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    संसद सुरक्षा चूक मामले में दिल्ली पुलिस ने चौथा पूरक आरोपपत्र किया दाखिल, UAPA की गंभीर धाराएं जोड़ीं

    Updated: Sat, 23 May 2026 08:00 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस ने संसद सुरक्षा चूक मामले में चौथा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसमें यूएपीए के तहत आतंकी कृत्य और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी ...और पढ़ें

    मामला 13 दिसंबर 2023 को संसद भवन में हुई सुरक्षा चूक से जुड़ा है जब घुसपैठियों के स्मोक कैन इस्तेमाल के बाद लोकसभा में अफरा-तफरी जैसी स्थिति.उत्पन्न हो गई थी। फाइल फोटो

    मामला 13 दिसंबर 2023 को संसद भवन में हुई सुरक्षा चूक से जुड़ा है जब घुसपैठियों के स्मोक कैन इस्तेमाल के बाद लोकसभा में अफरा-तफरी जैसी स्थिति.उत्पन्न हो गई थी। फाइल फोटो



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    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चौथा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। पुलिस ने करीब 13,967 पन्नों के इस आरोपपत्र में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकी कृत्य, आपराधिक साजिश और दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं। मामला 13 दिसंबर 2023 को संसद भवन में हुई सुरक्षा चूक से जुड़ा है।

    दस्तावेज की जांच की प्रक्रिया पूरी की जाए

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित बंसल ने शुक्रवार को आरोपपत्र को रिकार्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को तय की। अदालत ने आदेश दिया कि आरोपित नीलम रणोलिया और अमोल धनराज के अधिवक्ताओं को पूरक आरोपपत्र की एक हार्ड काॅपी उपलब्ध कराई जाए और दस्तावेज की जांच की प्रक्रिया पूरी की जाए।

    दिल्ली पुलिस ने अदालत को पूरक आरोपपत्र की काॅपी सभी आरोपितों और उनके अधिवक्ताओं को पेन ड्राइव के माध्यम से उपलब्ध करा दी गई है। अदालत फिलहाल आरोप तय करने के मुद्दे पर विस्तृत दलीलें सुन रही है। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि अगली तारीख पर हार्ड काॅपी उपलब्ध करा दी जाएगी।

    नया पूरक आरोपपत्र देना दुरुपयोग

    दिल्ली पुलिस के अनुसार पूरक आरोपपत्र आइपीसी की धारा 186, 353, 153, 452, 201, 34 और 120बी के तहत दाखिल की गई है। इसके अलावा यूएपीए की धारा 13, 16 और 18 भी जोड़ी गई हैं। अदालत इन धाराओं में पहले ही संज्ञान ले चुकी है।

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    सुनवाई के दौरान आरोपित नीलम रणोलिया और अमोल धनराज की ओर से पेश अधिवक्ता ने आरोपपत्र दाखिल किए जाने के समय पर आपत्ति जताई। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जब अदालत आरोप तय करने पर लंबी बहस सुन रही है, ऐसे में नया पूरक आरोपपत्र दाखिल करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। साथ ही आरोपपत्र की हार्ड काॅपी उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।

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