दिल्ली: 5 बहनों के इकलौते भाई की मौत से पूरे गांव में छाया मातम, PF का पैसा निकालने बैंक गए थे मनीष
बैंक गार्ड की बंदूक से निकली गोली से मनीष की मौत से ईसापुर गांव में दुख व्याप्त है। वह छह भाई-बहनों में इकलौता भाई था और अपने बुजुर्ग माता-पिता का सहा ...और पढ़ें
-1785403150494_m.webp)
मनीष का फाइल फोटो।
HighLights
बैंक गार्ड की बंदूक से निकली गोली से मनीष की मौत।
मनीष छह भाई-बहनों में इकलौता भाई था, परिवार में शोक।
ईपीएफ का पैसा निकलवाने बैंक गया था, हादसा हुआ।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली में बैंक गार्ड की बंदूक से निकली गोली से जान गंवाने वाले मनीष की मौत से पूरे इसापुर गांव में मातम पसरा है। ग्रामीणों का कहना है कि मनीष छह बहनों में इकलौता और सबसे छोटा भाई था।
परिवार में एक बेटा हो, इसके लिए माता-पिता ने तो प्रार्थना की ही थी, बहनों ने भी भगवान से प्रार्थना की थी, एक भाई हो, जिसकी कलाई पर वे रक्षा बंधन के दिन स्नेह का धागा बांध सकें। लेकिन अब सबकुछ खत्म हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि मनीष की असमय हुई मौत सिर्फ मनीष के परिवार का नहीं बल्कि पूरे गांव का दुख है।
ईपीएफ का पैसा निकलवाने की कर थे कोशिश
मनीष के मित्र विक्की ने बताया कि मनीष दिल्ली मेट्रो में टोकन ऑपरेटर का काम संविदा पर करते थे। करीब पांच महीने पहले उनकी नौकरी छूट गई थी। नौकरी के दौरान जो पैसा ईपीएफ में जमा हुआ था, वे उसे निकालना चाहते थे। इसी सिलसिले में अपने घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित बैंक की शाखा में गए थे। वहां उन्हें पता चला कि जो नाम ईपीएफ में दर्ज है, वह कागजात से मेल नहीं खा रहा है।
उन्हें वहां किसी ने इस भूल के सुधार के लिए एक फार्म भरने के लिए कहा, जिसे वे किनारे में भर रहे थे। इसी दौरान बैंक गार्ड जो बंदूक में गोली लोड कर रहा था, उससे गोली चली जो मनीष के कमर में लगी। वहां अफरा-तफरी मच गई, इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
खबरें और भी
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि बैंक का गार्ड यहां कुछ ही दिन पहले आया था। इस पूरे प्रकरण में गार्ड की जो भी गलती हो, बैंक कर्मियों की भी गलती सामने आनी चाहिए। आखिर गार्ड ने बैंक के हाल में जहां लोग थे, बैंककर्मी भी थे, वहां बंदूक में गोली भरने का काम क्यों किया? यह काम तो किसी बंद कमरे या ऐसी जगह होना चाहिए, जहां किसी की आवाजाही नहीं होती हो। आखिर इसकी अनदेखी क्यों हुई?
यह भी पढ़ें- दिल्ली: बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की बंदूक से चली गोली, आधार कार्ड अपडेट कराने आए युवक की मौत
बुजुर्ग माता-पिता का नहीं रहा सहारा
मनीष के पिता डीटीसी में असिस्टेंट फोरमैन के पद से वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त हुए थे। इनकी छह संतानों में पांचों बेटियों की शादी हो चुकी है। केवल मनीष ही अविवाहित थे। ग्रामीणों का कहना है कि बुजुर्ग माता- पिता का इकलौता सहारा अब नहीं रहा।