क्या अब सुरक्षित रहेंगी दिल्ली की पुरानी हवेलियां? अवैध निर्माण रोकने के लिए एमसीडी ला रहा है नया प्लान
एमसीडी दिल्ली की पुरानी संरक्षित इमारतों और हवेलियों की जियो-टैगिंग प्रक्रिया शुरू करेगी। इसका उद्देश्य अवैध निर्माण रोकना, संरक्षण सुनिश्चित करना और ...और पढ़ें

एमसीडी दिल्ली की पुरानी संरक्षित इमारतों और हवेलियों की जियो-टैगिंग प्रक्रिया शुरू करेगी। इमेज एआई
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पुरानी संरक्षित इमारतों और हवेलियों को संरक्षित करने के लिए एमसीडी इसकी जीओ टैंगिग की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके लिए एमसीडी जल्द ही इसके लिए सलाहकार की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करेगा।
इसका उद्देश्य एमसीडी की हेरिटेज इमारतों का संरक्षण करने के साथ ही इसका दुरुपयोग रोकना है। क्योंकि समय के साथ दिल्ली में बड़े जमीन की कीमतों के बाद यह देखने में आ रहा है कि लोग इन इमारतों में भी नक्शा पास कराकर निर्माण कर रहे हैं। जो कि नियमों के विपरित है।
एमसीडी के हेरिटेज सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमारे पास शिकायतें मिली कि पुरानी दिल्ली समेत कुछ इलाकों में एमसीडी द्वारा घोषित संरक्षित इमारतों में निर्माण नक्शा पास कराकर हुए लेकिन यह इसलिए नहीं पकड़ में आया क्योंकि नक्शा पास कराने के लिए पोर्टल में इन संपत्तियों की जानकारी नहीं थी।
हालांकि संपत्तियों के मालिक ने गलत हलफनामा देकर ऐसा किया। इसलिए इसको भविष्य में दोहराव रोकने के लिए हम एसमीडी द्वारा संरक्षित घोषित इमारतों की जीओ टैंगिग करने जा रहा है। प्रत्येक संपत्ति के पते के साथ उसकी लोकेशन और महत्वपूर्ण जानकारियां होगी।
इस जानकारी के साथ ही इमारतों पर भी बोर्ड लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस जीओ टैंगिग की जानकारी को एमसीडी अपने नक्शे पास कराने के पोर्टल में भी डालेगी। इससे कोई भी व्यक्ति उस पते और लोकेशन पर नक्शा पास नहीं करा पाएगा। क्योंकि जैसे ही उपरोक्त पता डलेगा वैसे ही सिस्टम में संरक्षित इमारत होने की जानकारी आ जाएगी।
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अधिकारी ने आगे बताया कि भविष्य में इसका उपयोग उन नागरिकों की मदद के लिए भी किया जाएगा जो हेरिटेज संपत्तियों की पर्यटन के तौर पर सैर करना चाहते हैं। क्योंकि इन इमारतों की लोकेशन और जानकारी एमसीडी अपनी वेबसाइट पर भी डाल देगा। अधिकारी ने बताया कि निगम द्वारा घोषित 1300 से अधिक संरक्षित इमारतें हैं। जिसमें हवेलियां और पुरानी इमारतें हैं।