'Ramayana से लेकर कृष्णावतारम् तक, पर्दे पर लौट रहा है फिर से पौराणिक फिल्मों का स्वर्ण युग
बॉक्स आफिस पर दिव्य दृश्य दिखने वाला है। बड़े पर्दे पर आने को तैयार हैं कई पौराणिक गाथाएं। जो लंबे समय से हमारी जड़ों में रची-बसी हैं और अब बनेंगी आस् ...और पढ़ें

फिल्मी पर्दे पर लौट रही है पौराणिक फिल्में / फोटो-Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दीपेश पांडे, मुंबई। आस्था, ईश्वर और धर्म पर आधारित फिल्में जीवन का सही अर्थ समझाती हैं। सिनेमा जब धार्मिक गाथाओं को बड़े पर्दे पर दर्शाता है तो वह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और आत्मा का सेतु बन जाता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में कई पौराणिक फिल्में कतार में हैं।
इनमें दो हिस्सों में बन रही नितेश तिवारी निर्देशित फिल्म ‘रामायणम्’ के अलावा विक्की कौशल अभिनीत ‘महावतार परशुराम’, ऋषभ शेट्टी अभिनीत ‘जय हनुमान’ व हार्दिक गज्जर निर्देशित ‘कृष्णावतारम्’ चर्चा में हैं।
हमारे अंदर हैं श्रीराम
फिल्म ‘रामायणम्’ में राम और परशुराम दोनों भूमिकाएं निभा रहे अभिनेता रणबीर कपूर ने हाल ही में कहा था, ‘ऐसा मौका मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। एक तरफ मैं सेट पर भगवान राम की भूमिका निभा रहा था, वहीं दूसरी तरफ घर जाकर अपनी बेटी को भगवान राम की कहानियां सुना रहा था। मैं देख रहा था कि वह साढ़े तीन साल की बच्ची कितनी दिलचस्पी के साथ उन कहानियों को सुन रही थी। हमारे अंदर भगवान राम के प्रति खिंचाव और प्यार अपने आप ही आ जाता है। हम दुनिया भर के दर्शकों को वही दिखाना चाहते हैं, जिस पर हम सदियों से विश्वास रखते आए हैं।’
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तकनीक का मिला साथ
पौराणिक कहानियों को दिव्य बनाने में उन्नत तकनीक तथा विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) का भी अच्छा साथ मिल रहा है। फिल्म ‘महावतार परशुराम’ के लेखक निरेन भट्ट कहते हैं, ‘पुराण और महाकाव्य तो हमारी संस्कृति में बुने हुए हैं। पहले ‘संपूर्ण रामायण’ और ‘जय संतोषी मां’ जैसी फिल्में बनती थीं। बीच में प्रत्यक्ष तौर पर पौराणिक कहानियां बननी बहुत कम हो गईं, क्योंकि जिस स्तर पर उन्हें दर्शाया जाना चाहिए, वह दर्शाने के लिए हमारे पास तकनीक नहीं थी। अब हमारे पास वो तकनीक और साधन आ चुके हैं। अब हम भी अपनी कहानियों को उस तरीके से कहने का सामर्थ्य रखते हैं कि पूरी दुनिया उन्हें नोटिस करें।’
हमारी संस्कृति, हमारे आदर्श
फिल्म ‘हनुमैन’ के निर्देशक प्रशांत वर्मा पुराणों और ग्रंथों से जुड़ी करीब 12 फिल्में बना रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मैं श्रीराम और हनुमान की कहानियां सिनेमा के माध्यम से इसलिए लाना चाहता हूं, क्योंकि आजकल के बच्चे ‘डेडपूल’ और ‘आयरन मैन’ जैसे सुपरहीरो बनना चाहते हैं, उन्हें आदर्श मानते हैं। हमारे यहां श्रीराम, कृष्ण और हनुमान जी जैसे आदर्श हैं, जिनके दिखाए मार्ग पर चलकर हम अच्छा जीवन जी सकते हैं।’ वहीं फिल्म ‘रामायणम्’ के निर्माता नमित मल्होत्रा इस तरह की फिल्मों और कहानियों को वर्तमान की जरूरत मानते हैं। उनका कहना है, ‘आज हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जो बंटी हुई है और टकराव के दौर से गुजर रही है। ऐसे में आज के दौर में भी यह कहानी दुनिया के लिए बहुत प्रासंगिक है।’
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सबसे जरूरी है समर्पण
सिनेमा रचनात्मक काम है, लेकिन साल 2023 में प्रदर्शित फिल्म ‘आदिपुरुष’ में कुछ पात्रों के मामले में दिखाई रचनात्मकता लोगों को रास नहीं आई। इसके पीछे की वजह को लेकर फिल्म ‘कृष्णावतारम् : पार्ट 1 द हार्ट’ के निर्माता साजन राज कुरुप कहते हैं, ‘इन कहानियों को बताने के लिए सबसे जरूरी है श्रद्धा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी।
हर निर्णय में यह ध्यान रखना पड़ता है कि हम मर्यादा बनाए रखें, भावनाओं का सम्मान करें और किसी भी प्रकार की अतिशयोक्ति या विकृति से बचें। यहां क्रिएटिविटी से ज्यादा समर्पण काम करता है। हमारी कहानियां भव्य हैं, गहरी हैं और उन्हें उसी स्तर पर दुनिया के सामने लाने के लिए सिनेमा सबसे उपयुक्त माध्यम है।’
एनिमेशन और एआइ में भी छाई
भारतीय पुराणों और महाकाव्यों पर आधारित फिल्में एनिमेशन और एआइ के माध्यम से भी खूब बन रही हैं। पिछले साल प्रदर्शित हुई एनिमेशन फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एनिमेटेड फिल्म बन गई है। इस फिल्म की अभूतपूर्व सफलता के बाद मेकर्स ने 'महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स' की घोषणा की है, जिसके तहत भगवान विष्णु के अन्य अवतारों पर भी फिल्में बनेंगी। _निर्माता विक्रम मल्होत्रा एआइ की मदद से ‘चिरंजीवी हनुमान: द इटरनल’ फिल्म बना रहे हैं।
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