पीरियड्स में झाड़ियों के पीछे बदलते थे पैड्स, चादर लेकर खड़े रहते थे लोग, जया बच्चन ने बताया कैसे थे हालात
आज के समय में एक्ट्रेसेस के पास भले ही सारी सुविधा हो, लेकिन टाइम ऐसा था, जब उनके पास कोई वैनिटी वैन नहीं थीं। आउटडोर शूट्स पर तो 60-70 के दशक की एक्ट ...और पढ़ें
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जया बच्चन ने एक्ट्रेसेस के पीरियड्स के दिनों का शेयर किया किस्सा/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में फिल्मी सितारों के पास हर चीज की सुविधा है। जब भी एक्टर्स शूट से थक जाते हैं, तो अपनी वैनिटी वैन में एसी (AC) ऑन करके थोड़ी देर थोड़ा सुस्ता लेते हैं। उस वैनिटी वैन में उनके लिए हर चीज की सुविधा होती है।
हालांकि, 1991 से पहले समय काफी अलग था। पूनम ढिल्लों के फर्स्ट टाइम वैनिटी का कल्चर लाने से पहले एक्ट्रेसेस को सेट पर बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। खास तौर पर अभिनेत्रियों को कपड़े चेंज करने में दिक्कत आती थीं। दिग्गज अभिनेत्री जया बच्चन ने आउटडोर शूट करते हुए पीरियड के दिनों का एक ऐसा ही थ्रोबैक किस्सा सुनाया था, जिसे सुनकर उनकी नाती नव्या हैरान रह गई थीं।
झाड़ियों के पीछे अभिनेत्रियां बदलती थीं पैड्स
'गुड्डी' एक्ट्रेस जया बच्चन ने नाती नव्या नंदा के शो में एक ऐसा ही सेट पर असहज करने वाले मोमेंट के बारे में बताया था। जब वह नव्या नंदा के शो 'व्हाट द हेल नव्या' में खास मेहमान बनकर आई थीं, तो उन्होंने 70-80 के दशक की अभिनेत्रियों के शूटिंग के दौरान रियल संघर्ष के बारे में उन्हें समझाया था।
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जया ने शूटिंग सेट पर अपने टीनेज समय को याद करते हुए कहा, "जब हम आउटडोर शूट्स करते थे, तब हमारे पास वैनिटी वैन्स नहीं होती थी। हमें झाड़ियों के पीछे ही कपड़े बदलने पड़ते थे, जहां 4 से 5 लोग चादर के साथ खड़े होते । हर चीज वैसे ही करनी पड़ती थी। आउटडोर शूट्स पर ज्यादा टॉयलेट्स भी नहीं बने थे। यह बहुत ही असुविधाजनक और शर्मनाक था। तब एक्ट्रेसेस एक बार में 3-4 सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करती थीं और अपने साथ एक प्लास्टिक बैग कैरी करती थीं। वह उस बैग को बास्केट में रखती थीं, ताकि जब वह घर जाएं तो उसे फेंक सके।"
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4-5 सैनिटरी पैड्स के साथ बैठना होता है मुश्किल
जया बच्चन ने नव्या नंदा के साथ थ्रो-बैक इंटरव्यू में आगे कहा था, "हमारे समय में आज वाले सैनिटरी पैड्स नहीं होते थे, जो चिपक जाए। सोचों उस समय चार-पांच पैड्स लगाकर बैठना कितना ज्यादा मुश्किल होता था। वह बहुत ही अनकम्फर्टेबल कर देता था। आपको दोनों एंड्स पर बेल्ट लगानी पड़ती थी, क्योंकि पैड में लूप होते थे, उसे टेप से स्टिक करना पड़ता था। वह बहुत ही बुरा समय था।"
जया बच्चन के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने साल 1963 में बंगाली फिल्म 'महानगर' के साथ एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था। उनकी साल 1971 में रिलीज हुई पहली हिंदी फिल्म 'गुड्डी' एक बड़ी हिट साबित हुई थी। इसके बाद उन्होंने 'उपहार', 'बावर्ची', 'जंजीर' जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया।