस्तेमाल भारत से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर प्रभावी नैरेटिव तैयार करने और उसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है।
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इस अभियान की पूरी कार्यप्रणाली के पहले चरण में विदेशी फंडिंग और संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। दूसरे चरण में स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली व्यक्तियों, सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से प्रभाव का दायरा बढ़ाया जाता है। तीसरे चरण में मीडिया, इंटरनेट मीडिया और अन्य ऑनलाइन मंचों के जरिए दुष्प्रचार और सूचना युद्ध चलाया जाता है।
देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश
इसके बाद साइबर गतिविधियों, विरोध प्रदर्शनों और अन्य माध्यमों से अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जाती है, जबकि पूरी प्रक्रिया में प्राक्सी संगठनों के जरिए प्रत्यक्ष भूमिका से दूरी बनाए रखने का दावा किया गया है। इसमें कुछ भारतीय और विदेशी व्यक्तियों के नाम भी शामिल किए गए हैं, जिनकी भूमिका अलग-अलग स्तर पर इस नेटवर्क से जुड़ी रही है।
भारत के खिलाफ साइबर हमलों, आर्थिक दबाव, दुष्प्रचार, सामाजिक तनाव, चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास, आतंकवादी नेटवर्क को समर्थन व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य भारत के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करना, संस्थाओं पर अविश्वास बढ़ाना और देश के भीतर अस्थिरता का माहौल तैयार करना है।
कैसे काम करता है ये नेटवर्क
- फंडिंग और संसाधन : विदेशी एजेंसियां और संगठन फंडिंग, ग्रांट और संसाधन मुहैया कराते हैं।
- भर्ती और प्रभाव : स्थानीय कार्यकर्ताओं, संगठनों और मीडिया आउटलेट्स को प्रभावित कर साथ जोड़ा जाता है।
- प्रोपेगेंडा और नैरेटिव : इंटरनेट मीडिया, फेक न्यूज, दुष्प्रचार अभियानों के जरिए नैरेटिव गढ़ा जाता है।
- अस्थिरता और व्यवधान: आंदोलन, हिंसा, साइबर हमले और आर्थिक रुकावटों से भारत में अस्थिरता पैदा की जाती है।
- लक्ष्य हासिल करना: भारत को कमजोर, विभाजित और नियंत्रित करना ताकि वैश्विक और सामरिक हित साधे जा सकें।
भारत के खिलाफ काम करने वाले प्रमुख खिलाड़ी
- सीआइए (अमेरिका) : रणनीतिक दखल और खुफिया जानकारी एकत्र करना, शासन पर प्रभाव डालना।
- आइएसआइ (पाकिस्तान) : आतंकवाद को बढ़ावा, घुसपैठ, अलगाववाद और प्राक्सी नेटवर्क का संचालन।
- एमआइ 6 (ब्रिटेन): दुष्प्रचार राजनीतिक हस्तक्षेप और संवेदनशील सूचनाओं की जासूसी।
- एमएसएस (चीन) : सीमा पर दबाव, साइबर हमले, आर्थिक प्रभाव और खुफिया नेटवर्क का विस्तार।
- एमआइटी (तुर्किए) : खुफिया आपरेशन, कोवर्ट नेटवर्क और प्राक्सी समूहों के माध्यम से हस्तक्षेप।
- एसबीय (यूक्रेन) : साइबर युद्ध, हैकिंग और खुफिया सहयोग के जरिए दखल अंदाजी।
भारत को होने वाले नुकसान
- राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा
- आर्थिक अस्थिरता और विकास में बाधा
- सामाजिक एकता और सद्भाव पर हमला
- वैश्विक मंच पर छवि को नुकसान
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना
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