विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

RML अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को नहीं मिली Fire NOC, दिल्ली HC का CPWD को कमियां दूर करने के आदेश

Published: Wed, 05 Aug 2026 11:38 PM (GMT+05:30)

राष्ट्रीय राजधानी के आरएमएल अस्पताल का सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र न मिलने के कारण अब तक शुरू नहीं ...और पढ़ें

दिल्ली के आरएमएल अस्पताल को नहीं मिली फायर एनओसी। फोटो: आर्काइव

दिल्ली के आरएमएल अस्पताल को नहीं मिली फायर एनओसी। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. आरएमएल सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक फायर एनओसी के बिना बंद

  2. दिल्ली अग्निशमन सेवा ने 20 कमियां बताईं, नहीं सुधरीं

  3. हाई कोर्ट ने सीपी डब्ल्यू डी को तत्काल सुधारने का आदेश दिया

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख केंद्रीय अस्पताल आरएमएल अस्पताल का सुपर स्पेशियलिटी ब्लाॅक फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण अब तक शुरू नहीं हो सका है।

दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के निरीक्षण में मिली 20 कमियां अब तक दूर नहीं होने से विभाग दो बार फायर एनओसी देने से इनकार कर चुका है। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को निर्देश दिया है कि अग्निशमन विभाग की ओर से बताई गई कमियों को तत्काल दूर किया जाए।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी सुविधा का निर्माण और उसका शीघ्र संचालन जनहित का विषय है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।

आदेश मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ सोशल ज्यूरिस्ट की जनहित याचिका पर दिया। अदालत ने सीपीडब्ल्यूडी के मुख्य वास्तुकार को मामले में पक्षकार बनाया। कहा कि यह मामला अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी सुविधा के निर्माण से जुड़ा है और इसका जल्द पूरा होना सार्वजनिक हित में है।

दो बार निरीक्षण के बाद भी नहीं दूर हुईं 20 कमियां

इस मामले में दिल्ली अग्निशमन सेवा ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक के लिए फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र का आवेदन निरीक्षण के बाद नौ मार्च 2026 को खारिज कर दिया गया था, क्योंकि जांच में 20 कमियां मिली थीं।

इसके बाद चार जुलाई 2026 को दोबारा निरीक्षण किया गया, लेकिन पहले बताई गई कमियों में कोई सुधार नहीं मिला। इसके चलते 22 जुलाई 2026 को आवेदन दूसरी बार भी खारिज कर दिया गया।

हाई कोर्ट ने मांगी सात सितंबर तक स्थिति रिपोर्ट

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट मिलते ही सभी शेष कमियों को तत्काल दूर किया जाए। निर्माण पूरा करने अथवा फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र जारी करने में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।

इस मामले में आरएमएल अस्पताल से जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने अदालत को बताया कि फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र को छोड़कर परियोजना से संबंधित सभी अन्य वैधानिक मंजूरियां पूरी की जा चुकी हैं। अदालत ने अस्पताल और सीपीडब्ल्यूडी को सात सितंबर 2026 तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पहले भी ट्रामा सेंटर को नहीं मिली थी फायर एनओसी

आरएमएल अस्पताल में फायर सुरक्षा को लेकर यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में अस्पताल के ट्रामा सेंटर को भी दिल्ली अग्निशमन सेवा ने फायर एनओसी देने से इनकार कर दिया था।

अस्पताल को आटोमैटिक स्प्रिंकलर प्रणाली के काम नहीं करने, कई स्थानों पर स्प्रिंकलर नहीं होने, स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम बंद मिलने, फायर पंप के आटो मोड में काम नहीं करने, कई यार्ड हाइड्रेंट के क्षतिग्रस्त होने, होज रील और होज पाइप में कमियां, फायर चेक डोर का अभाव, लिफ्ट शाफ्ट और सीढ़ियों के प्रेसराइजेशन सिस्टम में कमी, फायर फाइटिंग के लिए पर्याप्त जल भंडारण नहीं होने तथा स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण जैसी गंभीर खामियां को चलते फायर एनओसी नहीं दी गई।

अब एक बार फिर सुपर स्पेशियलिटी ब्लाॅक में कमियां मिलने और दो बार आवेदन खारिज होने से आरएमएल अस्पताल की फायर सुरक्षा व्यवस्था एक बार सवालों के घेरे में है।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में बेघरों को जल्द मिलेगा पक्का मकान, द्वारका में EWS के 2700 फ्लैटों का अलॉटमेंट करने की तैयारी

यह भी पढ़ें- मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, मानसून सत्र में खत्म होगा ब्रेड एंड ब्रेकफस्ट कानून

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।