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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 11, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    ‘एमवाई’ के मोह-जाल से बाहर निकली सपा! इन जातियों पर बढ़ाया फोकस, जानिए भाजपा को टक्कर देने के लिए क्या है रणनीति?

    Updated: Sat, 11 May 2024 09:42 AM (IST)

    UP Lok Sabha Election 2024 उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का परंपरागत रूप से मुस्लिम और यादवों का बड़ा वोटबेंक रहा है जिनके सहारे पार्टी सत्ता के शी ...और पढ़ें

    Lok Sabha Election 2024: सपा ने इस बार गैर यादव पिछड़ी जातियों पर फोकस बढ़ाया है।
    Lok Sabha Election 2024: सपा ने इस बार गैर यादव पिछड़ी जातियों पर फोकस बढ़ाया है।

    शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। मुस्लिम, यादव (एमवाई) समीकरण के जरिए उत्तर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने वाली समाजवादी पार्टी ने बदले राजनीतिक हालात को देखते हुए अपनी रणनीति बदल ली है। धर्म व जाति के खांचों में बंटी प्रदेश की राजनीति में इस बार सपा ने ‘एमवाई’ के मोहजाल से बाहर निकल कर गैर यादव पिछड़ी जातियों पर फोकस बढ़ाया है। कुर्मी के साथ ही मौर्य-शाक्य-सैनी-कुशवाहा जातियों को खूब टिकट दिए हैं।

    सपा की नजर दलित वोटबैंक पर भी है। यही कारण है कि इस बार उसने पासी व जाटव दोनों बिरादरी के प्रत्याशियों को पिछले बार की तुलना में काफी अधिक टिकट दिए हैं। एक समय था, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा का ‘एमवाई’ समीकरण हिट हो गया था, किंतु आज राजनीतिक हालात बदल गए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इसे समझते हुए अब नई जातीय गोलबंदी में जुटे हैं।

    आईएनडीआईए गठबंधन

    इस बार प्रदेश में सपा व कांग्रेस मिलकर आईएनडीआईए गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं। सपा प्रदेश की 62, कांग्रेस 17 व तृणमूल कांग्रेस एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। सपा अब तक 61 उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। अब उसे केवल राबर्ट्सगंज का प्रत्याशी घोषित करना बाकी है। यह सुरक्षित सीट है। सपा ने इस बार सर्वाधिक 10 टिकट कुर्मी व पटेल बिरादरी को दिए हैं।

    वर्ष 2019 के चुनाव में सपा 37 सीटों पर लड़ी थी और उसने केवल तीन टिकट इस बिरादरी को दिए गए थे। यूं तो सपा अपने गठन के समय से ही कुर्मी समाज को साथ लेकर चलती रही है। मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी बेनी प्रसाद वर्मा पार्टी में कुर्मियों के बड़े नेता थे। पिछले कुछ समय से पार्टी में कुर्मी नेताओं को कम टिकट मिल रहे थे। सपा ने इस बार फिर कुर्मी बिरादरी को साधने के लिए पिछड़ी जातियों में सबसे अधिक टिकट उन्हें ही दिए हैं।

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    पीडीए की रणनीति

    ‘पीडीए’ रणनीति पर आगे बढ़ रही सपा ने इस बार 16 प्रत्याशी दलित उतारे हैं। राबर्ट्सगंज का टिकट आने के बाद यह संख्या 17 हो जाएगी। मेरठ से पूर्व मेयर सुनीता वर्मा मैदान में हैं, जबकि अयोध्या से अवधेश प्रसाद को टिकट दिया है। सपा ने इस बार छह जाटव नेताओं को भी टिकट दिया है। जाटव बसपा के कोर वोटबैंक माने जाते हैं। सपा ने अपने मजबूत वोट बैंक ‘एमवाई’ के प्रत्याशियों को भी कम टिकट दिए हैं।

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    पार्टी ने इस बार केवल पांच यादव व चार मुस्लिमों को टिकट दिए हैं। सपा ने इस बार परिवार के बाहर एक भी यादव को टिकट नहीं दिया है। पिछले चुनाव में 37 सीटों में से 10 यादवों को टिकट दिए गए थे। हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण रोकने को सपा ने मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर हिंदू उम्मीदवार उतारे हैं। गैर यादव पिछड़ी जातियों में इस बार सपा ने निषाद व बिंद समाज के तीन प्रत्याशियों को भी टिकट दिया है।

    इन समुदायों को भी दिया टिकट

    जाट, गुर्जर, राजभर, पाल व लोधी समुदाय से एक-एक टिकट दिया गया है। पाल समाज को साधने के लिए ही इस बार प्रयागराज निवासी श्याम लाल पाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। सपा ने बागपत, कैसरगंज, डुमरियागंज व बलिया में ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट दिया है। धौरहरा व चंदौली में क्षत्रिय प्रत्याशियों को उतारा है।

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