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धोती वाले 'भुवन' से हैंडपंप उखाड़ने वाले 'तारा सिंह', जब 26 साल पहले आज ही के दिन Sunny-Aamir में हुआ महा मुकाबला

By Smita SrivastavaEdited By: Surabhi Shukla
Published: Sat, 13 Jun 2026 08:54 PM (IST)

25 साल बाद भी ‘गदर’ व ‘लगान’ की लोकप्रियता कायम है। गदर ने देशभक्ति की भावनाओं को छूते हुए कामयाबी ...और पढ़ें

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स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई: बाक्स आफिस पर दो बड़े सितारों की फिल्मों का एकसाथ रिलीज होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन 15 जून 2001 का मुकाबला खास था। उस दिन सनी देओल और अमीषा पटेल अभिनीत ‘गदर: एक प्रेम कथा’ (Gadar: Ek Prem Katha) और आमिर खान की ‘लगान’ (Lagaan) सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई। दोनों फिल्‍मों ने न सिर्फ दिल जीता बल्कि हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपनी स्‍थायी जगह भी बनाई।

‘लगान’ तो हिंदी सिनेमा के लिए वैश्विक पहचान का माध्यम बनी। आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म को उस वर्ष आस्कर पुरस्कारों में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा गया था। फिल्म सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में अंतिम पांच नामांकित फिल्मों तक पहुंची, लेकिन पुरस्कार जीतने से चूक गई।

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हालांकि लगान को बनाने की राहें आसान नहीं रही। उसकी पहली वजह थी कि निर्देशक के रूप में आशुतोष का पिछला रिकार्ड सफल नहीं रहा था। उनकी फिल्में पहला नशा और बाजी बाक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई थीं। दूसरा लगान की संवेदना और उसका परिवेश मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा से बिल्कुल अलग था। तब पीरियड फिल्‍में नहीं बन रही थी। हीरो को धोती में दिखाने की कोई कल्‍पना नहीं कर सकता था।

Lgaan (2)

भुवन की जीत का पॉपुलर शॉट

बाजार की नब्ज पहचानने का दावा करने वाले निर्माता आशुतोष के सामने अजीबोगरीब सुझाव और शर्तें रखते थे। एक निर्माता ने तो यहां तक सुझाव दिया कि फिल्म का अंत और अधिक रोमांचक बनाने के लिए भुवन को जीत का शाट लगाने के बाद क्रिकेट के स्टंप से कैप्टन रसेल पर हमला कर देना चाहिए। फिल्म उद्योग का एक बड़ा वर्ग इस पटकथा में कोई दिलचस्पी ही नहीं ले रहा था। बालीवुड में अधिकांश मामलों में सितारे पहले आते हैं और कहानी बाद में। कुछ चुनिंदा फिल्‍ममेकर्स को छोड़ दें तो किसी भी बड़े बजट की फिल्म के लिए एक या उससे अधिक बड़े सितारों की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है।

उनके बिना फिल्म के लिए आवश्यक वित्त जुटाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में आशुतोष केवल अपनी पटकथा की ताकत के भरोसे एक फिल्म बनाने की कोशिश कर रहे थे। यह कहानी आमिर के दिमाग में बस चुकी थी। उन्‍होंने उसे कई बार सुना। बचपन में आमिर ने अपने निर्माता पिता ताहिर हुसैन को कई मुश्किलों और तनावों से गुजरते हुए उन्होंने देखा था।

आमिर खान ने तोड़ी प्रतिज्ञा

उन्‍होंने निर्माता न बनने का फैसला किया था। आमिर जानते थे कि लगान को बनाने में भारी खर्च आएगा और आर्थिक रूप से यह फिल्म उन्हें बर्बाद भी कर सकती है। आखिर में आमिर ने आशुतोष से कहा कि वह लगान की कहानी उनके माता-पिता, उस समय उनकी पत्नी रीना और फिल्‍म फाइनेंसर झामू सुगंध को सुनाएं। अगर उन्‍हें पसंद आई तो फिल्म निर्माण से दूर रहने की अपनी आजीवन प्रतिज्ञा को तोड़ने के लिए तैयार हो जाएंगे। वैसा ही हुआ।

पहले गोविंदा को ऑफर हुई थी गदर

हालांकि यह करने में दो साल लग गए। उधर ‘गदर’ के लिए निर्देशक अनिल शर्मा की पहली पसंद सनी देओल नहीं थे। उनसे पहले यह भूमिका कई चर्चित कलाकारों को आफर की गई, लेकिन उन्‍होंने स्‍वीकार नहीं किया। इनमें गोविंदा का नाम भी शामिल रहा। उस समय गोविंदा की छवि रोमांटिक और कामेडी हीरो की थी, इसलिए यह किरदार उनके फिल्मी व्यक्तित्व से मेल नहीं खाता था। उन्‍होंने अस्‍वीकार कर दिया।  जबकि सनी देओल को कहानी दिलचस्‍प लगी और उन्‍होंने तारा सिंह के पात्र को अमर बना दिया। वही सकीना की भूमिका के लिए काजोल, सुष्मिता सेन समेत कई अभिनेत्रियों से बात हुई, लेकिन बात नहीं बनी।

Lgaan (1)

आखिरकार उन्‍होंने नवोदित अभिनेत्री अमीषा पटेल को चुना। फिल्म में सनी देओल के बेटे चरणजीत की भूमिका निर्देशक अनिल शर्मा के बेटे उत्कर्ष शर्मा ने निभाई थी। उत्‍कर्ष तब पांच साल के थे। गदर का आधार रामायण थी कि राम सीता को लेने लंका गए। ‘गदर’ का हैंडपंप उखाड़ने वाला दृश्य आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित दृश्यों में गिना जाता है। दरअसल, यह सीन तारा सिंह के चरम गुस्‍से का प्रतीक था। तब वीएफएक्‍स की सुविधा नहीं था। इस फिल्‍म का क्‍लाइमेक्‍स शूट करना अनिल की जिंदगी का सबसे कठिन क्षण रहा था।

कैसे शूट हुआ था जोखिम भरा सीन?

उन्‍होंने बाडी डबल लेने से मना कर दिया था। करीब 30 किलोमीटर की गति से ट्रेन जानी थी और सनी, अमीषा और विवेक शौक को दौड़ना था, सनी के कंधे पर उत्‍कर्ष था और चॉपर में कैमरा था और तीन-चार कैमरे थे। देखते-देखते उन्‍होंने चार बोगी पार की और ये ट्रेन जब चलना शुरू हुई, उन्होंने दौड़ना शुरू किया। यह काफी जोखिम भरा फैसला था।

शाट के दौरान अनिल खुद घबरा गए थे और कुछ पलों के लिए आंखे बंद कर ली थी। दरअसल, अगर सनी का पांव जरा सा भी इधर-उधर होता तो बड़ी दुर्घटना हो जाती। ट्रेन रुकते-रुकते सनी ने पांव एकदम जकड़ लिया था। उत्‍कर्ष ने उन्‍हें ऐसे पकड़ा हुआ था जैसे बंदर का बच्चा अपनी मां को पकड़ लेता है। बाद में सनी ने बताया था कि जब ट्रेन रुक रही थी तो उन्होंने पूरी ताकत लगा दी थी। हालांकि जब फिल्‍म रिलीज हुई तो पहली समीक्षा अनिल ने पढ़ी थी जिसका शीर्षक था गटर एक प्रेमकथा, लेकिन बाक्‍स आफिस पर उसने गदर मचा दिया था।

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