दैनिक जागरण की खबर का असर, 182 एकड़ में फैली संजय झील में लौटा जीवन; एसटीपी से पानी की आपूर्ति शुरू
दिल्ली की संजय झील में चार माह के सूखे के बाद आखिरकार जलापूर्ति बहाल हो गई है। दैनिक जागरण की खबरों के बाद अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई और एसटीपी ...और पढ़ें
-1779590834497_m.webp)
त्रिलोकपुरी स्थित संजय झील में एसटीपी से पानी आना हुआ शुरु। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नितिश कुमार, पूर्वी दिल्ली। करीब चार माह से सूखे की चपेट में आकर दम तोड़ रही यमुनापार की संजय झील में आखिरकार शनिवार से जलापूर्ति बहाल हो गई है। झील में लगातार घटते जलस्तर और भीषण गर्मी के कारण कुछ दिन पहले बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गई थीं।
इस समस्या को लेकर दैनिक जागरण ने लगातार प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कर अधिकारियों की लापरवाही को उजागर किया था। इसके बाद शुक्रवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों ने झील का दौरा कर स्थिति का निरीक्षण किया और शनिवार से एसटीपी के माध्यम से झील में पानी छोड़ दिया गया।
संजय झील यमुनापार का सबसे बड़ा पिकनिक स्पाट है। करीब 182 एकड़ में फैली यह झील पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां लोगों को प्रकृति के करीब आने का अवसर मिलता है।
जिम्मेदारी डीडीए और दिल्ली जल बोर्ड पर
वहीं, प्रवासी पक्षियों और विभिन्न पेड़-पौधों का भी यह प्रमुख आश्रय स्थल है। झील के रखरखाव की जिम्मेदारी डीडीए और दिल्ली जल बोर्ड पर है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते भीषण गर्मी में यहां पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी थी।
वहीं, लगातार घटते जलस्तर के कारण झील की मछलियां दम तोड़ने लगी थीं। साथ ही पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं पर भी संकट गहराता गया। मृत मछलियों से उठ रही दुर्गंध के कारण झील के आसपास आने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही थी।
खबरें और भी
इसके बाद दैनिक जागरण ने 21 और 23 मई के अंक में झील के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो विभागीय अधिकारियों की नींद टूटी और अब झील में दोबारा पानी छोड़ा जाना शुरू हुआ है।
झील की क्षतिपूर्ति में लग सकते हैं कई माह
लंबे समय से उपेक्षा की शिकार रही संजय झील में कोंडली में लगे एसटीपी का शोधित पानी शनिवार को यहां पहुंचने लगा है। वहीं चार माह तक पानी की भारी कमी रहने के कारण झील की तलहटी में दरारें पड़ गई हैं और छोटे पौधों को भी नुकसान हुआ है।
जलस्तर घटने से प्रवासी पक्षियों ने भी अपना ठिकाना बदल लिया है। परिसर में कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार पूरे झील क्षेत्र में पर्याप्त पानी भरने में करीब एक माह का समय लग सकता है, जबकि झील को पूरी तरह पहले जैसी स्थिति में लौटने में इससे भी अधिक समय लगेगा।
यह भी पढ़ें- दिल्ली-एनसीआर में सपनों का घर साकार करने के लिए जरूरी सरकारी योजनाएं, PMAY से DDA तक सबकुछ जानें
संजय झील की दुर्दशा का मुद्दा दैनिक जागरण ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद ही प्रशासन जागा और कार्रवाई करने के लिए मजबूर हुआ है। जागरण का यह प्रयास सराहनीय है। - गरिमा त्रिपाठी, कोटला गांव
संजय झील केवल घूमने की जगह नहीं बल्कि यमुनापार का महत्वपूर्ण पर्यावरणीय केंद्र है। यदि समय रहते यह मामला नहीं उठाया जाता तो हालात और गंभीर हो सकते थे। - भानू जोशी, मयूर विहार