मालवीय नगर होटल अग्निकांड: अवैध रेस्टोरेंट पर दिल्ली पुलिस, एमसीडी और अग्निश्मन विभाग मूंदे रहे आंख
मालवीय नगर में एक अवैध पांच मंजिला होटल में आग लगने की घटना भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। ...और पढ़ें

अवैध रेस्टोरेंट पर दिल्ली पुलिस, एमसीडी और अग्निश्मन विभाग की लापरवाही।
HighLights
छह कमरों के लाइसेंस पर 25 कमरे संचालित।
अवैध निर्माण और बेसमेंट में किचन का संचालन।
दिल्ली पुलिस, एमसीडी, अग्निशमन विभाग जिम्मेदार।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मालवीय नगर में होटल अग्निकांड भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है। यहां सब कुछ अवैध था। मालिक के पास बी एंड बी (बेड एंड ब्रेकफास्ट) का लाइसेंस था। नियमों के तहत इसमें केवल छह कमरे संचालित हो सकते थे, लेकिन अवैध रूप से 25 कमरों वाला पांच मंजिला होटल चल रहा था। होटल के भूतल पर किचन था और रेस्तरां भी संचालित हो रहा था। बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों की भी यहां आवाजाही रहती थी।
हैरत की बात है कि इतना सब हो रहा था, लेकिन एमसीडी और दूसरी एजेंसियों को पता भी नहीं चला? ऐसे में इस हादसे के लिए सीधे तौर पर दिल्ली पुलिस, एमसीडी और अग्निश्मन विभाग जिम्मेदार है।
बताया जा रहा है कि जहां अवैध होटल बना है, वह लाल डोरा की जमीन है। यानि पूर्व में यह गांव की आबादी थी। बाद में शहरीकरण के साथ यहां मकान बन गए। वहां पर भी केवल एक मंजिल इमारत बनाने की अनुमति होती है, लेकिन पूरे इलाके में पांच से छह मंजिला इमारतें खड़ी हैं।
पब्लिक हेल्थ इंस्पेक्टर निगरानी न करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार
हादसे के लिए कौन-कौन से विभाग जिम्मेदारबिना लाइसेंस के व्यावसायिक गतिविधि चल रही थी। ऐसे में एमसीडी का जनस्वास्थ्य विभाग का स्थानीय पब्लिक हेल्थ इंस्पेक्टर निगरानी न करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है।
दूसरा, छह मंजिला इमारत में होटल और रेस्तरां संचालित होने के बावजूद उसमें आग से बचाव के इंतजाम नहीं थे, ऐसे में दिल्ली अग्निशमन विभाग भी इस घटना के लिए दोषी है। होटल में विदेशी नागरिक ठहरते थे। इसकी तस्दीक नहीं की गई, इसके लिए दिल्ली पुलिस भी सीधे तौर पर हादसे के लिए जिम्मेदार है।
जानें...क्या-क्या उल्लंघन बना जानलेवा
- बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम के तहत मालिक ने पर्यटन विभाग से मंजूरी ली थी, लेकिन यह मंजूरी केवल छह कमरों के लिए होती है। साथ ही संपत्ति मालिक का भी मकान में रहना जरूरी है, लेकिन जैसे ही सात कमरे बनाते हैं इसकी मंजूरी स्वत: खत्म हो जाती है।
- बेसमेंट में कमरे बनाना पूरी तरह से एमसीडी के भवन उपनियमों का उल्लंघन है। बेसमेंट में कोई भी ऐसी गतिविधि नहीं चल सकती है, लेकिन यहां बेसमेंट में किचन और कमरे बनाकर काम किया जा रहा था। नियमों के तहत बेसमेंट में केवल डाक्टर को क्लीनिक, वकील को आफिस समेत कुछ पेशेवर के साथ स्टोरेज आदि दफ्तर खोलने की इजाजत ही है।
- इमारत में होटल और किचन चल रहा था तो किचन का प्रवेश और निकास एक चौड़ी सड़क की ओर अलग होना चाहिए, लेकिन यहां प्रवेश और निकास एक ही था।
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