अवैध हथियार मामले में वीरेंद्र उर्फ काला बादल की चार साल की सजा बरकरार, दिल्ली कोर्ट ने खारिज की अपील
दोषी वीरेंद्र उर्फ काला बादल को अवैध देशी कट्टा और कारतूस रखने के मामले में सुनाई गई चार साल की कठोर कारावास की सजा दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बर ...और पढ़ें

वीरेंद्र उर्फ काला बादल की चार साल की सजा बरकरार।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अवैध देशी कट्टा और कारतूस रखने के मामले में दोषी वीरेंद्र उर्फ काला बादल को सुनाई गई चार साल के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी है।
अदालत ने कहा कि दोषी का आपराधिक इतिहास और बार-बार गंभीर अपराधों में उसकी संलिप्तता यह दर्शाती है कि उसमें दोबारा अपराध करने की प्रवृत्ति है। ऐसे में सजा में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ने अक्टूबर 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर पुलिस अधिकारियों की गवाही पर संदेह नहीं किया जा सकता कि वे पुलिस बल का हिस्सा हैं। यदि उनकी गवाही विश्वसनीय है तो स्वतंत्र गवाहों के अभाव में भी उस पर भरोसा किया जा सकता है।
अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने राहगीरों को गवाह बनाने का प्रयास किया था, लेकिन उन्होंने शामिल होने से इन्कार कर दिया। केवल वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी न होने से बरामदगी पर संदेह नहीं किया जा सकता।
अदालत ने सील में अंतर को महज टंकण त्रुटि बताया, जिससे बरामद हथियार की अभिरक्षा श्रृंखला प्रभावित नहीं होती।
भाई की हिरासत में मौत के कारण झूठा फंसाए जाने की दलील पर अदालत ने कहा कि यह तर्क पहली बार अपील के दौरान उठाया गया।
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ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान ऐसी कोई दलील नहीं दी गई थी, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। सजा बरकरार रखते हुए अदालत ने दोषी के आपराधिक रिकार्ड का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, वह पहले एनडीपीएस अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, चोरी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है।
अभियोजन के अनुसार, 17 जून 2019 को अपराध शाखा की टीम ने सूचना के आधार पर झरेड़ा गांव के पास वीरेंद्र को गिरफ्तार किया था। उसकी तलाशी के दौरान एक देसी कट्टा और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।
अपील में दोषी ने दावा किया था कि उसे व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते झूठा फंसाया गया है। उसका आरोप था कि पुलिस ने पहले उसके भाई की हिरासत में हत्या की थी। उसने यह भी कहा कि बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था और जब्त हथियार पर लगे सील में भी विसंगति है।