दिल्ली में 4.3 डिग्री तक कम हो सकता है तापमान, RMI और लोढ़ा फाउंडेशन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
आरएमआई इंडिया और लोढ़ा फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के प्लानिंग जोन-एफ में योजनाबद्ध शहरी सुधारों से औसत सतही तापमान 4.3 डिग्री तक कम किया जा ...और पढ़ें

रिपोर्ट जारी करते लेफ्ट से अक्षिमा घाटे, औन अब्दुल्ला, आशीष कुकरेजा, मृणालिनी श्रीवास्तव और डाॅ. देबोलिना कुंडू। जागरण
HighLights
दिल्ली के जोन-एफ में 4.3 डिग्री तापमान घटाने की संभावना
इमारतों पर हीट-रिफ्लेक्टिंग कोटिंग से 3.2 डिग्री कमी
पानी सोखने वाले फुटपाथ और व्यापक वृक्षारोपण प्रभावी उपाय
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। भीषण गर्मी व लगातार बढ़ते कंक्रीट के जंगलों के बीच राष्ट्रीय राजधानी के लिए राहत भरी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है।
आरएमआई इंडिया फाउंडेशन और लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा बुधवार को संयुक्त रूप से जारी “बिल्डिंग कूलर सिटी्स इन ए वार्मिंग वर्ल्ड” रिपोर्ट के अनुसार अगर योजनाबद्ध शहरी सुधार लागू किए जाएं तो दिल्ली के प्लानिंग जोन-एफ में औसत सतही तापमान 4.3 डिग्री तक कम किया जा सकता है।
शहरों में बढ़ते तापमान की असली वजह
दिल्ली सहित देश के प्रमुख शहर अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में दो से 10 डिग्री तक अधिक गर्म रहते हैं। कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें, वाहनों की आवाजाही और घटती हरियाली स्थानीय स्तर पर गर्मी को सोखकर शहर का तापमान बढ़ा देती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं 1976-2005 के मानकों की तुलना में लगभग चार गुना तेजी से बढ़ने का अनुमान है। तापमान में हर एक डिग्री की बढ़ोतरी के साथ एसी और कूलिंग से बिजली की मांग में भी पांच से सात गीगावाट की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2030 तक बढ़कर 47 गीगावाट तक पहुंच सकती है।
तापमान घटाने के तीन प्रभावी उपाय
रिपोर्ट में दिल्ली के प्लानिंग जोन-एफ पर किए गए विश्लेषण के आधार पर तीन प्रमुख तकनीकी समाधान सुझाए गए हैं। पहला, इमारतों की छतों और सड़कों पर हीट-रिफ्लेक्टिंग कोटिंग करने से अकेले 3.2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान घट सकता है।
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दूसरा, फुटपाथों व रास्तों को ऐसा बनाना जो पानी सोख सकें और नमी बनाए रखें। तीसरा, सार्वजनिक, मनोरंजक और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर पेड़-पौधे लगाना।
संस्थागत चुनौतियां और बजट की स्थिति
रिपोर्ट बताती है कि अत्यधिक गर्मी अभी भी 'आपदा प्रबंधन अधिनियम' के तहत राष्ट्रीय स्तर पर 'अधिसूचित आपदा' नहीं है। वर्तमान में हीट एक्शन प्लान का 43 प्रतिशत बजट तदर्थ स्थानीय आवंटन से आता है, जबकि राज्यों से केवल 19 प्रतिशत और केंद्र से 16 प्रतिशत बजट मिलता है।
राष्ट्रीय कार्यक्रम का प्रस्ताव
लोढा फाउंडेशन के कार्यक्रम निदेशक औन अब्दुल्ला बताते हैं कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के नेतृत्व में हीट मीटिगेशन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने का सुझाव दिया गया है, ताकि मास्टर प्लान और भवन निर्माण नियमों में ही गर्मी कम करने के प्रविधानों को शामिल किया जा सके।
क्या है जोन एफ
मास्टर प्लान के तहत दिल्ली को विभिन्न प्रशासनिक और नियोजन क्षेत्रों में बांटा गया है। इनमें से जोन-एफ दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के शहरी व विकसित क्षेत्रों से जुड़ा एक प्रमुख 'प्लानिंग जोन' है। इसमें मुख्य रूप से वसंत कुंज, महारानी बाग, लाजपत नगर, डिफेंस कालोनी और साउथ एक्सटेंशन सरीखे रिहायशी व व्यावसायिक क्षेत्र आते हैं।
गर्मी साइलेंट किलर बन चुकी है, जिसका असर एक ही शहर में रहने वाले लोगों पर भी एक जैसा नहीं पड़ता। गर्मी को एक खतरे के रूप में पहचानना पहला महत्वपूर्ण कदम था। लेकिन चूंकि अत्यधिक गर्मी हर क्षेत्र को प्रभावित करती है, इसलिए इसे एक प्रशासनिक चुनौती के रूप में लेना होगा - जिसके लिए विभागों, संस्थानों व सरकार के सभी स्तरों पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।
-मृणालिनी श्रीवास्तव (आपीएस), निदेशक, एनडीएमए
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