'आप कस्बों तक सिनेमा...', Jagran Film Festival 2026 को सुधीर मिश्रा और मधुर भंडारकर ने क्यों बताया सबसे खास?
जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 का आगाज हो चुका है। इस खास मौके पर सुधीर मिश्रा और मधुर भंडारकर ने अपनी ...और पढ़ें

जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अंकित तोमर, नई दिल्ली। जागरण फिल्म फेस्टिवल का हर साल दर्शकों को बेसब्री से इंतजार रहता है। दिल्ली में एक बार फिर से देश के सबसे बड़े फेस्टिवल्स में से एक जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 का आगाज हो गया है, जहां पहले दिन सुधीर मिश्रा से लेकर मधुर भंडारकर जैसे दिग्गज निर्देशक और एक्टर जावेद जाफरी इस इवेंट का हिस्सा बने।
मधुर भंडारकर और सुधीर मिश्रा ने अपनी फिल्मों के बारे में तो बातें की ही, लेकिन साथ ही ये भी बताया कि जागरण फिल्म फेस्टिवल मेकर्स और फिल्मी दुनिया में जाने का सपना देखने वालों के लिए क्यों अटेंड करना बहुत जरूरी है। दैनिक जागरण संवाददाता अंकित सिंह तोमर के साथ सुधीर मिश्रा और मधुर भंडारकर की एक्सक्लूसिव बातचीत।
जागरण फिल्म फेस्टिवल के साथ आपका कैसा एक्सपीरियंस रहा है?
जिन शहरों में एक अच्छे सिनेमा का अभाव है, जहां एक ही तरह की फिल्में बन रही हैं, उनको आप लोग दूसरे तरीके के सिनेमा से अवगत करवाते हैं, थोड़ा स्वाद बदलते हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि आप अच्छी फिल्में दिखाते हैं, जो हमारी भी मदद करता है, क्योंकि ऑडियंस में अगर स्वाद जागता है, तो हमें भी उन्हें टेस्ट करने का मन करता है, इसलिए मैं पहले एडिशन से जुड़ा है।
आज फिल्म की घोषणा भी हुई है, जिसमें मनोज बाजपेयी गांधी जी का किरदार अदा कर रहे हैं?
फिल्म बना रहा हूं, क्या बनेगी वो आप देखिएगा। गांधी को आप अलग-अलग तरीके से बना रहे हैं, कुछ नया अंदाज होगा। फिल्म का पूरा नाम था 'गांधी एंड माय मदर'। कहानी एक ऐसी मां की है, जो अपने बेटे से कहती है कि इस पर एक फिल्म बनाओ और वो बनाता है। हालांकि, इसमें मतभेद भी हैं। थोड़ा टेढ़ा है। एक एक्टर है, जिसके कुछ सवाल हैं। एक मां हैं, जिनके कुछ ओपिनियन हैं और एक फिल्म है जो डायेक्टर बना रहा है।

जागरण फिल्म फेस्टिवल की आपकी लाइफ में क्या इम्पोर्टेंस रही है?
मधुर भंडारकर: मैं जागरण फिल्म फेस्टिवल से जुड़ा हूं और यहां पर ऑडियंस से इंटरेक्शन अच्छा होता है। फिल्म फेस्टिवल जो होता है, वो मेकर्स के लिए और टेक्निशियंस के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
चांदनी बार जैसी एक कल्ट फिल्म बनी, जिसे आज के समय में बनाना बहुत ही मुश्किल है, उसकी स्क्रीनिग भी हो रही है, क्या विजन था उस फिल्म को बनाने का ?
मधुर भंडारकर: इस फिल्म को बनाना बहुत ही मुश्किल था, क्योंकि इसका बजट ही डेढ़ करोड़ चला गया था। उस समय ये फिल्म बड़ी फिल्मों के साथ नॉमिनेशन में थी, जिनमें कभी खुशी कभी गम, लगान जैसी फिल्में थीं। मेरी फिल्म बहुत ही छोटी थी, मैंने मजाक में कहा भी था कि जो मेरी फिल्म का बजट है, वो किसी बड़े स्टार की कॉस्टयूम का बजट होगा। मुझे खुशी है कि 25 साल के बाद भी लोगों को वह फिल्म पसंद आती है।
उस फिल्म को पुरस्कार मिला,लोगों ने सराहना की और अब मेरी आने वाली फिल्म 'द वाइव्स ऑफ बॉलीवुड', जो एक अलग सब्जेक्ट है। उसमें बॉलीवुड की वाइफ्स का जो अप्स एंड डाउंस है, उसको लेकर मैं दिखाने वाला हूं, जल्द ही दर्शक वह फिल्म देखेंगे।
आपकी फिल्मों में आदमी सिस्टम से लड़ता है, जो बनाना और एग्जीक्यूट करना आसान नहीं है, तो आपको कैसे ये आइडिया आया?
सुधीर मिश्रा: हम सबकी एक फितरत होती है , कुछ फिल्में आपके अंदर उपजती हैं और आप उसी को सुनाते हो। अगर आप कुछ और करोगे, जैसे मैं सोचूं की डेविड धवन जैसी फिल्म बना लूं, लेकिन वो आसान नहीं है। तो जो मैं बना सकता हूं वो ही बना सकता हूं, मेरी फितरत है कि मैं थोड़ा चैलेंज करता हूं। ट्रेडिशन के खिलाफ हूं, ऐसी परवरिश हुई है, क्या करूं।
यह भी पढ़ें- JFF 2026: धमाल के 'मानव' के स्पिन-ऑफ पर जावेद जाफरी का बड़ा खुलासा, क्या इंद्र कुमार के साथ फिर जमेगी जोड़ी?
यह भी पढ़ें- JFF 2026: जागरण फिल्म फेस्टिवल का आगाज आज, सिनेमा के हर रंग से होंगे रूबरू
ग्लैमर आपकी फिल्मों में बहुत क्लियर दिखता है, सिनेमा की एक सच्चाई दिखती है, जो कई फिल्ममेकर्स नहीं दिखा पाते हैं, 2026 में सिनेमा में वो सच है?
मधुर भंडारकर: हां सिनेमा में वो सच अभी भी है, जो वाइव्स ऑफ बॉलीवुड है, उस सब्जेक्ट पर मैं चार पांच साल से सोच रहा था बनाने के लिए। इंडस्ट्री में अगर मेरी बाकी फिल्मों को उजागर किया है, तारीफ़ की है, क्योंकि वो फिल्में उन पर नहीं थी। अगर मैं आज फिल्म ही इंडस्ट्री की वाइफ्स पर बना रहा हूं और दिखा रहा हूं कि उनका अप्स एंड डाउन किस तरह का है, तो मुझे नहीं लगता कि उन्हें कोई भी दिक्कत आनी चाहिए। मेरे लिए मेरी ऑडियंस इम्पोर्टेंट है, मैं क्राफ्ट से कम्प्रोमाइज नहीं करूंगा। आज मैं जागरण फिल्म फेस्टिवल में भी अपनी ऑडियंस की वजह से ही हूं। 25 साल से मैं फिल्में बनाता हूं और बनाता रहता हूं
जागरण फिल्म फेस्टिवल के दर्शकों के लिए सन्देश
मधुर भंडारकर: जागरण फिल्म फेस्टिवल से जुड़ना जरूरी हैं उन हर फिल्ममेकर्स के लिए, जो कुछ अलग करना चाहते हैं, क्योंकि उनमें वो फिल्में देखने को मिलती हैं और लोगों से इंटरेकशन करके उनका नजरिया समझने को मिलता है। जागरण फिल्म फेस्टिवल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि वह छोटे-छोटे शहरों में पहुंचकर लोगों तक सिनेमा पहुंचाता है। 7-8 साल पहले मेरी सत्ता जागरण फिल्म फेस्टिवल में ही दिखाई गई थी। मैं चाहता हूं कि ये फेस्टिवल हर प्रांत, तबके में पहुंचें , ताकि लोगों में एक अवेयरनेस रहे।
सुधीर मिश्रा: जागरण फिल्म फेस्टिवल में फिल्में देखों, जो आपको सिनेमा की एक समझ देती है और फिल्ममेकिंग में मदद करती है।
