जमीन के बदले नौकरी घोटाला: मीसा-हेमा ने खुद को बताया निर्दोष, लालू परिवार को मिली सशर्त राहत
जमीन के बदले नौकरी घोटाले मामले में राउज़ एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। लालू प्रसाद यादव की बेटियों, मीसा भारती और हेमा यादव ने खुद को निर्दोष बताया। ...और पढ़ें

राउज एवेन्यू कोर्ट में जमीन के बदले नौकरी घोटाले की सुनवाई हुई। फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जमीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में राउज़ एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई हुई। RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटियों, मीसा भारती और हेमा यादव ने अदालत के सामने खुद को निर्दोष बताया।
दोनों अदालत में पेश हुईं, अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और ट्रायल का सामना करने की इच्छा जताई। इस दौरान, लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए अदालत में पेश हुए और व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी।
अदालत ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को उनकी ज्यादा उम्र के आधार पर और तेजस्वी यादव को मेडिकल कारणों से उस दिन के लिए राहत दी।
हालांकि, विशेष CBI अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच किसी भी तारीख को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और कम से कम एक दिन पहले अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी साफ किया कि जमीन के बदले नौकरी घोटाले मामले में ट्रायल 9 मार्च से शुरू होगा।
इस महीने की शुरुआत में, विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए थे। अपने आदेश में, अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और आरोपियों को ट्रायल का सामना करना होगा।
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आरोप तय करते समय, अदालत ने कड़ी टिप्पणियां करते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्य एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे और यह एक बड़ी साज़िश का हिस्सा था जिसमें भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया था।
अदालत के अनुसार, CBI चार्जशीट से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि लालू प्रसाद यादव के करीबी लोगों ने रेलवे में नौकरियों के बदले देश के अलग-अलग हिस्सों में जमीन हासिल करने में भूमिका निभाई थी।
इस मामले में 98 जीवित आरोपियों में से 46 के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, जिनमें लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं, जबकि 52 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। पांच आरोपियों की मौत के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी गई है। यह मामला 2004 से 2009 के बीच हुए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे।
CBI के अनुसार, रेलवे में नौकरियों के बदले लालू के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी एक कंपनी के नाम पर ज़मीन हासिल की गई थी। कथित तौर पर इनमें से कई प्रॉपर्टी मार्केट वैल्यू से कम रेट पर और कैश ट्रांजैक्शन के ज़रिए खरीदी गई थीं। इसके बदले में, कथित तौर पर अलग-अलग रेलवे जोन में नौकरियां दी गईं।