IIT दिल्ली-मर्सिडीज करेंगे इंजीनियरिंग सिस्टम से जुड़ी नई तकनीकों पर रिसर्च, न्यू इंजीनियरिंग सिस्टम पर करेंगे काम
आईआईटी दिल्ली और मर्सिडीज-बेंज रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंडिया ने उन्नत प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए पांच वर्षीय संयुक ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश में उन्नत प्रौद्योगिकी के विकास और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आईआईटी दिल्ली और मर्सिडीज-बेंज रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंडिया ने संयुक्त अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण समझौता किया है। दोनों संस्थानों के बीच पांच वर्षीय मुख्य अनुसंधान समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसके तहत भविष्य की गतिशीलता और इंजीनियरिंग सिस्टम से जुड़ी नई तकनीकों पर मिलकर कार्य किया जाएगा।
बौद्धिक संपदा सृजन के अवसर तैयार किए जाएंगे
इस पहल का उद्देश्य उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना तथा नवाचार को नई दिशा देना है।समझौते के अंतर्गत जिन प्रमुख क्षेत्रों में अनुसंधान किया जाएगा उनमें क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत पदार्थ, तंत्रिका प्रेरित अभियांत्रिकी और विद्युत गतिशीलता शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मूलभूत अनुसंधान और व्यावहारिक अभियांत्रिकी को जोड़कर नई तकनीकों के विकास और बौद्धिक संपदा सृजन के अवसर तैयार किए जाएंगे।
अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा
आईआईटी दिल्ली में काॅर्पोरेट संबंध विभाग के अधिष्ठाता प्रीति रंजन पांडा ने कहा कि यह साझेदारी संस्थान की उस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है जिसके तहत उद्योग जगत के साथ ज्ञान के आदान–प्रदान और संयुक्त नवाचार को बढ़ावा दिया जाता है। उनके अनुसार इस सहयोग से उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा और भविष्य के लिए उपयोगी, टिकाऊ तथा किफायती गतिशीलता समाधान विकसित किए जा सकेंगे।
अभियांत्रिकी उत्कृष्टता के 30 वर्ष भी पूरे
वहीं, कंपनी के प्रबंध निदेशक मनु साले ने कहा कि यह वर्ष मोटर वाहन के आविष्कार के 140 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। ऐसे में आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोग भविष्य की तकनीकों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि कंपनी भारत में अभियांत्रिकी उत्कृष्टता के 30 वर्ष भी पूरे कर रही है और यह साझेदारी वास्तविक तकनीकी चुनौतियों के समाधान खोजने में सहायक होगी।
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सहयोग के प्रारंभिक चरण में क्वांटम संवेदक और बैटरी प्रणाली से जुड़े अनुसंधान कार्य शुरू किए जाएंगे। इन परियोजनाओं में आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ता और कंपनी के अभियंता मिलकर नमूना माडल विकसित करेंगे तथा वास्तविक परिस्थितियों में उनका परीक्षण करेंगे।
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