Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    छोटे-छोटे राज्यों के गठन की उठी मांग, जंतर-मंतर पर 'फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स' ने दिया धरना

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 08:33 PM (IST)

    फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स ने जंतर-मंतर पर छोटे राज्यों के गठन की मांग को लेकर धरना दिया। वक्ताओं ने विकास, प्रशासनिक सुगमता और क्षेत्रीय संतुलन के लिए ...और पढ़ें

    फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स ने की छोटे राज्यों के गठन की मांग।

    फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स ने की छोटे राज्यों के गठन की मांग।

    HighLights

    1. फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स का जंतर-मंतर पर छोटे राज्यों के लिए धरना।

    2. पृथक बुंदेलखंड, मिथिला, पश्चिम, जनजाति प्रदेशों के गठन की मांग।

    3. छोटे राज्य विकास, प्रशासनिक सुगमता और क्षेत्रीय संतुलन के लिए आवश्यक।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। छोटे राज्यों के गठन को विकास, प्रशासनिक सुगमता और क्षेत्रीय संतुलन के लिए आवश्यक बताते हुए फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स द्वारा रविवार को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। धरने में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के लिए पृथक राज्य के गठन की मांग उठाई।

    बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने पृथक बुंदेलखंड पर जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से जल संकट, बेरोजगारी, पलायन, कृषि संकट और पिछड़ेपन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। बड़े राज्य के एक हिस्से के रूप में उस क्षेत्र की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छोटा राज्य होने से प्रशासन जनता के करीब पहुंचेगा, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और क्षेत्र के विकास के लिए अलग बजट व योजनाएं बनाई जा सकेंगी।

    क्षेत्र की अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान: कमलेश झा

    फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स के महामंत्री कमलेश झा ने मिथिला प्रदेश की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि उस क्षेत्र की अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान है। जिसके विकास के लिए पृथक मिथिला प्रदेश आवश्यक है।

    सुधीर चौधरी ने पश्चिम प्रदेश के गठन पर जोर देते हुए कहा कि आर्थिक क्षमता और जनसंख्या के अनुरूप अलग राज्य बनने से क्षेत्र के विकास की गति तेज हो सकती है। इसी तरह, पंकज पटेल ने पृथक जनजाति प्रदेश की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वक्ताओं ने कहा कि छोटे राज्यों के अनुभव बताते हैं कि सीमित भौगोलिक क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच, योजनाओं की निगरानी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।

    यह भी पढ़ें- खेड़कीदौला टोल के पास हाईवे सर्विस लेन पर गड्ढे बने मुसीबत, स्थायी समाधान की मांग

    खबरें और भी