Film और Movie का अंतर पता है? एक ही समझने की कर बैठे हैं गलती, डिटेल में समझें दोनों के बीच फर्क
क्या आपको पता है कि Film और Movie में क्या अंतर है? इस आर्टिकल में समझें कि फिल्में, मूवीज से कैसे अलग हैं। दोनों के बीच कितना अंतर होता है। ...और पढ़ें

फिल्म और मूवी के बीच क्या है अंतर। फोटो क्रेडिट- एक्स

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। आप सिनेमाघर फिल्म देखने जाते हैं या फिर मूवी? अब आप सोच रहे होंगे कि दोनों में क्या अंतर है लेकिन शायद ही आपको मालूम हो कि फिल्म और मूवी के बीच एक बड़ा अंतर होता है। इस आर्टिकल में समझें कि दोनों कैसे एक-दूसरे से अलग हैं।
सिनेमा का इतिहास पुराना है। करीब 115 साल पहले भारत में सिनेमा शुरू हुआ था। साल दर साल, दशकों में सिनेमा बदला। नई टैक्निक्स आईं। बेहतरीन फिल्में बनीं। कुछ बॉक्स ऑफिस पर छा गईं और कुछ कमाई न करके भी कल्ट बन गईं।
अगर आप भी सिनेमाघरों में फिल्में देखना पसंद करते हैं, लेकिन यह नहीं पता कि मूवी और फिल्म में क्या अंतर है।
मूवी और फिल्म में अंतर
मूवी- यह एंटरटेनमेंट के लिए बनती है। इसका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन होता है। फिल्म में तड़कते-भड़कते गाने होंगे, मजेदार डायलॉग्स होगें, कई बार बिना सिर-पैर के कॉमेडी सीन्स होंगे जो आपको हंसने पर मजबूर करेंगे। साथ ही फिल्म का मकसद बॉक्स ऑफिस पर मोटी कमाई करना होगा। इसलिए ऐसी फिल्मों में ज्यादातर बड़े स्टार्स पर दांव खेला जाता है जो सिनेमाघरों में दर्शकों को खींच सके।
- हम दिल दे चुके सनम
- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
- हेरा फेरी
- वेलकम
- गोलमाल
- धमाल 4
- कुछ कुछ होता है
- जब वी मेट
- एनिमल
फिल्म- यह आर्टिस्टिक स्टोरीटेलिंग पर फोकस करती है। इसका उद्देश्य समाज को कोई मैसेज देना होता है। फिल्म में हीरो कोई बड़ा स्टार या सुपरस्टार नहीं, बल्कि कहानी होती है। इसमें कोई तड़कते-भड़कते सीन्स नहीं होते हैं। बॉक्स ऑफिस को ध्यान में रखकर फिल्में नहीं बनाई जाती हैं। ऐसी फिल्में वही लोग देख पाते हैं, जिन्हें सिनेमा की समझ और दिलचस्पी हो।
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- धुरंधर
- देवदास
- स्वदेश
- लक्ष्य
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- प्यासा
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- 3 इडियट्स
बाकी जॉनर्स का जानिए अंतर
मूवी और फिल्म ही नहीं, बल्कि बायोपिक और ट्रू स्टोरी, सीक्वल और स्पिनऑफ में भी गहरा अंतर है। यहां समझते हैं...
बायोपिक और ट्रू स्टोरी में फर्क
बायोपिक- यह किसी रियल इंसान की जिंदगी की कहानी बताता है। फिल्म में कैरेक्टर भी रियल इंसान से मिलता-जुलता लिया जाता है और कई फिल्मों में नाम भी सेम होता है।
- मैरी कॉम
- एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी
ट्रू स्टोरी- इसमें जो घटना हुई, बस वही दिखाते हैं। इसमें कोई एक्स्ट्रा तड़का नहीं होता है। कैरेक्टर्स नेम भी रियल हों, यह जरूरी नहीं।
- उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
- बॉर्डर
सीक्वल और स्पिनऑफ में अंतर
सीक्वल- इसमें सेम हीरो की कहानी को आगे बढ़ाकर दिखाया जाता है। उसे सीक्वल कहते हैं।
- दृश्यम 2
- दे दे प्यार दे 2
- गदर 2
स्पिनऑफ- इसे आप एक तरह से फ्रेंचाइजी से जोड़ सकते हैं। एक फ्रेंचाइजी में फिल्में बनती हैं जैसे स्पाई थ्रिलर-कॉप थ्रिलर, आधार एक है, लेकिन कहानी और कैरेक्टर अलग है।
- एक था टाइगर
- वॉर
- सिंबा (कॉप थ्रिलर)
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सटायर और पैरोडी मूवीज में अंतर
सटायर- इस तरह की फिल्में सोसाइटी पर तंज कसती हैं, लेकिन कॉमेडी तरीके से।
- पीपली लाइव
- ओएमजी
पैरोडी- ऐसी फिल्मों का मकसद समाज पर तंज कसना नहीं, बल्कि सिर्फ हंसाना है।
- अर्जुन पटियाला
- डुप्लीकेट शोले
लीनियर और नॉन-लीनियर में फर्क
लीनियर- ऐसी फिल्मों में कहानी में कोई ट्विस्ट एंट टर्न नहीं होता है। कहानी शुरू से अंत तक दिखाई जाती है।
- मिस्टर इंडिया
- पार्टनर
नॉन-लीनियर- ऐसी फिल्मों में टाइम जंप करता है। जैसे कई बार फिल्मों की शुरुआत वर्तमान से अतीत की ओर जाती है।
- बर्फी
- गजिनी
सिनेमा का स्तर बहुत बड़ा है। यहां एक-एक फिल्में, जॉनर और कैटेगरी का अंतर होता है।
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