Kishore Kumar का आजाद भारत का पहला देशभक्ति गीत, 'एक शब्द' की वजह से किया गया बैन; 77 साल पहले हुआ था रिलीज
किशोर कुमार का आजाद भारत का पहला देशभक्ति गीत 1949 में रिलीज हुआ था। यह गीत सत्ताधारी पार्टी द्वारा बैन कर दिया गया था। ...और पढ़ें
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। किशोर कुमार (Kishore Kumar) भारतीय सिनेमा के उन दिग्गज कलाकारों में से एक थे जिन्होंने प्लेबैक सिंगिंग, एक्टिंग से लेकर डायरेक्शन में भी हाथ आजमाया। यू तो किशोर दा ने कई गीत गाए हैं लेकिन आज आपको आजाद भारत के पहले स्वतंत्रता गीत (Independence Day Songs) के बारे में बताएंगे जिसे सरकार ने बैन कर दिया था।
क्या थी म्यूजिक कंपनी की योजना?
ये पूरी तरह से एक देशभक्ति गीत था। हम बात कर रहे हैं 40 के दशक के अंत की। उस समय कोलंबिया रिकॉर्ड्स नाम की एक बड़ी म्यूजिक कंपनी ने 1949 में स्वतंत्रता दिवस के दूसरे वर्ष को एक अनोखे तरीके से बनाने की योजना बनाए थी। उन्होंने बाला साहब को संगीत निर्देशक और केशव त्रिवेदी जो उस समय एक नए गीतकार थे उन्हें एक गाने के लिए नए बोल लिखने के लिए चुना। ये एक नॉन फिल्मी गाना था।
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संगीत निर्देशक गाने में एक नई, जीवंत और उर्जावान आवाज चाहते थे जो विभाजन के दर्द और निराशा से अलग होकर प्रेम और आशा का संचार करे। किशोर दा इस कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों की पहली पसंद थे और गीत के लिए एक और गायक शशि सामंत की भी पुष्टि की गई। ये वाकई एक डूएट गाना था।
आजाद भारत का पहला गाना कौन सा था?
ये गाना था 'पंद्रह अगस्त की पुण्यतिथि फिर धूमधाम से आई'। अगर आप इस गाने को ध्यान से सुनेंगे तो आप पाएंगे कि इस गाने में वो सबकुछ है जो एक देशभक्ति गाने में होना चाहिए। इसमें राष्ट्रवाद था, त्याग था, धार्मिक समानता थी, लोगों के अधिकार थे और एक कृषि प्रधान समाज की उम्मीदें थीं।
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इस गाने को रिकॉर्ड किया गया और भारत के दूसरे स्वतंत्रता दिवस पर अलग-अलग समारोह में बजाया गया। लेकिन सत्ताधारी पार्टी के किसी सदस्य की नजर गाने के एक शब्द पर अटक गई और उसने इस पर सवाल उठाए।
किस शब्द पर थी आपत्ति
जिस शब्द पर उन लोगों को आपत्ति थी वो था पुण्यतिथि शब्द। उन समय के नेताओं का मानना था कि पुण्यतिथि बरसी या फिर डेथ एनिवर्सरी के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। सत्ताधारी पार्टी के उच्च अधिकारियों के एक समूह ने इस पर शिकायत दर्ज करवाई और गाने को पूरे देश में बैन कर दिया गया।