यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 13, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Ayushmann Khurrana: Doctor G से मजबूत सोशल मैसेज दे रहे आयुष्मान खुराना, इन फिल्मों ने भी सोचने पर किया मजबूर
Ayushmann Khurrana Films with Social Message आयुष्मान खुराना इंडस्ट्री के उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जो अपनी फिल्म के जरिये एक अलग छाप छोड़ने में ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जेएनएन। Ayushmann Khurrana Films Giving Social Message: आयुष्मान खुराना ने विकी डोनर नाम की फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। तब से लेकर अब तक उन्होंने इंडस्ट्री में लंबा सफर तय कर लिया है। आयुष्मान खुराना ने अब तक जो भी फिल्में की हैं, उनमें कोई ना कोई सोशल मैसेज छुपा होता है। उनकी मूवीज को देखकर यह कहा जा सकता है कि, कोई भी फिल्म तभी बड़ी होती है जब वह किसी मुद्दे को समाज में उजागर करती है, और लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। इसी सोच पर आयुष्मान खुराना की फिल्म 'डॉक्टर जी' भी बनी है, जिसमें समाज को देने के लिए नयापन और संदेश कूट-कूट कर भरा है।
14 अक्टूबर को यह फिल्म रिलीज हो रही है ऐसे में आइए जानते हैं आयुष्मान खुराना की अब तक की सारी फिल्मों के बारे में जिसमें किसी भी रूढ़िवादी मुद्दे को अलग ढंग से दिखाया गया है।
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डॉक्टर जी
जंगली पिक्चर के बैनर तले बनी कॉमेडी ड्रामा फिल्म 'डॉक्टर जी' में जी का मतलब डॉक्टर को सम्मान देने के साथ-साथ, गायनोकोलॉजिस्ट की परिभाषा को बदलना भी है। इसमें आयुष्मान खुराना के साथ रकुलप्रीत सिंह और शैफाली शाह लीड रोल में हैं। फिल्म में आयुष्मान खुराना एक मेल गायनोकोलॉजिस्ट के किरदार में नजर आएंगे, जो अपने काम के जरिए इस प्रोफेशन की परिभाषा को अलग ढंग से समझाने का प्रयास करता है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शक इसके रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

(Photo Credit: Ayushmann Khurrana Instagram)
बधाई हो
2018 में रिलीज हुई है फिल्म आज भी इस बात को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या एक उम्र के बाद जिंदगी को एंजॉय करने के मायने बदल जाते हैं। क्या बढ़ती उम्र में बच्चा पैदा करना गलत है? एक दर्शक के लिए अच्छा सिनेमा वही होता है जब फिल्म को एक मिनट के लिए भी खुद को अलग न कर सके। 'बधाई हो' भी कुछ इसी तरह की फिल्म है।

(Photo Credit: Badhaai Ho Twitter Page)
बाला
खूबसूरत चेहरे से भरी इस दुनिया में 'बाला' वह फिल्म है, जिसमें आयुष्मान खुराना ने जवान गंजे व्यक्ति का किरदार निभाया था। फिल्म में भूमि पेडनेकर भी हैं, जो काली लड़की के रोल में हैं। 'बाला' में संदेश दिया गया है कि व्यक्ति की असली पहचान उसकी खूबसूरती से नहीं बल्कि सीरत से होती है। साथ ही किसी भी व्यक्ति को अपने रंग और रूप में सहज महसूस करते हुए समाज में गर्व से जीना चाहिए।
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आर्टिकल 15
धर्म, नस्ल, जाति, जन्म स्थान या इनमें से किसी भी आधार पर राज्य अपने किसी भी नागरिक से कोई भेदभाव नहीं करेगा। यह मैं नहीं संविधान कह रहा है। अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित आयुष्मान खुराना की इस फिल्म का यह डायलॉग कहने के लिए तो बस कुछ शब्द हैं, लेकिन इनके असल मायने बहुत बड़ा संदेश देते हैं।