कोचिंग के लाखों की रकम और पेपर लीक का दर्द... कैसे Gen Z के गुस्से ने हिला दी पूरी व्यवस्था?
जेन-जी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को जवाबदेही तय करने वाला कदम बताया, जिससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। ...और पढ़ें

जेन-जी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को जवाबदेही तय करने वाला कदम बताया। फाइल फोटो
HighLights
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जेन-जी ने खुशी जताई।
छात्रों ने इसे जवाबदेही तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
युवाओं का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे का जेन-जी ने खुशी जाहिर करने के साथ ही इसे जवाबदेही तय करने वाला कदम बताया। दिल्ली ही नहीं विभिन्न राज्यों से जंतर-मंतर पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों में शिक्षा प्रणाली को लेकर चिंता दिखाई दी और वह चाहते हैं कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को जवाबदेह बनना होगा और उनमें डर होना चाहिए।

इतना ही नहीं पूरे प्रकरण में किसी राजनीतिक दल का पक्षधर होने के बजाय जेन-जी इसे जवाबदेही के खिलाफ उठाई गई आवाज बताया।

हिमाचल प्रदेश के शिमला से प्रदर्शन में शामिल आए सूरज सिंह ने कहा कि मुझे खुशी है कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन मेरा मानना है कि यह लड़ाई इस्तीफे तक नहीं थी। इसका उद्देश्य डर बैठाना था, ताकि आने वाला व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी और पावर का सही तरीके से इस्तेमाल करे।

यह जीत सिर्फ छात्रों की नहीं है, यह जीत बाबा साहेब आंबेडकर व भगत सिंह की जीत है। उन्होंने कहा कि यह एक उम्मीद की जीत है और अभी भी मौका है कि हम अपनी व्यवस्थाओं को ठीक करें और देश को बेहतर रास्ते की तरफ ले जाएं।

क्लीनिकल साइकोलॉजी की पढ़ाई करने वाली मेगन ने कहा कि 2024 के नीट पेपर लीक से उन्हें भी झटका लगा था। कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सीटें कम होने के कारण लाखों उम्मीदवारों को सीट नहीं मिलती है।
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ऐसे में किसी को वोट देकर चुनने से पहले युवाओं को एक बार सोचना चाहिए ताकि उनका भविष्य एक बेहतर हाथों में रहे अ और हमारा भविष्य अच्छा हो सके।

दिल्ली के आयुष ने कहा कि मुझे खुशी है कि युवा इस शिक्षा व्यवस्था के सामने असहाय हो चुके थे और इसके खिलाफ गुस्सा व्यक्त करने के लिए ही वे यहां आ रहे थे। लेकिन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से उन्हें राहत मिली हैं। निश्चित तौर पर अगर आगे भी युवाओं की आवाज उठाने की बात होगी तो हम जरूर उनके साथ खड़े रहेंगे।
माधव ने कहा कि जो कुछ भी बीते दिनों हुआ वह बेहद दुखी करने वाला था और अब इस्तीफे होने से मैं काफी खुश हूं। हम इस व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहे थे और चाहते हैं कि सरकार जवाबदेह बने और कुछ बदलाव आए।मांगें पूरी होने और प्रदर्शन खत्म होने के एलान के बाद ये भी लोग जंतर-मंतर से वापस लौटने लगे।