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    दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन से पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी का खतरा, NGT ने जताई गहरी चिंता

    By VINEET TRIPATHIEdited By: Anup Tiwari
    Updated: Thu, 08 Jan 2026 03:06 PM (IST)

    एनजीटी ने दिल्ली के ठोस कचरा प्रबंधन पर गंभीर चिंता जताई है, चेतावनी दी कि यह जन-स्वास्थ्य आपातकाल को जन्म दे सकता है। प्रतिदिन 11,000 टन कचरा उत्पन्न ...और पढ़ें

    दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन पर एनजीटी ने जताई चिंता। फाइल फोटो

    दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन पर एनजीटी ने जताई चिंता। फाइल फोटो

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में ठाेस कचरा प्रबंधन की नाकामी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि  दिल्ली का ठोस कचरा प्रबंधन जन-स्वास्थ्य आपातकाल को जन्म दे सकता है।

    एनजीटी ने रिकार्ड पर लिया कि दिल्ली में प्रतिदिन 11,000 टन से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जबकि केवल आठ हजार टन को ही उपचारित किया जाता है। वहीं प्रतिदिन करीब 3,000 टन बिना उपचारित कचरा जमा हो रहा है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार को मामले पर नियमित प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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    नौ एसटीपी नहीं कर रहे निर्धारित मानकों के तहत काम 

    वहीं, दूसरी तरफ यमुना में प्रदूषण व सीवेज प्रबंधन के मुद्दे पर एनजीटी ने रिकार्ड पर लिया कि नौ एसटीपी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं काम कर रहे हैं और यमुना नदी में विशेषकर वजीराबाद बैराज से असगरपुर गांव तक बिना उपचारित सीवेज का बहाव जारी है।

    एनजीटी ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सीवेज उत्पादन एवं सीवर कनेक्टिविटी, नालों में बहने वाले सीवेज/औद्योगिक अपशिष्ट पर रिपोर्ट दाखिल करें। साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को यमुना नदी की जल गुणवत्ता से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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