दिल्ली में पिंक कार्ड के लिए इतनी जद्दोजहद, लंबी कतार और घंटों इंतजार; प्रक्रिया ऑनलाइन न करने पर सवाल
मंगोलपुरी टर्मिनल पर पिंक कार्ड बनवाने के लिए महिलाओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। मुफ्त ...और पढ़ें

मंगोलपुरी टर्मिनल पर पिंक कार्ड बनवाने के लिए कतार में लगीं महिलाएं। जागरण
HighLights
महिलाएं घंटों लंबी कतारों में खड़ी होकर इंतजार कर रही हैं
बैठने की उचित व्यवस्था न होने से जमीन पर बैठना पड़ता है
ऑनलाइन पिंक कार्ड सुविधा की मांग कर रही हैं परेशान महिलाएं
जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। मंगोलपुरी में पिंक कार्ड बनवाने के लिए मारामारी का माहौल देखने को मिल रहा है। मुफ्त बस सेवा का लाभ उठाने के लिए शनिवार को बड़ी संख्या में महिलाएं मंगोलपुरी टर्मिनल पहुंचीं।
महिलाएं अपना कामकाज छोड़कर पिंक कार्ड बनवाने के लिए केंद्र पर पहुंचीं। इसके बावजूद उन्हें घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ा, जिसकी वजह से महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 100 महिलाएं कतार में खड़ी अपनी बारी का इंतजार करती दिखीं, जबकि 20-30 महिलाएं परेशान होकर जमीन पर ही बैठ गईं।
सुल्तानपुरी, मंगोलपुरी, रोहिणी, बादली सहित कई क्षेत्रों से महिलाएं मंगोलपुरी टर्मिनल केंद्र पर तो पहुंचीं, लेकिन काफी महिलाओं को पिंक कार्ड बनवाने के लिए टोकन ही नहीं मिल पाया। ऐसे में महिलाएं निराश होकर अपने घर वापस लौट गईं। महिलाओं के बैठने के लिए वहां केवल पांच-छह कुर्सियां ही उपलब्ध थीं।

सुबह सात बजे से ही आने लगती हैं महिलाएं
कामकाजी महिलाएं अवकाश लेकर पिंक कार्ड बनवाने के लिए सुबह सात से आठ बजे के बीच ही केंद्र पर पहुंचने लगती हैं। भीड़ इतनी अधिक होती है कि काफी महिलाओं को बिना पिंक कार्ड बनवाए ही वापस लौटना पड़ता है। इस बीच सर्वर डाउन होने और कर्मचारियों के लंच ब्रेक के कारण कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी बाधित रहती है।
अर्चना ने बताया कि वह बादली से अपनी बेटी का पिंक कार्ड बनवाने आई हैं और उन्हें लाइन में खड़े हुए एक घंटे से अधिक समय हो चुका है। उनके आगे 30-40 महिलाएं हैं। उन्हें लगता है कि लगभग दो घंटे बाद ही उनका नंबर आएगा।
मैं अपनी बहन का पिंक कार्ड बनवाने के लिए सुबह नौ बजे यहां लाइन में लगी थी। अब दोपहर के डेढ़ बज गए हैं, लेकिन पिंक कार्ड नहीं बन पाया है। कई घंटे बाद यहां नंबर आता है।
- सीमा, रोहिणी सेक्टर-3
मैं द्वारका में नौकरी करती हूं। आज छुट्टी लेकर यहां पिंक कार्ड बनवाने आई थी। यहां भीड़ इतनी है कि मेरा नंबर आना मुश्किल लग रहा है। शायद मुझे कल भी छुट्टी लेकर यहां आना पड़े।
- जागृति, सुल्तानपुरी
मैं रोज धौला कुआं नौकरी करने जाती हूं। मुझे यहां आए दो घंटे से अधिक समय हो चुका है। यहां बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए मजबूरी में जमीन पर बैठी हूं, क्योंकि मैं ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रह सकती।
- प्रवीन, सुल्तानपुरी
यहां रोजाना केवल 150 पिंक कार्ड ही बनाए जाते हैं, जबकि बाकी महिलाओं को वापस घर लौटना पड़ता है। अगर पिंक कार्ड बनवाने की सुविधा ऑनलाइन होती, तो हमें इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।
- सरिता, मंगोलपुरी
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