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    दिल्ली-यूपी समेत 4 राज्यों को जोड़ेगा ऑर्बिटल रेल नेटवर्क, 25 शहरों को मिलेगी हाई स्पीड ट्रेन कनेक्टिविटी

    Updated: Wed, 24 Jun 2026 05:37 PM (IST)

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मास्टर प्लान-2041 के तहत दिल्ली, यूपी, हरियाणा और राजस्थान के 25 शहरों को जोड़ने वाला हाई-स्पीड ऑर्बिटल रेल नेटवर्क बनेग ...और पढ़ें

    दिल्ली के चारों ओर एक रिंग बनाएगा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर। फोटो: एआई जनरेटेड

    दिल्ली के चारों ओर एक रिंग बनाएगा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर। फोटो: एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. एनसीआर में 25 शहरों को जोड़ेगा ऑर्बिटल रेल नेटवर्क

    2. दिल्ली-NCR पर आबादी, यातायात का दबाव कम होगा

    3. तीन चरणों में विकास, पहला चरण 2029 तक पूरा होने का लक्ष्य

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए तैयार हो रहे मास्टर प्लान-2041 के तहत दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के करीब 25 शहरों को जोड़ने वाला विशाल ऑर्बिटल रेल नेटवर्क विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

    इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली और आसपास के बड़े शहरों पर बढ़ते आबादी और यातायात के दबाव को कम करना तथा एनसीआर के छोटे शहरों को भी हाईस्पीड परिवहन सुविधा से जोड़ना है।

    अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में एनसीआर के 24 जिलों की आबादी वर्तमान 7.5 करोड़ से बढ़कर लगभग 15 करोड़ तक पहुंच सकती है। ऐसे में सरकार क्षेत्रीय स्तर पर तेज और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए रिंग रोड की तर्ज पर रेल आधारित कनेक्टिविटी नेटवर्क विकसित करने पर काम कर रही है।

    तीन स्तरों में विकसित होगा ऑर्बिटल रेल नेटवर्क

    पहला ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर

    पहले चरण में कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) और कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास रेल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर पलवल, खुर्जा, मेरठ, बागपत और सोनीपत जैसे शहरों को जोड़ने का काम करेगा।

    orbital rail corridor

    हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) परियोजना के तहत सोनीपत से पलवल तक रेल लाइन बिछाई जा रही है, जिसका लगभग एक-तिहाई निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

    दूसरा कॉरिडोर औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ेगा

    दूसरा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक शहरों को जोड़ने पर केंद्रित होगा। इसके तहत सोनीपत, शामली, मेरठ, जेवर, नूंह, भिवाड़ी, रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक और पानीपत को एक ही नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

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    orbital rail corridor 2

    इससे जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भिवाड़ी और रेवाड़ी जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों तक सीधी पहुंच संभव होगी।

    तीसरा और सबसे बाहरी रिंग कॉरिडोर

    तीसरे चरण में एनसीआर के सबसे बाहरी हिस्से को जोड़ने की योजना है। इसमें करनाल, जींद, भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल, बहरोड़, अलवर, डिबाई, गढ़मुक्तेश्वर, हस्तिनापुर और मुजफ्फरनगर जैसे शहर शामिल किए जाएंगे।

    orbital rail corridor 3

    इस कॉरिडोर की व्यवहार्यता रिपोर्ट (फिजिबिलिटी स्टडी) तैयार की जा रही है।

    2029 तक पूरा होगा पहला चरण

    हरियाणा में प्रस्तावित 126 किलोमीटर लंबे पहले चरण को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना पर लगभग 11,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

    विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है, जिसे मंजूरी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के साथ साझा किया जाएगा।

    नमो भारत नेटवर्क से भी होगा जुड़ाव

    योजना के अनुसार ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर को दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के साथ-साथ प्रस्तावित दिल्ली-पानीपत और दिल्ली-अलवर रैपिड रेल लाइनों से भी जोड़ा जा सकता है। इससे एनसीआर के अधिकतम शहर हाईस्पीड रेल नेटवर्क के दायरे में आ जाएंगे।

    साथ ही इस परियोजना को पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी के तहत विकसित किए गए ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से भी जोड़ने की तैयारी है। इससे माल ढुलाई का समय और लागत दोनों में कमी आने की उम्मीद है।

    सड़क और मेट्रो नेटवर्क पर घटेगा दबाव

    ऑर्बिटल रेल नेटवर्क शुरू होने के बाद मालवाहक ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा रेल मार्ग पर स्थानांतरित हो सकेगा। इससे दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, एनएच-44, डीएनडी फ्लाईवे और अन्य प्रमुख मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा। साथ ही दिल्ली मेट्रो, गुरुग्राम मेट्रो और नोएडा मेट्रो पर बढ़ता यात्री भार भी कम करने में मदद मिलेगी।

    कॉरिडोर से सटे शहरों में तेज होगा विकास

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेल कॉरिडोर के आसपास बागपत, शामली, नूंह, झज्जर और डिबाई जैसे शहरों में नई सैटेलाइट टाउनशिप और रियल एस्टेट परियोजनाओं का विकास तेज होगा।

    बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे तथा दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों पर आबादी का दबाव कम किया जा सकेगा।

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