लुटियंस दिल्ली के 33 विरासत वृक्षों को मिलेगी डिजिटल पहचान, NDMC लगाएगी QR कोड
नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने लुटियंस दिल्ली में लगभग एक सदी पुराने 33 विरासत वृक्षों की पहचान की है। इन पेड़ों को मुकम्मल पहचान देने के लि ...और पढ़ें

लुटियंस दिल्ली की 33 विरासत वृक्षों को एनडीएमसी क्यूआर कोड से देगी मुकम्मल पहचान।
HighLights
एनडीएमसी ने 33 विरासत वृक्षों की पहचान की।
पेड़ों पर क्यूआर कोड प्लेट लगाई जाएंगी।
आगंतुक पेड़ों की जानकारी स्कैन कर पाएंगे।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने लुटियंस दिल्ली क्षेत्र में ऐसे 33 विरासती वृक्षों की पहचान की है जो लगभग एक सदी पुराने हैं। साथ ही उसे मुकम्मल पहचान देने के लिए क्विक रिस्पान्स (क्यूआर) प्लेट लगाने की योजना बनाई है।
एक अधिकारियों के मुताबिक, क्यूआर कोड प्लेट को स्मार्टफोन से स्केन कर इन सदियों पुराने पेड़ों के लंबाई, अनुमानित उम्र, जीवन अवधि, वानस्पतिक नाम समेत अन्य जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। उसी तरह, उनपर फूलों के खिलने के मौसम, उसके छाया क्षेत्र का आकार, मोटाई और दूसरे वानस्पतिक खासियतों के बारे में भी डिजिटल प्लेट से आगंतुक जान सकेंगे।
एनडीएमसी के लिए किए गए बागवानी सर्वेक्षण के मुताबिक, 33 में से 11 पेड़ बरगद के है, जो लगभग 100 साल या उससे ज्यादा पुराने हैं। अधिकारी के अनुसार, तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में मौजूद बरगद पेड़ की मोटाई 16 मीटर है, जो सभी विरासत वृक्षों में सर्वाधिक मोटा है।
इसी तरह वृक्ष सर्वेक्षण से पता चला कि लुटियंस क्षेत्र में तीन अर्जुन, तीन चिलखन, दो सेमल,दो पिलखन वृक्ष भी विरासती सूची में शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सर्वे के मुताबिक, सूची में शामिल तीन घोरवृक्ष में एक नेहरू पार्क में है और आगंतुकों के बीच लोकप्रिय है। अधिकारी के अनुसार, हालांकि, पेड़ की सही उम्र अभी पता नहीं चली है, लेकिन यह विरासत वृक्ष में से एक है।
सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि सूची में तीन जड़ी और चार पीपल व एक काकड़ पेड़ विरासती है। विरासती वृक्ष सर्वेक्षण के मुताबिक, लोदी गार्डन में मोहम्मद शाह सैयद मकबरे के पास एक नारियल का पेड़ भी सूची में है।
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यह पहल एनडीएमसी द्वारा आंगतुकों को वृक्षों की जानकारी देने के लिए क्यूआर कोड लगाने के प्रयोग लगाने के पूर्व के प्रयोग पर आधारित है। लोदी गार्डन में कई पेड़ों को पिछले चरण में क्यूआर कोड से टैग किया गया था, जिससे आंगतुक अपने फोन के जरिए अलग-अलग प्रजातियों के बारे में जानकारी पा सकते हैं। एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल ने कहा कि इस कवायद का उद्देश्य दिल्ली के पुराने पेड़ों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को उनके पारिस्थितिक और विरासती मूल्यों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कहा कि एनडीएमसी क्षेत्र स्थित लुटियंस दिल्ली में सड़कों और पार्कों के किनारे लगे कई पेड़ दशकों पुराने हैं और राजधानी की हरियाली का अहम हिस्सा हैं। क्यूआर प्लेट लगाकर, हम इन विरासती वृक्षों की अहमियत के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
विरासती वृक्षों पर इंटरनेट पोर्टल जल्द
कुलजीत चहल ने बताया कि एनडीएमसी जल्द ही एक इंटरनेट पोर्टल जारी करने की योजना कर रही है ताकि आंगतुक को जानकारी मिल सके। इसके पूर्व 90 एकड़ में फैले लोधी गार्डन में एक पायलट प्रोजक्ट के तौर पर क्यूआर कोड प्लेट का काम हो चुका है, जहां चुने हुए पेड़ों को डिजिटली टैग किया गया था ताकि आगंतुक पेड़ों की प्रजातियों की पहचान कर सकें और उनकी खासियतों के बारे में जान सकें। इससे आम लोगों, शोधकर्ता व छात्रों को भी वृक्षों के बारे में जानना आसान हो जाएगा।