मालवीय नगर में आग से मचा हड़कंप, आनन-फानन में अवैध होटल मालिकों ने खाली कराए प्रतिष्ठान
हौजरानी अग्निकांड में 21 मौतों के बाद अवैध होटल कारोबार और प्रशासनिक मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच बढ़ने पर कई होटल मालिकों ने अपने प्रतिष्ठान आ ...और पढ़ें
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हौजरानी अग्निकांड: अवैध होटलों पर कार्रवाई, मालिकों ने आनन-फानन में खाली किए प्रतिष्ठान।
HighLights
हौजरानी अग्निकांड में 21 लोगों की दुखद मौत हुई।
अवैध होटल और रेस्टोरेंट संचालन का खुलासा हुआ।
प्रशासनिक मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
स्वदेश कुमार, नई दिल्ली। हौजरानी के भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद सामने आए तथ्यों ने क्षेत्र में वर्षों से चल रहे अवैध होटल कारोबार और प्रशासनिक मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस क्षेत्र में यह हादसा हुआ, वहां की संकरी गलियों में 50 से अधिक की संख्या में ऐसे होटल संचालित हो रहे थे, जिन्होंने अनुमति तो बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) योजना के तहत ली थी, लेकिन व्यवहार में वे 20-20, 25-25 कमरों के होटलों की तरह संचालित किए जा रहे थे।
यही नहीं इनकी आड़ में ‘स्नैक एंड टी’ लाइसेंस पर 60 से 80 लोगों की क्षमता वाले रेस्टोरेंट का भी संचालन किया जा रहा था। यही कारण रहा कि अग्निकांड के बाद जैसे ही प्रशासनिक जांच का दायरा बढ़ा, क्षेत्र के होटल संचालकों में अफरातफरी मच गई। उन्होंने जांच से बचने को कई प्रतिष्ठानों को खाली करा लिया। कुछ संचालकों ने स्वयं ही अपने होटल और गेस्ट हाउस बंद कर दिए, जबकि कई रेस्तरां का संचालन भी अचानक रोक दिया गया।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि घटनास्थल के आसपास 50 से अधिक ऐसे प्रतिष्ठान थे, जहां लाइसेंस की शर्तों से कहीं अधिक कमरों का संचालन किया जा रहा था। कई जगहों पर 20 से 25 कमरों तक के होटल चल रहे थे, जबकि अनुमति सीमित आवासीय उपयोग की थी। यही नहीं, चाय, काफी और हल्के नाश्ते के लिए प्राप्त लाइसेंस के आधार पर कई स्थानों पर पूर्ण रेस्टोरेंट संचालित किए जा रहे थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से चल रही गतिविधियां पहली बार बड़े पैमाने पर जांच के दायरे में आई हैं। घटना के बाद विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमों ने क्षेत्र में निरीक्षण अभियान शुरू किया। लाइसेंस, भवन उपयोग, अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र और अन्य अनुमतियों की जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं।
सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया
यह पूरा मामला केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। जिन तंग गलियों में दमकल वाहनों की आवाजाही तक चुनौतीपूर्ण है, वहां बड़ी संख्या में लोगों को ठहराने वाले प्रतिष्ठानों का संचालन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि लाइसेंस की शर्तों का इतने बड़े स्तर पर उल्लंघन हो रहा था, तो संबंधित विभागों के निरीक्षण और निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।
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हौज रानी अग्निकांड ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि राजधानी में आवासीय क्षेत्रों में चल रहे होटल, गेस्ट हाउस और रेस्तरां की वास्तविक स्थिति क्या है और नियमों के पालन की जिम्मेदारी कब तय होगी। 21 मौतों के बाद अब जांच की आंच केवल होटल मालिकों तक सीमित न रहे, बल्कि उन संस्थागत खामियों तक भी पहुंचे, जिन्होंने ऐसे कारोबार को फलने-फूलने का अवसर दिया।
सड़क पार करते ही बड़ा अस्पताल, फिर भी बड़ी जनहानि
अक्सर बड़े हादसों में अस्पताल तक घायलों को पहुंचाना भी बड़ी चुनौती होती है। लेकिन हौजरानी में हुए हादसे में मरने वालों को इतना भी समय नहीं मिला कि वे सड़क पार कर सकें। दरअसल घटनास्थल और मैक्स, साकेत की दूरी बड़ सड़क पार करने की है। 1200 से अधिक बेड वाले इस अस्पताल में सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं मौजूद हैं। लेकिन यहां पहुंचे 39 घायलों में 18 की मौत हो चुकी थी। जबकि बाकियों को बचाने की जद्दोजहद जारी है। इनमें 15 आइसीयू में भर्ती किए गए हैं। सात वेंटिलेटर पर हैं।