विभाजन के खौफनाक सच को दिखाती हैं ये फिल्में-मिनी सीरीज, Batwara 1947 से पहले जरूर देखें 5 मास्टरपीस
बंटवारा 1947 आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, जिसमें हिंदुस्तान और पाकिस्तान बनने की कहानी दिखाई गई है। इस फिल्म से पहले वो पांच फिल्में देखें, जिनमें मानव त्रासदी को बड़ी डिटेल्स के साथ फिल्मों में उतारा गया।

बंटवारे पर बनी हैं ये 5 फिल्में-मिनी टीवी सीरीज/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 1947 एक ऐसा साल जिसे भारत और पाकिस्तान के लोग कभी नहीं भूल सकते। यह वो साल था जब दोनों देशों का बंटवारा हुआ और हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी को अपने पुश्तैनी घरों को छोड़ना पड़ा। सिनेमा में भी समय-समय पर दोनों देशों के बीच हुए बंटवारे को अलग-अलग तरह से दिखाया गया।
इस पर कई ऐतिहासिक फिल्में बनी, मिनी सीरीज और डॉक्यूमेंट्री भी आई। हाल ही में सनी देओल की 14 अगस्त को रिलीज फिल्म 'बंटवारा: 1947' भी पाकिस्तान और इंडिया के विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी है। आज हम आपको उन पांच बेस्ट क्रिएशन के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने बंटवारे और मानव त्रासदी को अलग-अलग नजरिए से स्क्रीन पर उतारा।
गरम हवा
एम एस सथ्यू की 1973 में रिलीज हुई फिल्म 'गरम हवा' बंटवारे के बाद के हालातों को दिखाती सबसे पावरफुल फिल्मों में से एक मानी जाती है। बंटवारे के ठीक बाद के समय को दिखाती मूवी की कहानी सलीम मिर्जा (बलराज साहनी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो नॉर्थ इंडिया में रहने वाला एक मुस्लिम बिजनेसमैन होता है और पाकिस्तान जाने के बजाय वह इंडिया में ही रहना चुनता है।
वह ये फैसला भारत में अपने पुश्तैनी घर की वजह से लेते हैं, लेकिन बाद में वही उनके सामने आर्थिक मुश्किलों की वजह बन जाता है, क्योंकि पड़ोसी उन्हें शक की निगाहों से देखते हैं। इस फिल्म को कान फिल्म फेस्टिवल में 'पाल्मे डी'ओर के लिए नॉमिनेट किया गया था।
तमस
गोविंद निहलानी की साल 1988 में आई टेलीविजन मिनी सीरीज 'तमस', भीष्म साहनी की मशहूर नॉवेल पर आधारित है और जो बंटवारे के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा की कहानी को बताती है। यह 1947 के रावलपिंडी दंगों की बीती घटनाओं को बखूबी दर्शाती है। फिल्म की कहानी की शुरुआत सफाई कर्मचारी नत्थू से होती है, जिसे इलाके का मुस्लिम नेता सुअर को मारने के लिए मनाता है।
नेता नथू को कहता है कि ये काम जानवरों के इलाज के मकसद से किया जा रहा है, लेकिन जब एक मस्जिद के बाहर जानवर की बॉडी मिलती है, तो सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठती है। मिनी सीरीज में नत्थू का किरदार ओम पुरी ने निभाया है।
1947 अर्थ
दीपा मेहता के निर्देशन में बनी आमिर खान स्टारर फिल्म 1947 अर्थ बंटवारे के दौरान महिलाओं के नजरिए को पेश करती है। फिल्म की कहानी बाप्सी सिधवा के नॉवेल क्रैकिंग इंडिया पर आधारित है। 1998 में रिलीज हुई ये फिल्म 1947 में लाहौर की कहानी है।
मूवी को 8 साल की पारसी लड़की लेनी की नजरों से दिखाया गया है, जिसकी दुनिया में तब तूफान आता है, जब उसके आसपास की राजनीतिक उथल-पुथल का इम्पेक्ट उसके परिवार और दोस्तों पर पड़ता है। फिल्म में नंदिता दास, राहुल खन्ना और आमिर खान जैसे सितारे नजर आए थे।
ट्रेन टू पाकिस्तान
पामेला रुक्स की साल 1998 में रिलीज हुई फिल्म 'ट्रेन टू पाकिस्तान' खुश्वाहत सिंह की नॉवेल पर आधारित है, जिसमें पंजाब के एक काल्पनिक गांव 'मानो माजरा' की कहानी दिखाई गई है। फिल्म में एक छोटा से समुदाय के जरिए कैसे उपमहाद्वीप में उथल-पुथल मचती है। फिल्म में यही दिखाया गया है।
फिल्म में दिखाया गया है कि 'मानो माजरा' गांव में एक सिखों की बड़ी आबादी और मुस्लिम समुदाय का छोटे से हिस्से में घर है, जहां वह आपस में मिल-जुलकर रहते हैं, लेकिन बंटवारे के बाद धीरे-धीरे उनका मेल-जोल खत्म हो जाता है। पाकिस्तान से भागते समय मारे गए सिखों की लाशों से भरी ट्रेन देख हिंसा की आग जला देता है।
पार्टिशन: द डे इंडिया बर्नड
साल 2007 में आई बीबीसी की फिल्म 'पार्टिशन: द डे इंडिया बर्नड' में बंटवारे के समय ही एक-एक हकीकत को फिल्म में उतारा गया है। रिकार्डो पोलैक के निर्देशन में बनी यह डॉक्यूमेंट्री, भारत और पाकिस्तान के बनने के बाद हुए बड़े पैमाने पर हिंसा और अपना घर छोड़ने के बाद लोगों के हालातों को बखूबी दिखाती है।
बंटवारे का अनुभव करने वाले लोगों की आपबीती के जरिए, ये डॉक्यूमेंट्री एक ऐसी दुनिया को जिंदा करती है, जो कई पीढ़ी से साथ रहने वाले समुदाय अचानक राजनीतिक सीमा से बंट जाते हैं।
यह भी पढ़ें- मां-टीचर की पहली पसंद, 64 साल पुराना वो गीत जो याद दिला देता है बचपन;15 अगस्त पर हर बच्चे ने गाया होगा ये कल्ट गाना
यह भी पढ़ें- सुष्मिता का डांस और रेत में ऋतिक को ढूंढना...महबूब मेरे' गाने पर करिश्मा कपूर ने खोला सालों पुराना अनसुना राज

