केवल आक्रोश नहीं, रचनात्मकता से मिली जीत... जंतर-मंतर पर Gen-Z ने विरोध को दिया नया रूप
जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में प्रतिभागियों ने फैशन को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया, जिसमें पारंपरिक और आधुनिक शैलियों का अनूठा संगम दिखा। प्रदर्शन ...और पढ़ें

जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में प्रतिभागियों ने फैशन को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया
HighLights
फैशन बना विरोध प्रदर्शन में अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम।
पारंपरिक और आधुनिक पहनावे का अनूठा मिश्रण दिखा।
पुलिस कार्रवाई से बचाव के लिए रचनात्मक उपाय अपनाए गए।
शशि ठाकुर, नई दिल्ली। जीत के किरदार में भूमिका केवल गुस्से, हिंसा और आवेग की नहीं होती। उसमें उल्लास, रंग और खूबसूरत भी किरदार निभाते हैं। बात जेन- जी की जो मस्त, अल्हड़ और अपने भविष्य के लिए गंभीर भी थी। ये सारे किरदार जंतर मंतर पर भी मिले, जिन्होंने धरना प्रदर्शन और आंदोलन को जीत में बदला।

यह प्रदर्शन नारों, आक्रोश और आत्मीयता के साथ फैशन के जरिए अभिव्यक्ति का मंच भी बन गया। जहां एक तरफ महात्मा गांधी और डा. बीआर आंबेडकर जैसी महान शख्सियतों की सादगी और विचारों के प्रति गहरा सम्मान झलका। दूसरी ओर स्पाइडर- मैन, डोरेमोन और बैटमैन जैसे लोकप्रिय कार्टून व सुपरहीरो सहित आधुनिक मास्क के प्रति जेन-जी का आकर्षण भी दिखा। फैशन नहीं, अभिव्यक्ति कहिए जनाब, जहां शख्सियतों के प्रति आदर भाव तो कार्टून कैरेक्टर का अल्हड़पन।

इस अतरंगी माहौल में विविधता तब और बढ़ जाती है। जब लड़कियां दुल्हन के पूरे लाल जोड़े और जरीदार लहंगे में सज-धजकर हाथ में कुच्चू पुच्चू , अब तो इस्तीफा दे दो का पोस्टर जंतर- मंतर पर लहराती है। तो कोई भारतीय क्रिकेटर की जर्सी पहनकर और मैसी का टी शर्ट पहनकर फुटबाल की मस्ती बिखेरता है।

पहनावे से शख्सियत झलकती है तो जंतर मंतर से लेकर संसद मार्ग और टालस्टाय रोड भारतीय संस्कृति और आधुनिकता की एक खूबसूरत जुगलबंदी ओढ़े मिली। पारंपरिक साड़ियां, सुरुचिपूर्ण धोती और कानों में खनकते भारी- भरकम झुमके भारतीय विरासत को दर्शा रहे थे, वहीं युवा पीढ़ी अपने बोल्ड वेस्टर्न आउटफिट्स और ट्रेंडी ड्रेसेस के साथ विरोध दर्ज करा रही थी।
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उसमें भी पुलिस वालों के साथ दोस्ताना वीडियोज खूब ट्रेंड किए। सबसे ज्यादा ध्यान खींचा प्रदर्शनकारियों का पुलिसिया कार्रवाई से निपटने का रचनात्मक और सुरक्षात्मक अंदाज। पुलिस प्रशासन द्वारा दागे जाने वाले आंसू गैस के तीखे गोलों और लाठियों के वार से अपना बचाव करने के लिए लोगों ने 'सुरक्षा' और 'फैशन' का एक बिल्कुल अनोखा और व्यावहारिक फार्मूला तलाश लिया था।
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चेहरे पर आंसू गैस के जहरीले धुएं से आंखों को सुरक्षित रखने के लिए लोगों ने स्विमिंग गागल्स और विशेष तरह के मास्क पहन रखे थे, जो उनके लुक को और भी अनोखा बना रहे थे।

वहीं दूसरी तरफ लाठीचार्ज के संभावित प्रभाव को बेअसर करने के लिए प्रदर्शनकारी अपने सामान्य कपड़ों के अंदर मोटी पैडिंग, सुरक्षात्मक गद्दे और भारी- भरकम जैकेट्स पहनकर पहुंचे थे।
सिर पर गीले कपड़े लपेटकर और बचाव के अनोखे इंतजामों के साथ उतरे इन प्रदर्शनकारियों ने इस पूरे विरोध को सुरक्षा, व्यंग्य, जन-आक्रोश और अतरंगी फैशन की चर्चा अब चारों तरफ हो रही है। कुल मिलाकर यह विरोध का अंदाज अपने फैशन के अनूठेपन के लिए भी याद किया जाएगा।