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    क्या दोषी को हमेशा जेल में रख सकते हैं? प्रियदर्शिनी मट्टू के हत्यारे की याचिका पर दिल्ली HC का सवाल

    Updated: Thu, 16 Apr 2026 06:30 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रियदर्शिनी मट्टू दुष्कर्म व हत्या मामले के दोषी संतोष कुमार सिंह की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) की कार्य ...और पढ़ें

    प्रियदर्शिनी मटटू के हत्यारे संतोष कुमार सिंह की याचिका पर हाई कोर्ट ने की टिप्पणी। फोटो: आर्काइव

     प्रियदर्शिनी मटटू के हत्यारे संतोष कुमार सिंह की याचिका पर हाई कोर्ट ने की टिप्पणी। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने एसआरबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए

    2. संतोष कुमार सिंह की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सुनवाई

    3. कोर्ट ने पूछा, क्या दोषी को हमेशा जेल में रखें?

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 1996 में दुष्कर्म के बाद प्रियदर्शिनी मट्टू की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी संतोष कुमार सिंह की समय पूर्व रिहाई के मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड (SRB) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया।

    न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसआरबी लोगों की राय के आधार पर आगे बढ़ रहा है। इसमें कोई शक नहीं है कि यह अपराध बहुत ही जघन्य था और मृतक के परिवार को हुए नुकसान की कभी भरपाई नहीं की जा सकती है।

    'रिहाई की याचिकाओं पर आंख पर पट्टी बांधकर निर्णय ले रहा SRB'

    लेकिन ऐसा लगता है कि समय से पहले रिहाई की अर्जियों पर एसआरबी उसी तरह निर्णय ले रहा है, जैसे आंखों पर पट्टी बांधे 'जेडी जस्टिस' (न्याय की देवी) करती हैं। पीठ ने इसी तरह से जुड़े अन्य मामलों के साथ संतोष कुमार की याचिका को 20 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

    समय पूर्व रिहाई की मांग से जुड़ी याचिका को खारिज करने के एसआरबी के 27 नवंबर 2025 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर संतोष कुमार ने एक अर्जी दायर कर मामले की सुनवाई 18 मई से पहले करने की मांग की थी।

    खबरें और भी

    संतोष कुमार सिंह की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मोहित माथुर ने दलील दी कि उनका मुवक्किल हिरासत में 31 साल बिता चुका है। इस पर पीठ ने कहा कि अदालत में ऐसे भी मामले हैं, जहां 41 साल तक हिरासत में रखा गया है और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि एसआरबी बस मामलों को खारिज करता जा रहा है।

    मट्टू के भाई ने किया दोषी की याचिका का विरोध 

    मट्टू के भाई के वकील ने सुनवाई की तारीख पहले करने की अर्जी का विरोध किया और कहा कि दोषी ने एक गंभीर अपराध किया था। हालांकि, पीठ ने कहा कि संतोष कुमार सिंह को उसके अपराध के लिए सजा मिल चुकी है, और पूछा कि क्या उसे हमेशा जेल में ही रखा जा सकता है?

    तंदूर कांड के दोषी की रिहाई का हवाला दिया गया 

    पीठ ने टिप्पणी की कि 1995 के तंदूर हत्याकांड के दोषी सुशील कुमार को भी 23 साल जेल में बिताने के बाद रिहा कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि अदालत आपकी भावनाओं को समझती है और जो अपीलकर्ता ने किया वह कतई स्वीकार्य नहीं था और उसे सजा दी गई। साथ ही यह भी पूछा क्या हम किसी इंसान को इस तरह हमेशा के लिए कैद में ही रखें?

    दिल्ली यूनिवर्सिटी की विधि छात्रा मट्टू के साथ जनवरी 1996 में दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने तीन दिसंबर 1999 को संतोष कुमार को बरी कर दिया था, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2006 को इस फैसले को पलटते हुए दोषी करार दिया दिया और मौत की सजा सुनाई।

    हालांकि, अक्टूबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने संतोष सिंह की सजा को बरकरार रखा, लेकिन उसकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

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