रेलवे में परमानेंट नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह दबोचा, महिला समेत 3 जालसाज दिल्ली से गिरफ्तार
रेलवे में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह मल्टी ...और पढ़ें

रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले दबोचे। फोटो: सांकेतिक
HighLights
रेलवे नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह
फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और मेडिकल टेस्ट का इस्तेमाल
रेलवे विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। रेलवे में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह की महिला समेत तीन सदस्यों को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन थाना पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। यह गिरोह रेलवे में मल्टी टास्किंग स्टाफ और क्लर्क के पदों पर स्थायी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को शिकार बनाता था।
डीसीपी रेलवे बी. बोम्मा रेड्डी के मुताबिक 30 मई को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन थाने में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पुलिस और आरपीएफ की संयुक्त टीम में शामिल एक ने पीड़ित बनकर मुख्य आरोपित महिला 'ईशा' से संपर्क किया और उसे नौकरी के बदले बची हुई रकम लेने के लिए पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बुलाया।
जैसे ही ईशा, चांदनी चौक के गेट नंबर तीन के पास पहुंची, पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया। उससे पूछताछ के बाद रंजीत नाम के दूसरे आरोपित को कश्मीरी गेट आईएसबीटी से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके बाद दोनों से पूछताछ के आधार पर आलम को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफाॅर्म नंबर 16 से दबोच लिया गया।
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रेलवे अस्पताल में कराया मेडिकल
पूछताछ के आरोपितों ने कुबूल किया कि वे लंबे समय से नौकरी के इच्छुक युवाओं को ठग रहे थे। ईशा और रंजीत ने शिकायतकर्ता से 3,60,000 वसूले थे और यह रकम आगे आलम को ट्रांसफर कर दी गई थी।
जांच में सामने आया कि आलम, अतुल कदम और ए.के. खान नाम के व्यक्तियों के संपर्क में था, जो रेल भवन और बड़ौदा हाउस (रेलवे मुख्यालय) में अपनी ऊंची पहुंच होने का दावा करते थे।
ठगी को असली रूप देने के लिए शिकायतकर्ता के बेटे का उत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल में कुलदीप नाम के व्यक्ति द्वारा मेडिकल परीक्षण भी कराया गया था, जो अतुल और आलम के साथ मिला हुआ था।
स्पीड पोस्ट से भेजे फर्जी ज्वाइनिंग लेटर
पीड़ितों का विश्वास जीतने और बाकी के पैसे ऐंठने के लिए यह गिरोह भारतीय डाक से स्पीड पोस्ट के जरिए फर्जी काल लेटर और भर्ती से जुड़े जाली दस्तावेज उम्मीदवारों के घर भेजता था।
रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत का अंदेशा
शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि इस गिरोह ने कई युवाओं को ठगी का शिकार बनाया है। प्रथम दृष्टया इस पूरे खेल में रेलवे विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत होने की आशंका है।
पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य फरार आरोपितों और रेलवे विभाग के संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है ताकि सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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