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    Fathers Day 2026: 'अकेले हैं तो क्या गम है', बच्चों के लिए सारे फर्ज निभाते हैं ये सितारे; अधूरी नहीं है परवरिश

    By Priyanka SinghEdited By: Tanya Arora
    Updated: Sun, 21 Jun 2026 08:30 AM (IST)

    सिंगल पैरेंटिंग को अक्सर मुश्किल माना जाता है। हालांकि, बॉलीवुड में कई सितारे पिता हैं, जो न सिर्फ सिंगल पैरेंट बने, बल्कि उन्होंने अपने बच्चों की परव ...और पढ़ें

    बॉलीवुड  में इन सितारों ने अकेले की बच्चों की पैरेंटिंग/ फोटो- Instagram

    बॉलीवुड में इन सितारों ने अकेले की बच्चों की पैरेंटिंग/ फोटो- Instagram

    HighLights

    1. सिंगल पिता बनकर इन सितारों ने की बच्चों की परवरिश

    2. कभी स्कूल मीटिंग्स में हुई हिचकिचाहट

    3. बच्चों के प्रति हमेशा समर्पित रहे बॉलीवुड के फादर्स

    प्रियंका सिंह,मुंबई। हिंदी सिनेमा में अभिनेता तुषार कपूर, राहुल देव, राहुल बोस, फिल्मकार करण जौहर समेत कई सिंगल पिता हैं, जिन्होंने साबित किया कि बच्चों की परवरिश वह पूरे समर्पण के साथ कर सकते हैं। फादर्स डे के अवसर पर इन सिंगल फादर्स ने अपने अनुभव, चुनौतियां पर बात की, जिसने उन्हें एक बेहतर पिता बनाया।

    घर लौटने का मकसद है-तुषार कपूर 

    अभिनेता तुषार कपूर साल 2016 में जब 40 साल की उम्र में सरोगेसी के जरिए बेटे लक्ष्य के पिता बने, तो वह ट्रेंड सेटर बने, क्योंकि यह बोल्ड निर्णय था। तुषार कहते हैं कि 40 साल का होते-होते मैं अपने काम में ही लगा रहता था। पिता बनने के बाद लगा की संपूर्ण हो गया हूं। घर लौटने का मकसद है क्योंकि टाइम मैनेजमेंट के साथ उसी काम को करने लगा। मैं न पार्टी करता हूं, न बाहर जाता हूं। मेरा बेटा ही मेरा दोस्त है। मुझे लगता है कि बच्चे की परवरिश किसी युगल के लिए भी सिंगल पिता जितनी ही कठिन है।

    हमारे समाज में अक्सर पिता व्यस्त ही होते हैं और जिम्मेदारी मां पर होती है। ऐसी स्थिति में भी एक ही ज्यादा ध्यान दे पाता है। पहले के दौर में भी आज की तरह इतनी हैंड्स आन पैरेटिंग (जिसमें माता-पिता प्रत्यक्ष भागीदारी रखें) नहीं होती थी। पिता पैसे कमाते थे, मां होममेकर थी। पहले माता-पिता के साथ समय बिताने के लिए हम छुट्टियों पर जाते थे। अब आधुनिक पैरेटिंग है। मैं अपने बेटे को आजादी और समय दोनों देता हूं। आज भले ही जिंदगी तेज रफ्तार से चल रही हो, लेकिन हमारे पास सहूलियतें हैं।

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    15-20 चीजें साथ में कर सकते हैं। मैंने अपने बेटे को उनकी उम्र के अनुसार हमेशा समझाया है कि वह सिंगल पिता के बेटे हैं। वह वैसे भी खुशमिजाज बच्चे हैं। उनके कई दोस्त हैं, जिनके सिंगल पैरेंट्स हैं। जब 14-15 साल के हो जाएंगे तो सब समझ पाएंगे।

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    अब लगता है कि फिक्र कम करनी चाहिए थी-राहुल देव 

    अपनी पत्नी के कैंसर से निधन के बाद अभिनेता राहुल देव ने भी अपने बेटे सिद्धांत का पालन-पोषण अकेले किया है। राहुल कहते हैं कि मेरे माता-पिता दोनों कामकाजी थे। मां अध्यापिका थीं, फिर प्रिसिंपल बनीं। दो बजे स्कूल छूटता था, फिर वह हमारा ख्याल रखती थीं। फिर देर रात परीक्षा के पेपर भी जांचती थीं। मेरे पिता ईमानदार पुलिस अफसर थे। 90 साल की उम्र तक तो गाड़ी चला लेते थे। दो बार गणतंत्र दिवस पर अलग-अलग राष्ट्रपति से अवॉर्ड भी लिया। उन्होंने हमेशा यही कहा कि जो अच्छा लगता है, करो। लेकिन नसीहत न देने का उनका यह गुण मुझमें नहीं, क्योंकि जब मेरी पत्नी का देहांत हुआ, तो मेरा बेटा छठी कक्षा में था। मैं चिंतित रहता था।

    जो आजादी स्कूल के दिनों में मुझे थी, वह मैं अपने बेटे को नहीं दे पाया। सिंगल पैरेंटिग मेरे लिए आसान नहीं थी, क्योंकि मैं सिनेमा में काम करता हूं, शूटिंग के लिए ट्रैवल करना होता था। साल 2013 में मेरी जिंदगी में गुरु तरनेव जी आए, उन्होंने राहें आसान की। मम्मी जब तक रहीं, उन्होंने बहुत मदद की। मेरी पत्नी भी बहुत अच्छी मां थीं। मुझे लगता था कि क्या मैं उनके जितना योग्य हूं? स्कूल में पैरेंट्स टीचर मीट के दौरान ज्यादा मांएं ही होती थीं, एक्का-दुक्का पिता आते थे। मैं एक्टर भी था, तो मुझे किसी से कुछ पूछने में भी शर्म आती थी। जो दिक्कत होती थी, मैं अपनी दिल्ली की दोस्त मोनी और अल्का से पूछता था।

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    उनके बच्चे जिस स्कूल में जाते थे, वहां बेटे का दाखिला कराया था। उन्हें स्कूल पसंद नहीं आया, तो बदल भी दिया। उनके स्कूल में सब कुछ लैपटाप पर सबमिट करना होता था। हमारे दौर में ऐसा नहीं था, तो मैंने मदद ली। मुझे याद है पत्नी के चौथे के बाद मुझे फिल्म ब्लू की शूटिंग के लिए जाना था, तो पत्नी की बहन कंचन के पास बेटे को छोड़ा था। उनके लिए मुंबई से दिल्ली तक शिफ्ट हो गया। कुछ दिनों में ही सिद्धांत ने कहा वापस मुंबई चलो। जिस स्कूल में वह पढ़ते थे, उसकी प्रिसिंपल ने इस शर्त पर दोबारा एडमिशन किया कि फिर से स्कूल छोड़ा, तो एडमिशन नहीं कर पाऊंगी। हर जगह लोगों ने मदद की।

    आठवीं कक्षा में दोबारा दिल्ली शिफ्ट हुए, क्योंकि मां को मुंबई सूट नहीं कर रहा था। वह दो साल रुकीं भी थीं। मैं स्कूल छोड़ने और लेने जाता था। मेरे दोस्त का रेस्तरां भी पास था, तो आते वक्त हम पिता-पुत्र वहीं लंच कर लेते थे। वह सबसे मजेदार समय होता था। सिद्धांत भी समझदार रहे हैं। उन्हें पता था कि मैं सिंगल पिता हूं, तो उन्होंने मुझे सपोर्ट ही किया। लंदन में चार साल पढ़ने के लिए चले गए थे, कभी परेशान नहीं किया। जब वह लंदन गए, तो मैं फिल्मों में फिर सक्रिय हो गया। जब लंदन उनसे मिलने जाता था, तो वह मुझे घुमाते थे। आज भी मुझे बिना बताए कई बार दिल्ली वाले घर का बिल भर देते हैं।

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    व्हाट्सएप ग्रुप में मांओं के बीच अकेले करण

    साल 2017 में फिल्मकार करण जौहर भी सरोगेसी से दो जुड़वां बच्चों रूही और यश के पिता बने। एक ओर वह अकेलेपन का दर्द बयां कर चुके हैं, तो दूसरी ओर सिंगल पिता बनने की राह में उनकी मां हीरू जौहर का काफी साथ मिला। करण को एक बार किसी ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा था कि क्या उन्हें अहसास है कि उन्होंने अपने बच्चों से मां का साया छीन लिया है? उस वक्त सिंगल पिता बनने के फैसले पर उन्हें खुद शक हुआ था।

    करण कहते हैं कि उस समय मेरे बच्चे पांच साल के थे। मैंने उनसे पूछा कि क्या तुम दोनों खुश हो? बच्चों ने कहा हां, क्योंकि आप हमारे पिता हैं। उस वक्त सिंगल पिता होने पर गर्व हुआ। दोनों बच्चों के स्कूल के दो अलग वाट्सअप ग्रुप पर 30-32 मांओं के बीच मैं अकेला पिता हूं, जो मजेदार अनुभव है।

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