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    अधूरी तैयारियों की भेंट चढ़ी आग से जीवन रक्षा की कोशिश; न ढंग की सीढ़ी थी न ही जाल; स्काई लिफ्ट का भी बुरा हाल

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 07:23 PM (IST)

    पालम अग्निकांड में अग्निशमन विभाग की अधूरी तैयारियों और उपकरणों की कमी उजागर हुई। घटनास्थल पर पहली ब्रांटो स्काई लिफ्ट देर से पहुंची और उसका हाइड्रोलि ...और पढ़ें

    स्थानीय लोगों ने अग्निशमन विभाग के रवैये पर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि जीवन रक्षक मिशन में यदि आपके पास अहम उपकरण नहीं हो, तो इसका साफ अर्थ है कि आप मिशन को लेकर गंभीर नहीं हैं।

    स्थानीय लोगों ने अग्निशमन विभाग के रवैये पर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि जीवन रक्षक मिशन में यदि आपके पास अहम उपकरण नहीं हो, तो इसका साफ अर्थ है कि आप मिशन को लेकर गंभीर नहीं हैं।

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    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। पालम के रामचौक मार्केट से द्वारका सेक्टर छह दमकल केंद्र की दूरी तीन किलोमीटर होगी। इस बीच करीब पांच लाल बत्ती हैं लेकिन संसाधन के अभाव से जुड़ी लापरवाही ने इस छोटी दूरी को काफी लंबा कर दिया है। जिस ब्रांटो स्काई लिफ्ट को घटना के फौरन बाद पहुंचना चाहिए, वह एक तो काफी देर से पहुंची, जब पहुंची भी तो वह इस्तेमाल नहीं हो सकी। इसके बाद दूसरी ब्रांटो स्काई लिफ्ट घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इसकी मदद से बेसुध लोगों को नीचे लाया गया।

    आग से बचाने के सारे दावे बेकार

    स्थानीय लोगों ने अग्निशमन विभाग के रवैये पर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि जीवन रक्षक मिशन में यदि आपके पास अहम उपकरण नहीं हो, तो इसका साफ अर्थ है कि आप मिशन को लेकर गंभीर नहीं हैं। पालम में ऐसा ही हुआ। लोगों ने कहा कि पिलर की रंगाई से लेकर स्ट्रीट लाइट को दुरुस्त करने के लिए स्काई लिफ्ट का इस्तेमाल तमाम एजेंसियां करती हैं, लेकिन बात जब जीवन बचाने की थी, तब सभी एजेंसियां हाथ पर हाथ धरे थीं। आखिर आपदा प्रबंधन विभाग कहां था? आपदा से निपटने की तैयारी का प्रशिक्षण कहां था? आग से बचने के तमाम दावे कहां थे?

    सीढ़ी थी छोटी, जाल तक नहीं था ठीक

    लोगों का कहना था कि कमल अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ बालकनी पर खड़े होकर मदद की गुहार लगा रहे थे। तब सामान्य दमकल जो मौके पर मौजूद था, उसके पास सीढ़ी तक इतनी ऊंची नहीं थी, वह तीसरी मंजिल पर पहुंचे। यहां तक कि जाल भी नहीं थे, जिससे कि कमल को लोग नीचे कूदने को कहते। कमल ने हिम्मत हार दी। यदि दमकल के पास रस्सी या जाल होता तो शायद कमल हमारे बीच होता लेकिन कमल मदद की गुहार लगाते लगाते इस दुनिया से चले गए।

    हाइड्रोलिक सिस्टम हुआ खराब

    आग की शुरुआत के बाद पहली काॅल किए जाने के करीब 40 मिनट बाद जब द्वारका केंद्र से पहली ब्रांटो पहुंची तो मौके पर उसका हाइड्रोलिक सिस्टम फेल हो गया। वह उपर उठ ही नहीं सका।

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    सूत्रों ने बताया कि ब्रांटो जो द्वारका में है, उसे जुगाड़ से चलाया जा रहा है। उसका हाइड्रोलिक सिस्टम पुराना है। केवल चेचिस नया है। दमकलकर्मियों ने इस समस्या से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया। दमकल कर्मियों का कहना है कि नजदीकी दमकल केंद्रों में कहीं भी ब्रांटो नहीं है।

    सबसे नजदीक दमकल केंद्र जहां यह सुविधा है वह या तो रोहिणी है या फिर भीकाजी कामा प्लेस। लेकिन पालम में जो ब्रांटो दूसरी कोशिश में पहुंचा, कनाॅट प्लेस अग्निशमन केंद्र से पहुंचा। इसमें भी काफी समय लगा। जब यह पहुंचा तब तक काफी विलंब हो चुका था।

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