दिल्ली के पालम अग्निकांड ने पुराना जख्म किया ताजा, 10 साल पहले रसोई गैस धमाके में गई थी सास-बहू की जान
पालम में हालिया अग्निकांड ने एक दशक पुरानी त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं। तब पालम के एक घर में रसोई गैस सिलेंडर फटने से 85 वर्षीय सत्यवती और उनकी बह ...और पढ़ें

पालम में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है जिसमें एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़ गिरा हो।
HighLights
हालिया पालम अग्निकांड ने पुरानी त्रासदी की याद दिलाई।
एक दशक पहले पालम में गैस धमाके से दो की मौत।
दिल्ली में कई बड़े अग्निकांडों की घटनाएं हुई हैं।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। पालम में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है जिसमें एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़ गिरा हो। करीब एक दशक पहले पालम इलाके स्थित एक मकान में लगी आग से सास-बहू की मौत हो गई थी। आग लगने का कारण रसोई गैस सिलिंडर में धमाका होना था। हादसे में इसी परिवार के तीन सदस्य बुरी तरह से झुलस गए। मृतकों में 85 वर्षीय सत्यवती और इनकी बहू ऊषा शामिल थी। हादसे में तीन लोग झुलसे भी थे। वहीं, पालम अग्निकांड में मारे गए सभी नौ लोगों का ब मंगलापुरी श्मशान भूमि में बुधवार की रात अंतिम संस्कार कर दिया गया।
दमकल की गाड़ियां तब भी देर से थीं पहुंचीं
लाेगों ने बताया कि बुधवार की घटना ने एक दशक पहले की घटना से जुड़ी यादें ताजा कर दी हैं। उस घटना के बारे में लोगों ने बताया कि ऋषि कुमार गुप्ता अपनी मां सत्यवती, पत्नी ऊषा, बेटे सौरभ और बेटी नेहा के साथ साध नगर की गली नंबर एक में स्थित एक मकान की दूसरी मंजिल पर रहते थे।
घटना वाले दिन सुबह करीब छह बजे रसोई गैस जलाने के दौरान जोरदार धमाका हुआ और पूरे घर में आग लग गई। धमाका सुनकर घर से बाहर निकले पड़ोसियों ने हादसे के बाबत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना मिली। सूचना के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची जरूर, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
कई अग्निकांड आए याद
पिछले वर्ष द्वारका सेक्टर 13 शबद अपार्टमेंट में 10 जून को दिन में हुई आग की घटना में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
द्वारका में करीब तीन वर्ष पूर्व अपार्टमेंट में लगी में दादी व पोती की दर्दनाक मौत हुई थी। इससे पूर्व मुंडका थाना क्षेत्र में 13 मई 2022 को एक तीन मंजिला इमारत में आग लगने से अंदर मौजूद 27 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी। आग पर काबू पाने में दमकल विभाग के सैंकड़ों कर्मी 50 से ज्यादा गाड़ियों का दिन रात इस्तेमाल किया गया था।