58 साल पुराने Mohammed Rafi के इस गाने से विदेशों में बैठे आशिक भी बहलाते हैं मन, दिल को छू जाते हैं लिरिक्स
Mohammed Rafi और Lata Mangeshkar के 58 साल पुराने दिल को छू जाने वाले इस गीत की डिमांड विदेशों तक फैली हुई है। ...और पढ़ें

58 साल पुराना है ये गाना

समय कम है?
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एंटरेटनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दिग्गज गायक मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की जोड़ी ने भारतीय सिनेमा को कई सदाबहार गीत दिए हैं। उनके ये गाने आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। दिल को छूने वाले लिरिक्स और बेहतरीन ताल मेल से सजे कई गानों में से एक ऐसा भी गीत है जिसके ना सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी लाखों दीवाने हैं।
विदेशों में भी है इस गाने का क्रेज
यहां तक विदेशों में इस गाने की फरमाइश भी लोग खूब करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक विदेश में जा बसे कई देशवासियों की डिमांड रहती है इस गाने को देवनागरी हिंदी के अलावा और अंग्रेजी और रोमन में भी उपलब्ध कराया जाए। ताकि वे इसे पढ़ सकें और इसकी मेलोडी का आनंद ले सकें। मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) और लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का यह गाना 58 साल पुराना है लेकिन आज की पीढ़ी भी इसे बड़े चाव से सुनती है।
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गजल (Ghazal) से प्रेरित हैं दिल को छूने वाले लिरिक्स
इस गाने के लिरिक्स साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) ने लिखे थे और इसके बोल मशहूर शायर दाग देहलवी की एक क्लासिक गजल से प्रेरित हैं। वहीं इस गाने को लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था और फिर मोहम्मद रफी-लता मंगेशकर की आवाज ने इसे अमर और सदाबहार बना दिया।
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कौन सा है ये गाना?
दिग्गज गायक मोहम्मद रफी और स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के इस सदाबहार गाने के लिरिक्स हैं- 'ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं' (Yeh Dil Tum Bin Kahin Lagta Nahin)...हम क्या करें'। यह गाना 1968 में रिलीज हुई फिल्म इज्जत (Izzat) का है। जिसे धर्मेंद्र (Dharmendra) और तनुजा (Tanuja) पर फिल्माया गया था।
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रफी और लता मंगेशकर ने दी इन गानों को आवाज
मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने कई बेहतरीन गानों को अपनी आवाज दी है। जिनमें तुम जो मिल गए हो, छुप गए सारे नजारे, जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा, बेखुदी में सनम, धीरे-धीरे चल चांद गगन में शामिल हैं।
फिल्म के बारे में
'इज्जत' 1968 की एक भारतीय हिंदी-भाषा की ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन टी. प्रकाश राव ने किया था। इसमें धर्मेंद्र, तनुजा और जयललिता ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं, और उनके साथ बलराज साहनी और महमूद ने सहायक भूमिकाएं निभाई थीं। यह मुख्य अभिनेत्री के तौर पर जयललिता (Jayalalitha) की एकमात्र बॉलीवुड फिल्म थी। फिल्म के गानों के बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे और संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था।