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    गरीबी में बीते दिन, चौकीदार बन किया काम; Ramayan के 'महामंत्री सुमंत' की रुला देगी असल जिंदगी की कहानी

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 04:49 PM (IST)

    रामानंद सागर के दूरदर्शन के शो 'रामायण' में 'सुमंत' का किरदार अदा करने वाले अभिनेता चंद्रशेखर वैद्य की पुण्यतिथि पर पढ़ें उनकी रुला देने वाली कहानी। ...और पढ़ें

    'रामायण' एक्टर चंद्रशेखर की डेथ एनिवर्सरी/ फोटो- Instagram

    'रामायण' एक्टर चंद्रशेखर की डेथ एनिवर्सरी/ फोटो- Instagram

    HighLights

    1. फिल्मों में आने से पहले चौकीदारी करता था ये अभिनेता 

    2. 'रामायण' में 'सुमंत' के किरदार से मिला लोगों का प्यार 

    3. जूनियर आर्टिस्ट से मेन लीड हीरो और फिर बने साइड कैरेक्टर

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया के जरिए आज के समय में फिल्मों और टीवी की दुनिया में एंट्री लेने का रास्ता भले ही थोड़ा आसान हो गया हो, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। मायानगरी मुंबई में हजारों की भीड़ में लोग आंखों में एक्टर और डायरेक्टर बनने का ख्वाब संजोकर लाते थे, लेकिन यहां सफलता बहुत ही कम लोगों को मिलती थी।

    रामानंद सागर की 'रामायण' में राजा दशरथ के महामंत्री 'सुमंत' का किरदार अदा करने वाले अभिनेता का हाल भी कुछ ऐसा ही थी। जिन्होंने गरीबी से उठकर बॉलीवुड की चकाचौंध देगी और फिर इस ग्लैमर वर्ल्ड में सिर्फ साइड कैरेक्टर बनकर रह गए। कौन थे वह अभिनेता, जिन्होंने स्टूडियो के बाहर 3 से 4 घंटे बैठकर एक रोल पाने के लिए पी खूब चाए, उनकी डेथ एनिवर्सरी पर पढ़ें अभिनेता के संघर्ष से जुड़ा ये किस्सा:

    कभी चौकीदारी तो कभी मील में खींची ट्रॉली

    जिस दिग्गज अभिनेता का हम आपके लेख में जिक्र कर रहे हैं, वह कोई और नहीं, बल्कि चंद्रशेखर वैद्य हैं, जिन्होने बॉलीवुड में एक अलग जगह बनाई। पीपल एंड हिस्ट्री यूट्यूब चैनल के मुताबिक, हैदराबाद में जन्मे चंद्रशेखर के पिता सरकारी अस्पताल में डॉक्टर थे और मां एक हाउसवाइफ। जब चंद्रशेखर बहुत छोटे थे, तो उनकी मां का इंतकाल हो गया था। जब अभिनेता महज 13 साल के थे, तो उनके पिता ने उनकी शादी करवा दी और फिर उसके बाद खुद भी शादी कर ली।

    जब तक चंद्रशेखर 7वीं में पढ़ रहे थे, तब तक उनकी पढ़ाई जारी रही, लेकिन उसके बाद गरीबी का आलम छा गया और उन्हें मजबूरन स्कूल छोड़ना पड़ा। 1940 में वह अपनी दादी के पास रहने के लिए बेंगलुरु आ गए, लेकिन उनकी पत्नी को उनके नहीं भेजा गया। जब उन्हें नौकरी नहीं मिली, तो चौकीदार के रूप में अभिनेता काम करने लगे।

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    ramayan actor chandrashekhar vaidya strory  (1)

    भारत छोड़ो आंदोलन का भी बने हिस्सा

    कुछ सालों तक चंद्रशेखर ने चौकीदारी की नौकरी की, उसके बाद वह 'भारत छोड़ो आंदोलन' का हिस्सा बन गए। वह जब अपने घर लौटे, तो एक मील में ट्रॉली खींचने का काम उन्हें मिला,जहां उनकी साढ़े 12 रुपए तनख्वाह थी। इस दौरान उनके दोस्त हमेशा उन्हें कहते थे कि तू बहुत अच्छा दिखता है, तो हीरो क्यों नहीं बन जाता। उनको एक्टिंग की चाह तो थी, लेकिन मजबूरियां बार-बार आड़े आ जाती थी। हालांकि, एक दिन उन्होंने यह फैसला लिया कि वह मुंबई जाएंगे।

    हाथ में 40 रुपए लेकर वह मुंबई आ गए और यहां पर कोलाबा के एक चॉल में रहने लगे। वह रोज स्टूडियो के चक्कर काटते, लेकिन उन्हें कोई काम नहीं देता था, बल्कि उन्हें स्टूडियो में घुसने भी नहीं दिया जाता था।

    chandrashekhar

    3-4 घंटे तक लगातार पी थी चाय

    अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बात करते हुए चंद्रशेखर ने तबस्सुम टॉकीज को बताया था कि एक दिन वह रंजीत स्टूडियो के बाहर खड़े हुए थे, तभी एक शख्स आया और उनसे पूछा एक्टर बनना चाहते हो, तो उन्होंने तपाक से 'हां' में जवाब दिया। वह शख्स उन्हें अंदर लेकर गया और चाय की दुकान पर बिठा दिया और बोला जितनी चाय पी सकते हो पी लो। चंद्रशेखर वहीं पर 3-4 घंटे बैठकर चाय पीते रहे। फिर अचानक जब पैकअप की आवाज आई, तो उन्होंने देखा, तो वह शख्स उनकी तरफ आ रहा था। उन्होंने अभिनेता के हाथ में डेढ़ रूपये दिए और बोला कि तुम आज से जूनियर आर्टिस्ट हो और यहीं से उनकी फिल्मों में जर्नी शुरू हो गई और साल 1950 में रिलीज हुई फिल्म 'बेबस' में उन्होंने काम किया।

    ramayan actor chandrashekhar vaidya strory  (2)

    इसके बाद अभिनेता ने दाग,मीनार जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया। 250 से अधिक फिल्मों का हिस्सा रहे चंद्रशेखर ने साल 1953 में अपनी पहली फिल्म 'सुरंग' से बतौर हीरो शुरुआत की, जिसे वी.शांताराम ने बनाया था। इसके अलावा वह बरसात की रात, गेटवे ऑफ इंडिया, फैशन, बात एक रात की जैसी कई फिल्मों में सपोर्टिंग एक्टर के रूप में नजर आए।

    हीरो बनने के बाद साइड कैरेक्टर निभाने का लिया निर्णय

    साल 1964 तक बॉलीवुड में अपने कदम जमाने के बाद चंद्रशेखर ने फिल्म 'चा-चा-चा' बनाई, जिसमें उन्होंने अभिनय भी किया और मूवी के निर्माता भी रहे। हेलन स्टारर यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और उन्होंने इसके बाद एक और म्यूजिकल फिल्म 'स्ट्रीट सिंगर' बनाई। हालांकि, 1971 में एक बार उन्होंने फिर से साइड रोल निभाने का निर्णय लिया और वह राजेश खन्ना की फिल्म 'शक्ति समानता' में कैरेक्टर एक्टर के रूप में नजर आए।

    चंद्रशेखर को असली पहचान रामानंद सागर के दूरदर्शन पर प्रसारित शो 'रामायण' से मिली, जिसमें उन्होंने 'सुमंत' का किरदार निभाया। किरदार मुख्य नहीं था, लेकिन दर्शकों ने उनका रोल बेहद पसंद किया। साल 2021 में 16 जून को 98 वर्षीय अभिनेता का स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह से निधन हो गया।

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