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अल फलाह यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के चेयरमैन जवाद सिद्दीकी को 7 दिन की कस्टडी पैरोल, बीमार पत्नी का कराएंगे इलाज

Published: Fri, 06 Nov 2026 02:11 PM (IST)

दिल्ली हाईकोर्ट ने अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को उनकी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए ...और पढ़ें

अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को राहत

अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को राहत

HighLights

  1. जवाद सिद्दीकी को पत्नी की बीमारी के लिए पैरोल मिली।

  2. दिल्ली हाईकोर्ट ने सात दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर की।

  3. सिद्दीकी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी मामलों में आरोपी हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को उनकी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए सात दिन की कस्टडी पैरोल दी है। जवाद पर मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामले चल रहे हैं।

क्या होती कस्टडी पैरोल?

जस्टिस मिनी पुष्करणा ने सिद्दीकी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। सिद्दीकी ने चिकित्सा और मानवीय आधार पर एक सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत या कस्टडी पैरोल मांगी थी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर की मरीज हैं और उन्हें 10 नवंबर को कीमोथेरेपी का अगला इलाज कराना है। बता दें कि कस्टडी पैरोल में कैदी को सशस्त्र पुलिस के साथ विजिट के स्थान पर ले जाया जाता है।

ईडी के वकील ने दी तगड़ी दलील

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने सिद्दीकी की अंतरिम रिहाई का जोरदार विरोध किया। उन्होंने कहा कि उन पर लगे आरोप गंभीर हैं। अधिवक्ता ने कहा कि आरोपित के फरार होने का जोखिम है और उनके आपराधिक इतिहास में नवंबर 2025 के लाल किला कार ब्लास्ट मामले में उनकी संलिप्तता भी शामिल है।

पहले नकारी जा चुकी है जमानत की याचिका

दलील में कहा गया कि कस्टडी पैरोल सख्त शर्तों के साथ दी जानी चाहिए, जैसे कि वे मेडिकल विजिट के अलावा अपने निवास पर ही रहेंगे। किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे। साथ ही, हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी नहीं जाएंगे। बता दें कि जुलाई में हाई कोर्ट ने सिद्दीकी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था और उन्हें तीन तारीखों पर कस्टडी पैरोल पर अपनी पत्नी से मिलने की अनुमति दी थी।

क्या है अल फलाह में आतंकी का पूरा मामला?

सिद्दीकी को दो मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में गिरफ्तार किया गया है। एक मामला विश्वविद्यालय के छात्रों से ली गई फीस से अवैध धन कमाने के आरोप से जुड़ा है। उन्हें 18 नवंबर, 2025 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था।

ईडी की जांच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो एफआईआर से शुरू हुई, जिसमें आरोप है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए झूठा नैक एक्रेडिटेशन और यूजीसी मान्यता का दावा किया था।

ईडी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये कमाये और छात्रों से एकत्रित धन को व्यक्तिगत उपयोग के लिए डायवर्ट किया गया।

लाल किला के पास आत्मघाती हमले में आया था नाम

इसके बाद सिद्दीकी को दिल्ली में 45 करोड़ रुपये की जमीन के 'धोखाधड़ीपूर्ण' अधिग्रहण से जुड़े एक नए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने दोबारा गिरफ्तार किया। गौरतलब है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी एक 'सफेदपोश आतंक' जांच के दायरे में आई थी, जिसमें इससे जुड़े दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक अन्य उमर-उन-नबी को 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के बाहर हुए ब्लास्ट में आत्मघाती हमलावर के रूप में पहचाना गया था। इस आतंकी हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी।

(पीटीआई के इनपुट के साथ)

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