Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    सिम अपग्रेड के नाम पर 100 करोड़ की ठगी, जामताड़ा के दो साइबर ठग गिरफ्तार

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 10:26 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 4G से 5G सिम अपग्रेड के बहाने 100 करोड़ से अधिक की ठगी करने वाले जामताड़ा मॉड्यूल के दो मुख्य साइबर अपराधियों को दुर्गाप ...और पढ़ें

    दो मुख्य साइबर अपराधियों को दुर्गापुर से गिरफ्तार किया है।

    दो मुख्य साइबर अपराधियों को दुर्गापुर से गिरफ्तार किया है।

    HighLights

    1. जामताड़ा मॉड्यूल के दो मुख्य साइबर ठग गिरफ्तार।

    2. 4G से 5G सिम अपग्रेड का झांसा देकर ठगी।

    3. देशभर के 124 लोगों से 100 करोड़ से अधिक ठगे।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फोर जी से फाइव जी में सिमकार्ड अपग्रेड करने के बहाने देशभर के 124 लोगों से 100 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी करने में संलिप्त जामताड़ा माड्यूल के एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट के दो मुख्य आरोपित को गिरफ्तार किया है। इन्हें बंगाल के दुर्गापुर इलाके से गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपित के पास से 44 स्मार्टफोन, दूरसंचार कंपनी की ब्रांडेड टी-शर्ट व कैप बरामद हुई है।

    डीसीपी आदित्य गौतम के मुताबिक गिरफ्तार किए साइबर ठगों में अंकित दास (मुख्य आपरेटर) मूल रूप से जामताड़ा (झारखंड) का रहने वाला है, जो साइबर अपराध का गढ़ माना जाता है। अंकित पहले भी 2021 में फरीदाबाद के साइबर ठगी मामले में गिरफ्तार हुआ था। सुबल दास, अंकित दास का चचेरा भाई है, वह एक साल से भाई के साथ मिलकर पीड़ितों को झांसे में लेने के लिए काल कर रहा था।

    टीम ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर दुर्गापुर से दबोचा

    बीते 24 जून को साइबर सेल क्राइम ब्रांच में दर्ज ई-एफआईआर के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि फर्जी टेलीकाम कर्मचारियों ने ई-सिम कन्वर्ट करने के नाम पर उनसे संपर्क किया और उनके बैंक खातों से 40.90 लाख की अनधिकृत निकासी कर ली। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साइबर सेल के एसीपी स्वागत राजकुमार पाटिल और इंस्पेक्टर संदीप सिंह की टीम ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर इन्हें दुर्गापुर से दबोच लिया।

    ठगी का पैटर्न

    आरोपित वीडियो काल के दौरान पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए टेलीकाम कंपनियों के ब्रांडेड लाल कपड़े (टी-शर्ट और कैप) पहनते थे और रोजाना लगभग 200 लोगों को काल करते थे। वे खुद को टेलीकाम कंपनी का प्रतिनिधि बताकर फोर जी से फाइव जी ई-सिम में मुफ्त अपग्रेड करने का आफर देते थे। जैसे ही पीड़ित ई-सिम की प्रक्रिया के लिए सहमत होते थे आरोपित अपने डिवाइस पर पीड़ित का मोबाइल नंबर एक्टिवेट कर लेते थे।

    खबरें और भी

    नंबर का एक्सेस मिलते ही पीड़ित के बैंक खातों के ओटीपी और आथेंटिकेशन कोड आरोपितों के पास आने लगते थे, जिसके बाद वे पैसे अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। पूछताछ में अंकित दास ने बताया कि ठगी की वारदात को अंजाम देने के बाद वह साक्ष्य मिटाने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन को दामोदर नदी में फेंक देता था।

    मनी ट्रेल का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी

    यह गिरोह दिल्ली, कर्नाटक, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा और तेलंगाना समेत कई राज्यों के लोगों को शिकार बना चुका है। पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों, बैंक खाता मुहैया कराने वाले सहयोगियों और पूरे मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है।

    यह भी पढ़ें- मुन्ना लाल से 22 वर्ष पहले किया था प्रेम विवाह, दो बार पहले भी की थी मारने की कोशिश