VIDEO: अब घर-घर सामान पहुंचाने निकल पड़े राघव चड्ढा, गिग वर्कर्स के समर्थन को लेकर चर्चा में रहे AAP सांसद
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की समस्याओं को समझने के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय बनकर काम किया। उन्होंने ठंडी रात में स्कूट ...और पढ़ें
HighLights
राघव चड्ढा ने ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय बनकर अनुभव लिया।
गिग वर्कर्स की समस्याओं को करीब से समझने का प्रयास।
10 मिनट डिलीवरी मॉडल को बताया "क्रूर और खतरनाक"।
डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को गिग वर्कर्स के दर्द को करीब से समझने के लिए एक अनोखा कदम उठाया। उन्होंने ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय बनकर काम किया और ठंडी रात में स्कूटी पर सवार होकर घर-घर सामान पहुंचाया। राघव ने ब्लिंकिट की पीली यूनिफॉर्म पहनी, डिलीवरी बैग कंधे पर लटकाया और एक राइडर के साथ मिलकर ऑर्डर डिलीवर किए।
उन्होंने अपना वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, "Away from boardrooms, at the grassroots. I lived their day. Stay tuned!" यह कदम गिग वर्कर्स की पुरानी समस्याओं को फिर से उजागर करने वाला है।
बता दें कि राघव चड्ढा पिछले कई महीनों से Zomato, Swiggy, Blinkit, Zepto जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स की हालत पर आवाज उठाते रहे हैं। दिसंबर 2025 में उन्होंने संसद में कहा था कि "10 मिनट डिलीवरी कल्चर" इन वर्कर्स की जान जोखिम में डालता है। वे तेज रफ्तार में बाइक चलाते हैं, रेड लाइट जंप करते हैं, ताकि रेटिंग न गिरे, इनसेंटिव कट न हो या आईडी ब्लॉक न हो।
उन्होंने इसे "क्रूरता" बताया और मांग की कि इस मॉडल को खत्म किया जाए, क्योंकि इससे वर्कर्स की हालत दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर हो गई है। एक पुरानी घटना में, सितंबर 2025 में एक ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय हिमांशु थपलियाल का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने बताया कि 15 घंटे काम, 28 डिलीवरी और 50 किमी से ज्यादा ड्राइव के बाद सिर्फ 763 रुपये कमाए।
Away from boardrooms, at the grassroots. I lived their day.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) January 12, 2026
Stay tuned! pic.twitter.com/exGBNFGD3T
राघव ने इस वीडियो को देखकर हिमांशु को अपने घर लंच पर बुलाया, उनकी समस्याएं सुनीं और गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए संसद में लड़ाई तेज की। 31 दिसंबर 2025 को गिग वर्कर्स ने देशव्यापी स्ट्राइक की, जिसमें 10 मिनट की समय सीमा हटाने, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा (पेंशन, बीमा), काम के घंटे तय करने और सम्मान की मांग की गई।
राघव ने स्ट्राइक का समर्थन किया और प्लेटफॉर्म्स पर सवाल उठाए कि वे अरबों कमाते हैं, लेकिन वर्कर्स को "मिसक्रीएंट्स" कहकर अपमानित करते हैं।राघव का यह "डिलीवरी बॉय" बनना सिर्फ एक स्टंट नहीं, बल्कि गिग इकॉनमी में शोषण के खिलाफ जमीनी स्तर पर आवाज है। इससे उम्मीद है कि सरकार और कंपनियां इन लाखों अनदेखे पहियों को सुरक्षा, सम्मान और उचित अधिकार देंगी।