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    'हिंसा ही नहीं, हिंदुओं को निशाना बनाना भी था उन्मादी भीड़ का उद्देश्य'; IB अफसर मर्डर केस में कोर्ट की टिप्पणी

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 04:32 PM (IST)

    कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषी ठहराया है। अदालत 23 जुलाई को सजा के बिंदु पर सुनवाई ...और पढ़ें

    कड़कड़डूमा कोर्ट ने अंकित शर्मा हत्याकांड में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को दोषी ठहराया है। फाइल फोटो

    कड़कड़डूमा कोर्ट ने अंकित शर्मा हत्याकांड में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को दोषी ठहराया है। फाइल फोटो

    HighLights

    1. ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपित अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषी।

    2. कड़कड़डूमा कोर्ट 23 जुलाई को सुनाएगी सजा पर फैसला।

    3. फैसला 91 गवाहों, वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित है।

    जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। आइबी कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को दोषी ठहराने के बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख तय की है।

    अदालत ने अपने 320 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया है कि दोषसिद्धि किसी एक गवाह या एक साक्ष्य के आधार पर नहीं, बल्कि अभियोजन की ओर से पेश किए गए 91 गवाहों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वैज्ञानिक एवं इलेक्ट्रानिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट, वीडियो फुटेज, कॉल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला के आधार पर की गई। 

    अदालत ने यह भी माना कि घटनास्थल पर मौजूद भीड़ का उद्देश्य केवल हिंसा करना नहीं, बल्कि हिंदुओं को निशाना बनाना था।

    अदालत ने कहा कि अभियोजन ने विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए घटनाक्रम की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिससे अंकित शर्मा की हत्या की पूरी कड़ी स्थापित हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पुलिस अधिकारियों की गवाही, चिकित्सकीय और फोरेंसिक साक्ष्य तथा इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड का अलग-अलग और सामूहिक परीक्षण करने पर सभी एक-दूसरे की पुष्टि करते मिले। इसी आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा।

    किन साक्ष्यों पर सुनाया गया सजा

    फैसले में चांदबाग पुलिया के पास मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। अदालत ने कहा कि हिंसा, भीड़ और अंकित शर्मा पर हुए हमले को लेकर गवाहों ने जो घटनाक्रम बताया, वह वीडियो फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों से मेल खाता है। अदालत के अनुसार गवाहों के बयानों में घटना के मूल तथ्यों को लेकर पर्याप्त समानता है, जिससे अभियोजन का पक्ष मजबूत हुआ।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दंगों जैसी असाधारण परिस्थितियों में अलग-अलग गवाहों के बयानों में मामूली अंतर स्वाभाविक है। केवल ऐसे सामान्य विरोधाभासों के आधार पर पूरी गवाही को अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता।

    फैसले में उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि गवाही का मूल स्वरूप विश्वसनीय हो और उसे स्वतंत्र साक्ष्यों का समर्थन प्राप्त हो, तो छोटी-मोटी विसंगतियां दोषसिद्धि में बाधा नहीं बनतीं।

    ये गवाह बने भरोसेमंद

    वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भरोसा जताते हुए अदालत ने एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन की सीडीआर, लोकेशन संबंधी जानकारी और अन्य डिजिटल सामग्री का उल्लेख किया। अदालत ने चिकित्सकों, फोरेंसिक विशेषज्ञों, जांच अधिकारियों और मोबाइल कंपनियों के नोडल अधिकारियों की गवाही को भी विश्वसनीय माना।

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    सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गवाहों की विश्वसनीयता, पहचान, प्राथमिकी दर्ज होने में देरी, जांच की निष्पक्षता और इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों पर सवाल उठाए थे। अदालत ने इन सभी दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला अभियोजन के मामले को मजबूती प्रदान करती है।

    किसी एक गवाह या एक तथ्य को अलग करके नहीं, बल्कि सभी साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करने पर मामला संदेह से परे सिद्ध होता है।

    अदालत के अनुसार अभियोजन ने कुल 91 गवाह पेश किए, जिनमें प्रत्यक्षदर्शी, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक, फोरेंसिक विशेषज्ञ, जांच अधिकारी, मोबाइल कंपनियों के नोडल अधिकारी और अन्य औपचारिक गवाह शामिल थे। इन्हीं गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पांचों आरोपितों को दोषी ठहराया।

    अब 23 जुलाई को अदालत सजा के बिंदु पर अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसला सुनाएगी।

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