LPG कालाबाजारी: दिल्ली साकेत कोर्ट ने आरोपी मुकेश की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज
दक्षिणी दिल्ली की साकेत कोर्ट ने एलपीजी सिलेंडरों की अवैध खरीद और कालाबाजारी के आरोपी मुकेश कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने इसे ...और पढ़ें
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दिल्ली साकेत कोर्ट। जागरण

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जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली में साकेत कोर्ट ने एलपीजी सिलिंडरों की अवैध खरीद और कालाबाजारी के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला जामिया नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआइआर से जुड़ा है।
दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में आवश्यक वस्तु अधिनियम और बीएनएस की धाराएं लगाई हैं। पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कृत्य, विशेष रूप से ऐसे समय में जब आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं, अपराध की गंभीरता को और बढ़ा देते हैं और सीधे तौर पर आम जनता को प्रभावित करते हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार गौतम ने आरोपी मुकेश कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। बताया जाता है कि वह उस वाहन का मालिक है, जिसका कथित तौर पर एलपीजी सिलिंडरों की अवैध खरीद में इस्तेमाल किया गया था।
याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोप एलपीजी सिलिंडरों की अवैध खरीद और कालाबाजारी से जुड़े हैं, जो पहली नजर में एक संगठित गतिविधि की ओर इशारा करते हैं, जिसके सार्वजनिक सुरक्षा और वितरण प्रणाली पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं।
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एलपीजी सिलिंडरों की कालाबाजारी
कोर्ट ने आगे कहा कि आवेदक की भूमिका अलग और ज्यादा गंभीर है, क्योंकि बताया जाता है कि वह अपराध में इस्तेमाल किए गए वाहन का मालिक है और कथित साजिश का हिस्सा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 28 मार्च के अपने आदेश में कहा कि यह कोर्ट इस और को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता कि आवश्यक वस्तुओं, विशेष रूप से एलपीजी सिलिंडरों की कालाबाजारी से जुड़े अपराध, कीमतों में बढ़ोतरी और जनता की निर्भरता बढ़ने के समय में ज्यादा गंभीर हो जाते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर आम जनता प्रभावित होती है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के आर्थिक अपराध, जो आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने के समय किए जाते हैं, जन कल्याण की बुनियाद पर ही चोट करते हैं। कोर्ट ने सह-आरोपी के साथ समानता के आधार पर दी गई दलीलों को भी खारिज कर दिया और कहा कि यह तर्क लागू नहीं होता, क्योंकि वर्तमान आवेदक की भूमिका और आचरण काफी अलग है।
कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं
आरोपी मुकेश कुमार के वकील ने दलील दी कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा सात के तहत आने वाले अपराध में सीमित सजा का प्रावधान है और यह जमानती प्रकृति का है। आगे यह भी कहा गया कि आवेदक का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है, इस मामले में बरामदगी पहले ही हो चुकी है, और सह-आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
दूसरी ओर, अतिरिक्त लोक अभियोजक ने आवेदन का जोरदार विरोध किया और कहा कि बताए गए फैसले इस कोर्ट पर बाध्यकारी नहीं हैं और केवल प्रेरक प्रकृति के हैं। आगे यह भी तर्क दिया गया कि इस मामले में एलपीजी सिलिंडरों की अवैध खरीद, परिवहन और कालाबाजारी शामिल है, जिससे सार्वजनिक वितरण और सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित होती है।
यह तर्क दिया गया कि आवेदक मुख्य साजिशकर्ता है और अपराध करने में इस्तेमाल किए गए वाहन का मालिक है। उसने जांच में सहयोग नहीं किया है और मौके से फरार हो गया है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि जांच एक अहम मोड़ पर है और पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए आवेदक से हिरासत में पूछताछ जरूरी है, जिसमें खरीद के स्रोत, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य सह-साजिशकर्ताओं की पहचान करना शामिल है। यह भी कहा गया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का अभी विश्लेषण किया जाना बाकी है।
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अगर आवेदक को अग्रिम जमानत दी जाती है, तो इस बात की भी आशंका है कि वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित कर सकता है। यह भी तर्क दिया गया कि आवेदक, मौजूदा हालात के बावजूद गलत फायदे के लिए कालाबाजारी में शामिल है, जिस पर कोर्ट को सख्त रुख अपनाना चाहिए।
28 फरवरी को पश्चिम एशिया में तनाव तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए और उसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। इससे पूरे देश में कच्चे तेल और एलपीजी का संकट पैदा हो गया।