विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अल फलाह ट्रस्ट के चेयरमैन को साकेत कोर्ट से झटका, जवाद अहमद सिद्दीकी की दोनों अर्जियां खारिज

Published: Wed, 05 Aug 2026 11:49 PM (IST)

साकेत कोर्ट ने अल फलाह ट्रस्ट के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की दो अर्जियां खारिज कर दीं, जिसमें उन्होंने दस्तावेज ...और पढ़ें

जवाद अहमद सिद्दीकी की दोनों याचिकाएं खारिज। फोटो: आर्काइव

जवाद अहमद सिद्दीकी की दोनों याचिकाएं खारिज। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. साकेत कोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी की दो अर्जियां खारिज कीं

  2. संज्ञान लेने के चरण में केवल शिकायतकर्ता की सामग्री पर विचार

  3. सिद्दीकी दो अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी द्वारा गिरफ्तार

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। साकेत कोर्ट ने अल फलाह ट्रस्ट के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की ओर से कुछ दस्तावेज दाखिल करने के लिए दी गई दो अर्जियों को खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने कहा कि प्री-कॉग्निजेंस स्टेज (मामले का संज्ञान लेने के चरण) में केवल शिकायतकर्ता द्वारा पेश की गई सामग्री पर विचार करना होता है, न कि आरोपित द्वारा पेश की गई सामग्री पर।

सिद्दीकी का दावा था कि इन दस्तावेजों से ईडी के मामले में विरोधाभास सामने आएंगे। उनकी दूसरी अर्जी में ईडी को उन दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई, जिन पर वह अभियोजन पक्ष की शिकायत पर भरोसा नहीं कर रहा था।

दोनों अर्जी खारिज करते हुए अपने चार अगस्त के आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने कहा कि यह स्थापित कानून है कि संज्ञान लेने के चरण में अदालत को केवल शिकायतकर्ता (इस मामले में अभियोजन पक्ष की शिकायत) की ओर से पेश की गई सामग्री पर ही विचार करना होता है।

इसका सीमित उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि क्या प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता है या नहीं।

संज्ञान से पहले बचाव पक्ष की दलील नहीं मानी

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि बीएनएसएस के तहत संज्ञान लेने से पहले अनिवार्य सुनवाई के दौरान आरोपित को अदालत के समक्ष स्वतंत्र सामग्री पेश करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

उन्होंने उन दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराने की भी मांग की जिन पर भरोसा नहीं किया गया था और अनुरोध किया कि इस कानूनी मुद्दे को उच्च न्यायालय भेजा जाए।

हालांकि, अदालत ने कहा कि जिन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया गया है, उन्हें उपलब्ध कराने का सवाल पहले ही तय किया जा चुका है और यह सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के दायरे में आता है।

अदालत ने नई अर्जी को बिना किसी आधार वाला और सुनवाई योग्य नहीं माना। अर्जियों का विरोध करते हुए ईडी ने कहा कि इन अर्जियों का मकसद कार्यवाही में देरी करना था और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

दो मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में हुई थी गिरफ्तारी

जवाद अहमद सिद्दीकी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया था। पहले मामले में उसे 18 नवंबर 2025 को फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के छात्रों से ली गई फीस से हुई कमाई की कथित मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। ईडी की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की दो एफआइआर पर आधारित है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए गलत तरीके से नैक एक्रेडिटेशन और यूजीसी मान्यता का दावा किया था।

ईडी के मुताबिक यूनिवर्सिटी ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये कमाए और छात्रों से ली गई फीस का पैसा निजी इस्तेमाल के लिए दूसरी जगह लगा दिया।

वहीं इसके बाद ईडी ने मदनपुर खादर गांव में 1.14 एकड़ जमीन को धोखाधड़ी से हासिल करने के आरोप में एक और मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सिद्दीकी को गिरफ्तार किया। जमीन की कीमत करीब 45 करोड़ रुपये थी, जबकि दस्तावेजों में इसकी खरीद कीमत महज 75 लाख रुपये दिखाई गई।

यह भी पढ़ें- RML अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को नहीं मिली Fire NOC, दिल्ली HC का CPWD को कमियां दूर करने के आदेश

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।