साकेत की 19 बीघा वन भूमि पर अवैध कब्जा, NGT ने दिल्ली सरकार को दिए 4 माह में अतिक्रमण हटाने के आदेश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को साकेत के सैदुलाजाब में वन भूमि से सभी अवैध अतिक्रमण चार महीने में हटाने का निर्देश दिया है। मूल 19 ब ...और पढ़ें

एनजीटी ने यह आदेश कई निजी व्यक्तियों द्वारा अवैध निर्माण करने की शिकायत पर सुनवाई करने के दौरान दिया।
HighLights
एनजीटी ने दिल्ली सरकार को साकेत वन भूमि से अतिक्रमण हटाने को कहा।
अवैध निर्माण और कब्जे चार महीने के भीतर हटाए जाने का निर्देश।
मूल 19 बीघा वन भूमि में से अब केवल 6.12 बीघा शेष।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को साकेत में एक वन भूमि से सभी अवैध अतिक्रमण चार महीने में हटाने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने यह आदेश साकेत के सैदुलाजाब इलाके में एक खसरा नंबर की वन भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा कब्जा करने, उसे लगभग नष्ट करने और कई निजी व्यक्तियों द्वारा अवैध निर्माण करने की शिकायत पर सुनवाई करने के दौरान दिया।
अब मात्र 6.12 बीघा जमीन ही बची
यह आदेश 27 जुलाई को पारित किया गया था। आदेश के तहत बुधवार को बताया गया कि एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की बेंच ने कहा कि पहले गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार, मूल 19 बीघा वन भूमि में से केवल 6.12 बीघा ही साइट पर उपलब्ध पाई गई है।
बेंच ने अगस्त 2024 की समिति रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राजस्व रिकॉर्ड और 1996 के नोटिफिकेशन में 19 बीघे की भूमि को 'आरक्षित वन' क्षेत्र घोषित किया गया था, लेकिन कोई चहारदीवारी या सीमा पर लगने वाला पिलर दिखाई नहीं दिया।
2025 में दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई
निरीक्षण में स्थायी संरचनाएं जैसे मंदिर, बड़ा चबूतरा और भवन विस्तार पाए गए जो भूमि पर अतिक्रमण कर रहे थे। रिपोर्ट में भूमि के एक हिस्से में वृक्षों के कैनोपी की स्थायी हानि भी बताई गई। साइट पर कचरे के ढेर और प्लास्टिक कचरा बिखरा हुआ पाया गया, जो स्थानीय वन्यजीवों जैसे पक्षियों और गिलहरियों के लिए खतरा बन रहा था। दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील के हवाले से ट्रिब्यूनल ने कहा कि पहले डिमोलिशन नोटिस जारी किए गए थे, जिन्हें 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
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अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी
हाईकोर्ट ने वन निपटान अधिकारी को अतिक्रमणकर्ताओं के दावों को सुनकर स्पीकिंग ऑर्डर पारित करने का निर्देश दिया था। इन दावों को भारत वन अधिनियम के तहत 7 मई 2026 को खारिज कर दिया गया था। अब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया, 'खसरा नंबर 209, सैदुलाजाब, साकेत से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून के अनुसार, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए चार महीने के अंदर पूरी की जाए।'
(पीटीआई के इनपुट के साथ)
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