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    ट्रिनिडाड के 7 माह के एरिक को मिला नया जीवन, दिल्ली के हॉस्पीटल में दुर्लभ लिवर ट्रांसप्लांट सफल

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 05:25 AM (GMT+05:30)

    ट्रिनिडाड एंड टोबैगो के सात माह के एरिक रामसूक को इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में दुर्लभ लिवर ट्रांसप्लांट से नया जीवन मिला। जन्मजात टीजेपी2 जीन म्यूटेश ...और पढ़ें

    लिवर ट्रांसप्लांट के बाद 7 माह का एरिक (गोद में) अपने माता-पिता व बड़े भाई के साथ। सौजन्य- अस्पताल

    लिवर ट्रांसप्लांट के बाद 7 माह का एरिक (गोद में) अपने माता-पिता व बड़े भाई के साथ। सौजन्य- अस्पताल

    HighLights

    1. सात माह के एरिक को दिल्ली में मिला नया जीवन।

    2. दुर्लभ टीजेपी2 जीन म्यूटेशन का सफल लिवर ट्रांसप्लांट।

    3. मां ने अपने लिवर का हिस्सा दान कर जान बचाई।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। करीब 175 वर्ष पहले भारत छोड़कर ट्रिनिडाड एंड टोबैगो पहुंचे भारतीय मूल के परिवार के सात माह के शिशु एरिक रामसूक को इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल में दुर्लभ और सफल लिवर ट्रांसप्लांट के जरिए नया जीवन मिला।

    चार किलोग्राम से भी कम वजन वाले एरिक को जन्म के कुछ सप्ताह बाद पीलिया हुआ जो धीरे-धीरे गंभीर आनुवंशिक लिवर डिसआर्डर में बदल गया। भारत पहुंचने पर वह एंड-स्टेज लिवर फेल्योर, गंभीर कुपोषण, पेट में पानी भरने (असाइटिस) और पोर्टल हाइपरटेंशन जैसी जटिलताओं से जूझ रहा था।

    एरिक के परिवार की जड़ें उत्तर प्रदेश के वर्तमान बलरामपुर जिले के मोराडीहा गांव से जुड़ी हैं। दिल्ली पहुंचने के एक सप्ताह के भीतर उसका लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। इसका नेतृत्व डा. अनुपम सिब्बल ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर एवं सीनियर पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटरोलाजिस्ट और हेपेटोलाजिस्ट तथा इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल के डा. नीरव गोयल ने किया।

    डोनर ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती

    उन्होंने बताया कि ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त डोनर ढूंढ़ना सबसे बड़ी चुनौती थी। पहले एरिक के पिता की जांच की गई, लेकिन वे दान के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए। इसके बाद उसकी मां ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान कर बेटे की जान बचाई।

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    ट्रांसप्लांट के बाद हुई अनुवांशिक जांच में दुर्लभ टीजेपी2 (टाइट जंक्शन प्रोटीन-2) जीन म्यूटेशन की पुष्टि हुई। यह एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक दोष है। टीजेपी2 जीन लिवर की कोशिकाओं को आपस में मजबूती से जोड़ने वाले प्रोटीन का निर्माण करता है।

    इसमें बदलाव होने पर बाइल (पित्त) का सामान्य प्रवाह प्रभावित हो जाता है, जिससे प्रोग्रेसिव कोलेस्टेटिक लिवर डिजीज विकसित होती है, जिससे लिवर फेल्योर हो सकता है। दावा किया कि दुनिया में इस बीमारी से पीड़ित केवल कुछ दर्जन बच्चों का ही लिवर ट्रांसप्लांट हुआ है, इसलिए यह मामला बेहद दुर्लभ माना जा रहा है।

    तेजी से करनी पड़ी पूरी प्रक्रिया

    डा. अनुपम सिब्बल ने बताया कि जब एरिक उनके केंद्र पहुंचा, तब वह तेजी से बढ़ रही क्रानिक लिवर डिजीज से जूझ रहा था। ऐसे में जांच और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना पड़ा।

    डा. नीरव गोयल के अनुसार उनके केंद्र में अब तक 645 पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं, जिनमें केवल दो मामले ही टीजेपी2 जीन म्यूटेशन से जुड़े थे।

    एरिक उनकी सर्जिकल टीम द्वारा सफलतापूर्वक लिवर ट्रांसप्लांट पाने वाला ट्रिनिडाड का दूसरा बच्चा है। बताया कि 15वें दिन एरिक को हास्पिटल से छुट्टी दे दी गई, उसकी रिकवरी लगातार बेहतर हो रही है।

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