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    अग्निकांड से सामने आई मेडिकल टूरिज्म की बड़ी खामी, असुरक्षा से विदेशी मरीजों का भरोसा प्रभावित होने की आशंका

    Updated: Thu, 04 Jun 2026 07:17 AM (IST)

    दक्षिण दिल्ली के हौज रानी अग्निकांड ने एनसीआर में मेडिकल टूरिज्म से जुड़ी एक गंभीर समस्या को उजागर किया है। यह घटना मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों ...और पढ़ें

    हौज रानी अग्निकांड ने खोली मेडिकल टूरिज्म की पोल, असुरक्षित आवास से साख पर खतरा। (AI Generated Image)

    हौज रानी अग्निकांड ने खोली मेडिकल टूरिज्म की पोल, असुरक्षित आवास से साख पर खतरा। (AI Generated Image)

    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के हौज रानी क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने भारत विशेषकर एनसीआर की मेडिकल टूरिज्म से जुड़ी लंबे समय से अनदेखी पर बेहद गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। देश-विदेश से इलाज के लिए एनसीआर पहुंचने वाले मरीजों के साथ आने वाले स्वजनों और तीमारदारों के लिए सुरक्षित एवं किफायती आवास तथा भोजन की कमी उन्हें अक्सर अनियमित और असुरक्षित ठिकानों का सहारा लेने के लिए मजबूर करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं एनसीआर की उस छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसके आधार पर यह क्षेत्र देश का सबसे बड़ा मेडिकल टूरिज्म केंद्र बनकर उभरा है।

    6,44,387 लाख विदेशी मरीज चिकित्सा सेवाओं के लिए भारत आए

    केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 6,44,387 लाख विदेशी मरीज चिकित्सा सेवाओं के लिए भारत आए थे। वर्ष 2025 के पहले चार महीनों में ही 1.31 लाख तथा पूरे वर्ष 7,07,244 विदेशी मरीज भारत पहुंचे। भारत का मेडिकल वैल्यू ट्रैवल बाजार वर्तमान में लगभग 8.7 अरब डालर यानी करीब 72 हजार करोड़ रुपये का माना जाता है और आने वाले वर्षों में इसके तेजी से बढ़ने का अनुमान है।

    इस पूरे उद्योग में एनसीआर की हिस्सेदारी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां एम्स, सफदरजंग, आरएमएल जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ अनेक निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बड़ी संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मरीजों का इलाज करते हैं।

    फुटपाथों पर रहने को मजबूर तीमारदारों का दृश्य आम

    यह अलग है कि इतने बड़े उद्योग के लिए चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के समानांतर मरीजों के साथ आने वाले लोगों के लिए आधारभूत व्यवस्थाओं का विकास नहीं हो पाया है। न तो सरकारी और न ही निजी क्षेत्र में। सरकारी अस्पतालों के बाहर फुटपाथों, पार्कों, धर्मशालाओं और किराये के कमरों में रहने को मजबूर तीमारदारों का दृश्य आम है।

    निजी अस्पतालों के आसपास उपलब्ध होटल और गेस्ट हाउस अक्सर महंगे होते हैं, जिसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवार सस्ते और कई बार असुरक्षित विकल्प तलाशते हैं। इन्हीं में एक था हौजरानी का होटल ‘फ्लारिस इन’ जहां 21 जिंदगी असुरक्षित होटल में हुए अग्निकांड की भेंट चढ़ गईं।

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    विदेशी मरीजों के अनुभव और भारत की मेडिकल टूरिज्म साख पर

    टूरिज्म और स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकार व्यवसायी रोहित बजाज का कहना है कि मेडिकल टूरिज्म केवल उपचार तक सीमित नहीं होता, बल्कि मरीज और उसके साथ आए लोगों का संपूर्ण अनुभव उसकी सफलता तय करता है। यदि एनसीआर में तीमारदारों के लिए सुरक्षित आवास, सस्ती भोजन व्यवस्था, विश्राम गृह और सहायता केंद्र विकसित नहीं किए गए और इस तरह की घटनाएं होती रहीं तो इसका असर विदेशी मरीजों के अनुभव और भारत की मेडिकल टूरिज्म साख पर पड़ सकता है।

    हौजरानी की घटना ने संकेत दिया है कि विश्वस्तरीय अस्पतालों के साथ-साथ मरीजों के परिजनों के लिए भी विश्वस्तरीय और सुरक्षित व्यवस्था विकसित करना अब समय की मांग बन गया है।

    2020 से 2024 के बीच देशभर में अस्पतालों में आग की अनेक बड़ी घटनाओं में 117 से अधिक लोगों की जान गई। रिपोर्ट में अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन और जवाबदेही की कमी को प्रमुख कारण बताया गया।

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