Krishnavataram की 'सत्यभामा' कौन हैं? 16 की उम्र में शुरू किया अपना बिजनेस, नानी हैं UP की राज्यपाल
पौराणिक फिल्म कृष्णावतारम (Krishnavataram) में सत्यभामा का किरदार काफी चर्चा में है। यह किरदार किसने निभाया और उनका फैमिली बैकग्राउंड क्या है, जानिए.. ...और पढ़ें

कृष्णावतारम से एक्ट्रेस ने किया डेब्यू। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। श्रीकृष्ण की लीला को कई बार फिल्मों और टीवी सीरियल्स में दिखाया गया। श्रीकृष्ण की कहानी बिना राधा के अधूरी है। कई आइकॉनिक शोज राधा-कृष्ण पर आधारित हैं लेकिन हालिया रिलीज फिल्म कृष्णावतारम पार्ट 1: द हार्ट (Krishnavataram Part 1: The Heart) थोड़ी अलग है।
कृष्णावतारम पार्ट 1 में श्रीकृष्ण और राधा की कहानी कम और सत्यभामा की कहानी ज्यादा दिखाई गई है। यह फिल्म राधा से बिछड़ने के बाद, द्वारका से कुरुक्षेत्र तक भगवान कृष्ण की एक भक्तिमय यात्रा के इर्द-गिर्द घूमती है।
कृष्णावतारम से छा गईं सत्यभामा
हार्दिक गुज्जर के निर्देशन में बनी कृष्णावतारम में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका अभिनेता सिद्धार्थ गुप्ता (Siddharth Gupta) ने निभाई है। फिल्म में रुक्मणि से लेकर राधा तक के किरदारों की तारीफ हो रही है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सत्यभामा का किरदार निभाने वाली अदाकारा की है।
कृष्णावतारम में सत्यभामा (Who Is Krishnavataram Satyabhama) की भूमिका संस्कृति जयना (Sanskruti Jayana) ने निभाई है। यह उनका बॉलीवुड में डेब्यू है। फिल्म में सत्यभामा के किरदार को उन्होंने इतनी खूबसूरती से निभाया है कि चारों ओर उन्हीं की चर्चा हो रही है।
नानी हैं राज्यपाल
संस्कृति जयना फिल्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक नहीं रखती हैं। वह एक राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनकी नानी गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल (Governer of UP) हैं।
दादा ने जीता है पद्मश्री
संस्कृति के दादा ईश्वरभाई पटेल पद्म श्री अवॉर्ड जीत चुके हैं। स्वच्छता सुधार और वंचित समुदायों को उनका सम्मान दिलाने के लिए उन्होंने दो लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण करवाया और स्वच्छता व समानता के मूल्यों को बढ़ावा दिया। इसी कारण उन्हें 'भारत के टॉयलेट मैन' भी बुलाया जाता है।
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माता-पिता भी बिजनेस के क्षेत्र में एक्टिव
संस्कृति के पिता जयेश पटेल अब साबरमती हरिजन आश्रम ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। उनकी मां अनर पटेल एक सोशल एंटरप्रेन्योर हैं। उन्होंने 'ग्रामश्री' और 'क्राफ्ट रूट्स' जैसी पहलों के जरिए एक लाख से ज्यादा महिला कारीगरों को सशक्त बनाया है। संस्कृति भी अपनी मां की तरह बिजनेसवुमन बन चुकी हैं।
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16 की उम्र में संस्कृति बनीं बिजनेसवुमन
फिल्मी दुनिया में संस्कृति ने अब कदम रखा है, लेकिन इससे पहले उन्होंने फैशन की दुनिया में अपना नाम कमाया है। फैशन मैनेजमेंट और बिजनेस करने वालीं संस्कृति ने मात्र 16 साल की उम्र में अपना क्लोदिंग ब्रांड शुरू किया था। यही नहीं, उन्होंने लग्जरी ब्रांड्स जिमी चू और बोटेगा वेनेटा के साथ बतौर फैशन कंसल्टिंग भी काम किया है।