Lata Mangeshkar ने ताउम्र नहीं किया इस संगीतकार के साथ काम, किशोर कुमार को सबके सामने लगा दी थी फटकार
इस बात को लेकर कई अफवाहें कि Lata Mangeshkar ने ओपी नय्यर के लिए कभी गाना क्यों नहीं गाया। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह?
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ओपी नय्यर ने क्यों नहीं किया लता मंगेशकर के साथ काम?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 1960 के दशक के हिट मशीन, OP नय्यर का गुस्सा बहुत तेज था। गायक माइक के सामने कांपते थे, क्योंकि उन्हें कभी पता नहीं होता था कि संगीतकार कब शीशे के पार से उन पर चिल्ला देगा। हालांकि इस संगीतकार ने कभी लीजेंडरी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं किया। आइए जानते हैं क्यों?
मोहम्म्द रफी पर भी गुस्सा हो गए थे नैयर
मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) के साथ भी ऐसा ही हुआ था; 1960 के दशक में एक समय ऐसा आया जब उन्होंने नय्यर के लिए गाना बंद कर दिया, जिसकी वजह संगीतकार के गुस्से को काबू न कर पाने की समस्या थी। एक रिकॉर्डिंग के दौरान, नय्यर ने किशोर कुमार को 'बेसुरा' गाने के लिए सबके सामने डांटा था।
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आशा भोंसले के साथ थी अच्छी बॉन्डिंग
आशा भोसले (Asha Bhosle) के साथ नय्यर का रिश्ता लंबा, सफल और उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने एक बार कहा था कि नैयर बहुत ज्यादा आक्रामक थे। उन्होंने कहा था, 'मैंने नय्यर साहब के लिए कई हिट गाने गाए। जब गीतकार SH बिहारी ने 'चैन से हमको कभी' लिखा, जिसकी धुन नैयर साहब ने बनाई थी, तो उन्होंने मुझसे कहा कि यह मेरी जिंदगी की कहानी है। शायद वह सही थे'।
क्यों लता मंगेशकर के साथ कभी नहीं किया काम?
नय्यर ( O.P. Nayyar) की मनमौजी प्रतिभा लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) को इतनी प्रभावित नहीं कर पाई कि वे इस मनमौजी संगीतकार के साथ काम करने का जोखिम उठाएं। नय्यर एकमात्र ऐसे बड़े संगीतकार हैं जिनके काम में लताजी की आवाज शामिल नहीं है। इस बारे में कई अफवाहें और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की बातें कही जाती हैं कि लताजी ने नय्यर के लिए कभी गाना क्यों नहीं गाया।
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बात 1952 की है, जब नय्यर चाहते थे कि लताजी 'आसमान' नाम की एक फिल्म के लिए गाना गाएं। धुन तय हो चुकी थी, और रिकॉर्डिंग की तारीख और समय भी तय हो गया था। लेकिन, लताजी रिकॉर्डिंग के लिए नहीं पहुंचीं। जब इस बारे में पूछा गया, तो लताजी ने एक बार कहा था, 'यह सच है कि मुझे नय्यरजी के लिए एक गाना रिकॉर्ड करना था। लेकिन ऐसा कभी हो नहीं पाया। मुझे याद नहीं कि ऐसा क्यों हुआ। लेकिन मैं रिकॉर्डिंग के लिए नहीं पहुंच पाई'।
इस घटना के बाद, शायद उन्हें बुरा लग गया और हमने कभी साथ काम नहीं किया। जो हुआ, अच्छा ही हुआ। वह एक बेहतरीन संगीत निर्देशक थे। लेकिन उनका अंदाज मुझे रास नहीं आया। उन्होंने खुद मुझसे यही कहा था। और मैं उनकी बात से सहमत थी। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर मुझे एक खास गायिका के तौर पर सराहा था। मेरे उनके साथ बहुत अच्छे संबंध थे'।

नय्यर ने लताजी को बताया था नंबर 1 सिंगर
डॉ. मंदार वी. बिचू को दिए एक इंटरव्यू में नय्यर ने कहा था, 'मैं अपने खाने की कसम खाकर कहता हूं कि, भले ही मैंने लता के साथ कभी काम नहीं किया, फिर भी मैं उन्हें भारत की नंबर 1 गायिका मानता हूं। आशा ने उनकी जगह लेने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह कभी भी उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाईं। लता तो बस बेमिसाल थीं, उन्हें तो भगवान ने खुद अपनी आवाज दी थी!
लगभग हर संगीतकार के साथ उनका काम - चाहे वह मदन मोहन हों, रोशन, एस.डी. बर्मन या शंकर-जयकिशन - हमेशा बेहतरीन रहा। जरा सोचिए, अगर मदन मोहन की गजलें शमशाद या किसी और ने गाई होतीं, तो क्या वे उस कलात्मक ऊंचाई तक पहुंच पातीं, जिस ऊंचाई तक वे लता की आवाज में पहुंच पाईं?'
O.P. Nayyar के गाने
ओपी नय्यर के गानों में लेके पहला पहला प्यार, उड़े जब जब जुल्फें तेरी, जानें कहां मेरा जिगर गया जी, तारीफ करूं क्या उसकी जैसे शानदार और सदाबहार साॉन्ग्स शामिल हैं।
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