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    50 हफ्तों तक थिएटर्स में चली थी Amitabh Bachchan की ये ब्लॉकबस्टर फिल्म, लोगों ने यश चोपड़ा को दी थी चेतावनी

    Updated: Sun, 22 Feb 2026 12:59 PM (IST)

    अमिताभ बच्चन की ब्लॉकबस्टर फिल्म ने 50 हफ्तों तक सिनेमाघरों में राज किया था। जब फिल्म बनाई जा रही थी, तब लोगों ने प्रोड्यूसर को चेतावनी दी थी कि यह नह ...और पढ़ें

    सुपरहिट रही थी अमिताभ बच्चन की ये फिल्म। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

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    यूनुस खास, मुंबई। ये वो जमाना था जब वेलेंटाइन डे की धूम नहीं थी। हर दिन प्यार का दिन था, कोई दिन प्यार के बाजार का दिन नहीं था। ये 50 बरस पहले की बात है। 27 फरवरी 1976 को प्रदर्शित हुई यश चोपड़ा की फिल्म ‘कभी कभी’ (Kabhi Kabhie) ऐसे ही प्यार की निशानी है। यूनुस खान फिल्म ‘कभी कभी’ के अनकहे किस्से सुना रहे हैं। 

    वर्ष 1959 में यश चोपड़ा ने अपने बड़े भाई बलदेव राज चोपड़ा (Raj Chopra) की छत्रछाया में ‘धूल का फूल’ से निर्देशन की दुनिया में पहला कदम रखा था। 1975 आते-आते वो फिल्म जगत के दिग्गज निर्देशक बन चुके थे।

    उनके हिस्से में ‘दाग’, ‘दीवार’, ‘इत्तेफाक’ जैसी फिल्में थीं। बल्कि खास बात ये है कि वर्ष 1973 में उन्होंने अपना बैनर शुरू किया था, ‘यशराज फिल्म्स’ जिसकी पहली फिल्म थी ‘दाग’।

    नज्म से आया 'कभी कभी' बनाने का आइडिया

    ‘कभी कभी’ बनने की एक दिलचस्प कहानी है। यश चोपड़ा के मुताबिक, ‘दाग’ बनाने के दौरान साहिर (लुधियानवी) की एक नज्म पढ़ते हुए उन्हें ‘कभी कभी’ का आइडिया आया था। प्यार में पड़े दो लोग साथ जीवन नहीं बिता पाते और फिर तब मिलते हैं, जब उनके बच्चे भी वयस्क हो चुके हैं। इस विचार को यश चोपड़ा की पत्नी पामेला चोपड़ा ने विस्तार दिया था।

    50 हफ्तों तक थिएटर्स में चली थी फिल्म

    ‘कभी-कभी’ 27 फरवरी 1976 को मुंबई की मेट्रो टॉकीज में रिलीज हुई थी। 26 हफ्ते वहां चलने के बाद ये फिल्म ‘मराठा मंदिर’ में मेटिनी शो में दिखाई जाने लगी। इस तरह यह फिल्म लगातार 50 हफ्ते यानी तकरीबन एक साल तक चलती रही।

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    फिल्म बनाने से पहले मेकर्स को मिली थी चेतावनी

    हालांकि जब ‘कभी कभी’ बन रही थी तो फिल्म के जानकारों ने यश चोपड़ा को ताकीद (चेतावनी) की थी कि अमिताभ बच्चन ‘एंग्री यंग मैन’ हैं- उनकी रूमानी फिल्म चलेगी- इसमें शक है। पर सारे अनुमानों को गलत साबित करते हुए ‘कभी कभी’ ने न सिर्फ कामयाबी की एक नई इबारत रची बल्कि इसने एक ‘कल्ट’ फिल्म का स्टेटस भी हासिल किया।

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    यहां हम ‘कभी कभी’ की कहानी नहीं बताएंगे। यह मानते हुए कि या तो आपने यह फिल्म कई बार देखी होगी या फिर इस लेख को पढ़ने के बाद इसे देखने का इरादा बनाएंगे।

    प्रोड्यूसर की पत्नी ने लिखी थी कहानी

    ‘कभी कभी’ जहां एक तरफ अमित और पूजा की अधूरी प्रेम की कहानी है, वहीं दूसरी तरफ एक बेटी के अपनी मां को खोजने की बेकरारी की कहानी भी है। यश चोपड़ा ने एक साक्षात्कार में बताया था कि ‘कभी कभी’ में त्याग दी गई बेटी का अपनी मां को खोजने वाला पूरा सूत्र पामेला जी के मन की उपज था। ‘कभी-कभी’ के संवाद लिखे थे जाने-माने लेखक सागर सरहदी ने। ये फिल्म अपने शायराना संवादों के लिए भी याद की जाती है।

    'अनलकी' के ठप्पे से नहीं डरे प्रोड्यूसर

    इस फिल्म के लिए बतौर संगीतकार खैयाम को चुना गया था। ये वो दौर था जब उन पर ‘अनलकी’ होने का टैग चिपका था। यश चोपड़ा से कहा जा रहा था कि ये फैसला भारी पड़ जाएगा पर उन्होंने ठान लिया था कि संगीत तो खैयाम ही देंगे। साहिर लुधियानवी की मूल नज्म की पंक्तियां कुछ यूं हैं- ‘कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि जिंदगी तेरी जुल्फों की नर्म छांव में गुजरने पाती तो शादाब हो भी सकती थी’।

    'कभी कभी' ने दिए सुपरहिट गाने

    जाहिर है कि फिल्म के लिए उन्होंने इसे दोबारा लिखा था। इस फिल्म में इसके दो संस्करण हैं। एक सोलो और एक डुएट।साहिर लुधियानवी की ये नज्म संगीतकार खय्याम ने इसी फिल्म के लिए सुधा मल्होत्रा और गीता राय की आवाज में रिकार्ड की थी। अफसोस की बात ये है कि वह संस्करण अब कहीं उपलब्ध नहीं है। ‘कभी कभी’ की एक बड़ी ताकत थी इस फिल्म के गाने।

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    खैयाम रूहानी संगीतकार थे। उन्होंने इन गानों में अपनी रूह उड़ेल दी थी। शीर्षक गीत और ‘मैं पल दो पल का शायर हूं’ तो नरम- रूमानी गाने हैं, पर इस फिल्म में खय्यामके मिजाज से अलग ‘तेरा फूलों जैसा रंग’ जैसा मस्ती भरा गाना भी है। मुझे सबसे प्रिय है ‘साडा चिडियां दा चंबा वे’ यानी ‘सुर्ख जोड़े की ये जगमगाहट’, जिसमें आपको लता जी के अलावा जगजीत कौर और यश जी की पत्नी पामेला चोपड़ा की आवाजें भी सुनाई पड़ती हैं।

    ...और हां ‘मेरे घर आई एक नन्हीं परी’ तो अब घर में पैदा होने वाली बेटी के लिए एंथम बन चुका है। ‘कभी कभी’ को सेलुलाइड पर रची एक कविता कहा जाए तो गलत नहीं होगा। आपने देखी है या नहीं?

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    सालों बाद राखी का कमबैक रहा था शानदार

    ‘कभी कभी’ के लिए खैयाम को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार, साहिर लुधियानवी को सर्वश्रेष्ठ गीतकार, मुकेश को सर्वश्रेष्ठ गायक और सागर सरहदी को मिला था सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फिल्मफेयर पुरस्कार। ‘कभी-कभी’ का आइडिया यश चोपड़ा ने राखी को ध्यान में रखकर ही सोचा था। इस बीच राखी ने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया था।

    Kabhi Kabhi Film

    किसी तरह यश जी ने हालात संभाले और इस तरह कुछ साल फिल्मों में गायब रहने के बाद राखी इस फिल्म के जरिए रूपहले पर्दे पर फिर नजर आईं।

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