6 साल की बच्ची से दुष्कर्म मामले में 65 साल के बुजुर्ग को 20 साल की कैद, दिल्ली कोर्ट ने सुनाया फैसला
रोहिणी कोर्ट ने छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में 65 वर्षीय बुजुर्ग को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने समाज को कड़ा संदेश देते ...और पढ़ें

रोहिणी कोर्ट ने 6 साल की मासूम से दुष्कर्म के दोष में 20 साल की कैद की सजा सुनाई।
HighLights
रोहिणी कोर्ट ने 65 वर्षीय दोषी को सुनाई सजा।
छह साल की बच्ची से दुष्कर्म का था मामला।
दोषी को 20 साल कठोर कारावास, 10.50 लाख मुआवजा।
धर्मेंद्र यादव, बाहरी दिल्ली। छह साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले 65 साल के बुजुर्ग को रोहिणी कोर्ट ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बच्ची की आयु और दोषी की उम्र अपराध की गंभीरता बताती है। समाज में इस प्रकार की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। समाज को एक कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए।
लगभग दो साल पुराने बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में सुनवाई करते हुए सत्र न्यायाधीश अजय नागर ने गत शुक्रवार को 67 वर्षीय (इस समय) दोषी को सजा सुनाई।
न्यायाधीश ने दोषी को पाक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी। जुर्माना न देने की स्थिति में उसे 15 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने पीड़ित बच्ची को 10.50 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने के निर्देश भी दिए।
बच्ची पर यौन हमले की घटना छह मई 2024 को हुई
कोर्ट ने 30 अप्रैल को आरोपित को दोषी करार दिया था। बच्ची पर यौन हमले की घटना छह मई 2024 को हुई। बच्ची की मां ने पुलिस बताया कि वह घरों में झाडू-पौचा और उनके पति मजदूरी कर गुजर-बसर कर रहे हैं।
घटना के दिन शाम को जब वे घर लौटीं तो पड़ोस में रहने वाले बच्चों ने बताया कि गली में रहने वाले अंकल ने उनकी बेटी के साथ गलत हरकत की। इसके बाद बच्ची की मां ने 112 नंबर पर काल कर पुलिस को बुलाया और आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। बच्ची दोषी बुजुर्ग को नाना कहती थी।
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कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि परिस्थितियां गंभीर हैं, अपराध के समय पीड़िता की उम्र लगभग छह वर्ष थी और दोषी की आयु 65 साल। समाज में इस प्रकार की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं और समाज में कुछ निवारक उपाय होने चाहिए।
अपराध के समय पीड़िता की उम्र मात्र 6 वर्ष थी
समाज को एक कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए कि बच्चों के खिलाफ इस तरह के अपराध किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और ऐसे अपराधियों को न्यायालय कड़ी सजा देगा। अपराध के समय पीड़िता की उम्र मात्र 6 वर्ष थी और दोषी की उम्र लगभग 65 वर्ष थी।
लोक अभियोजक राजेश सिरोही ने कोर्ट से दोषी को अधिकतम सजा और पीड़िता को अधिकतम मुआवजा देने का आग्रह किया और कहा कि पीड़िता की उम्र लगभग छह वर्ष थी और अपराध के समय दोषी की आयु 65 वर्ष थी। पीड़िता और दोषी की आयु के बीच का अंतर भी एक गंभीर कारक है। पीड़िता द्वारा झेला गया मानसिक आघात जीवन भर उसकी स्मृति में रहेगा।