बोइंग से लेकर एयरबस तक, विमान हादसों की जांच में विदेशी एजेंसियों की क्यों पड़ती है जरूरत?
विमान दुर्घटना जांच में विदेशी विशेषज्ञों की मदद अंतरराष्ट्रीय नियमों और तकनीकी विशेषज्ञता के लिए अनिवार्य है। ब्लैक बॉक्स डेटा रिकवरी, मैन्युफैक्चरिं ...और पढ़ें

भारत की विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और विदेशी सुरक्षा एजेंसियों की मदद लेती है। एआई इमेज
HighLights
अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत विदेशी विशेषज्ञ अनिवार्य।
ब्लैक बॉक्स डेटा रिकवरी में मदद मिलती है।
मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट्स की पहचान में सहायक।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान में टर्बुलेंस और तकनीकी खराबी की जांच के लिए विदेशी विशेषज्ञों की टीम का भारत आना कोई नया मामला नहीं है। जब भी भारतीय सीमा में या भारतीय एयरलाइंस के किसी विमान में बड़ी तकनीकी गड़बड़ी या हादसा होता है, तो भारत की 'विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो' (एएआईबी) अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और विदेशी सुरक्षा एजेंसियों की मदद लेती है।
गुत्थी सुलझाने में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की भूमिका
इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के अध्याय 13 नियमों के तहत, जिस देश में विमान या उसका इंजन बनाया गया होता है, वहां की राष्ट्रीय जांच एजेंसियों को जांच प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाता है।
दुर्घटना या गंभीर तकनीकी खराबी के दौरान सबसे अहम सबूत विमान का ब्लैक बाक्स (फ्लाइट डेटा रिकाॅर्डर और काकपिट वायस रिकाॅर्डर) होता है। जब ब्लैक बाक्स पूरी तरह क्षतिग्रस्त या जल जाता है, तो उससे सटीक डेटा निकालने के लिए वैश्विक फाॅरेंसिक लैब्स का सहारा लिया जाता है।
अमेरिकी एजेंसी की मदद (बोइंग विमान मामले)
- अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) दुनिया की सबसे अत्याधुनिक एयरोस्पेस जांच एजेंसियों में से एक है। बोइंग विमानों से जुड़े हादसों या गंभीर मामलों में भारत हमेशा एनटीएसबी के विशेषज्ञों को ब्लैक बाक्स डिकोडिंग और फ्लाइट डेटा एनालिटिक्स के लिए आमंत्रित करता है।
यूरोपीय और फ्रांसीसी एजेंसियों का सहयोग (एयरबस मामले)
- एयरबस विमानों के फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर, हाइड्रोलिक सिस्टम और आटोपायलट साफ्टवेयर में आई खामियों का विश्लेषण करने के लिए फ्रांस की जांच एजेंसी बीईए और यूरोपीय एयरोस्पेस इंजीनियरों की विशेषज्ञ टीम हमेशा भारतीय टीमों के साथ मिलकर काम करती है।
इंजन निर्माताओं का रोल
विमानों में इस्तेमाल होने वाले राल्स-रायस (ब्रिटेन) या जनरल इलेक्ट्रिक (अमेरिका) जैसे इंजनों में खराबी आने पर इन देशों की जांच एजेंसियों के तकनीकी प्रतिनिधि सिमुलेशन स्टडीज के लिए भारत पहुंचते हैं।
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विदेशी जांच एजेंसियों को क्यों शामिल किया जाता है?
- अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाॅल और पारदर्शिता: दुनिया भर की उड़ानों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय उड्डयन नियमों के तहत विमान निर्माता देश को निष्पक्ष जांच का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।
- मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट्स की पहचान: विदेशी विशेषज्ञों की मदद से यह तय किया जाता है कि खराबी किसी एक विमान में थी या दुनिया भर में उड़ रहे उस पूरे बेड़े के डिजाइन या साफ्टवेयर में कोई कमी है।
- एडवांस फाॅरेंसिक लैब्स: अमेरिका और यूरोप के पास ऐसी विशेष लैब्स हैं, जो जले या टूटे हुए इलेक्ट्राॅनिक चिप्स से भी अंतिम सेकेंड्स का डेटा रिकवर कर लेती हैं।
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